खामेनेई की मौत पर राजस्थान में उबाल, सड़कों पर प्रदर्शन और... केंद्र से ईरान के समर्थन की मांग

धौलपुर में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई की मौत के बाद शिया समुदाय सड़कों पर उतर आया. लोगों ने बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ नारेबाजी कर पुतला दहन किया. शिया जामा मस्जिद में शोकसभा आयोजित कर अमेरिका-इजरायल की कार्रवाई की निंदा की गई और केंद्र सरकार से ईरान के समर्थन की मांग की गई.

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अमेरिका-इजरायल के खिलाफ लगे नारे.(Photo: Umesh Mishra/ITG) अमेरिका-इजरायल के खिलाफ लगे नारे.(Photo: Umesh Mishra/ITG)

उमेश मिश्रा

  • धौलपुर,
  • 01 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:01 PM IST

अमेरिका- इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब वैश्विक स्तर पर दिखाई दे रहा है. अमेरिका-इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई की मौत के बाद शिया मुस्लिम समुदाय के लोग सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं. इसी क्रम में राजस्थान के धौलपुर जिले में भी शोक और आक्रोश का माहौल देखने को मिला.

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धौलपुर में शिया समुदाय के लोगों ने एकत्र होकर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों ने दोनों नेताओं के पुतले दहन कर विरोध दर्ज कराया.

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केंद्र सरकार से ईरान के समर्थन की अपील

प्रदर्शन के दौरान शिया समुदाय के लोगों ने केंद्र सरकार से अपील की कि भारत को ईरान का साथ देना चाहिए. लोगों ने अमेरिका और इजरायल के हमले की निंदा करते हुए इसे आतंकवादी कार्रवाई बताया. प्रदर्शनकारियों ने ‘इजरायल मुर्दाबाद’, ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ और ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद’ जैसे नारे लगाकर अपना आक्रोश व्यक्त किया.

समुदाय के लोगों ने शिया जामा मस्जिद में शोकसभा का आयोजन भी किया. इस दौरान अमेरिका और इजरायल की सरकारों के प्रति रोष प्रकट किया गया और मरहूम खामेनेई के लिए दुआ कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई.

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पवित्र महीने में हमले पर जताया रोष

शिया समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका पवित्र महीना रोजे का चल रहा है और इसी दौरान अमेरिका और इजरायल के हमले में अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई शहीद हो गए. उन्होंने इसे कातिलाना और कायरतापूर्ण हमला बताया.

समुदाय के लोगों का कहना था कि खामेनेई का “जुर्म” केवल इतना था कि वे गाजा और फलस्तीन के मजलूमों की हिमायत कर रहे थे. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल की सरकारें उन मजलूम लोगों को मिटाना चाहती हैं और उनके बच्चों तक को शहीद किया जा रहा है. घटना के बाद क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल बना हुआ है.

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