आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का कहना है कि दुनिया में चल रही जंग और झगड़े तभी खत्म होंगे, जब लोग एक-दूसरे के बीच की एकता को समझना शुरू करेंगे. आज (शुक्रवार) जैसलमेर के 'चादर महोत्सव' में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ईश्वर के रूप भले ही अलग-अलग हों, लेकिन सच तो एक ही है. उनके मुताबिक, जब तक हम इस एकता को नजरअंदाज करेंगे, तब तक दुनिया से आपसी टकराव खत्म नहीं हो सकता.
क्यों नाकाम हो रहे हैं UN जैसे संगठन?
इस दौरान, मोहन भागवत ने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि पहले विश्व युद्ध के बाद लीग ऑफ नेशंस बना और दूसरे विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र (UN) का गठन हुआ. इन सबका मकसद जंग रोकना था, लेकिन दुनिया आज भी संघर्षों से जूझ रही है. उन्होंने कहा कि मानवता अक्सर एकता के सच को भूल जाती है, जिसकी वजह से ये बड़ी संस्थाएं भी पूरी तरह सफल नहीं हो पा रही हैं. उनके अनुसार, लोग बाहर से अलग दिख सकते हैं, लेकिन अंदर से सब एक ही हैं.
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तर्क से नहीं, प्रेम से निकलेगा हल
भारतीय चिंतन पर जोर देते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा कि विवादों को केवल बहस या तर्क-वितर्क से नहीं सुलझाया जा सकता. इसके लिए समाज में आपसी भाईचारा और सद्भाव पैदा करना होगा. उन्होंने अपील की कि समाज को धीरे-धीरे स्वार्थ और बंटवारे से ऊपर उठना चाहिए. उनके मुताबिक, भारत के पास दुनिया की समस्याओं का असली समाधान उसकी पुरानी परंपराओं में ही छिपा है. अगर हम बिना किसी भेदभाव के एकजुट हों, तो भारत न केवल समृद्ध बनेगा बल्कि 'विश्वगुरु' के रूप में एक बेहतर दुनिया का निर्माण भी करेगा.
सभी धर्म और मार्ग ईश्वर तक पहुंचने के रास्ते
मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि अलग-अलग परंपराएं और मार्ग इसलिए बने क्योंकि एक ही रास्ता सबके लिए सही नहीं हो सकता. उन्होंने कहा, "सभी संप्रदाय ईश्वर तक पहुंचने के अलग-अलग रास्ते हैं और सभी सम्मान के हकदार हैं. हर व्यक्ति अपने विश्वास के हिसाब से अपना रास्ता चुनता है." उन्होंने लोगों से अपील की कि वे पूरी दुनिया को अपना परिवार मानें और किसी को भी पराया न समझें.
संबोधन के दौरान आरएसएस प्रमुख भागवत ने प्रसिद्ध जैन संत आचार्य जिनदत्तसूरी (दादा गुरुदेव) का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि विदेशी आक्रमणों के समय आचार्य सूरी ने समाज को एकजुट करने में बड़ी भूमिका निभाई थी. उन्होंने जैसलमेर के चादर महोत्सव से जुड़ी उस मान्यता का भी जिक्र किया. मान्यता है कि आचार्य सूरी के अंतिम संस्कार के समय उनके वस्त्र अग्नि में नहीं जले थे. कहा जाता है कि सदियों पहले इन चमत्कारी वस्त्रों के स्पर्श से पवित्र हुए जल से जैसलमेर में फैली भीषण महामारी खत्म हो गई थी.
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शनिवार को निकलेगी भव्य शोभायात्रा
जैसलमेर में 6 से 8 मार्च तक चलने वाले इस चादर महोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है. शनिवार को जैसलमेर किले से एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें पवित्र चादर और भक्ति झांकियां शामिल होंगी. श्रद्धालु इन चमत्कारी वस्त्रों के दर्शन और पूजा के लिए काफी उत्साहित हैं.
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