कुछ दिनों बाद शादी होनी थी. घर में तैयारियां चल रही थीं. रिश्तेदारों को फोन जा रहे थे. भविष्य के सपने बुने जा रहे थे. लेकिन किसी को नहीं पता था कि एक खूबसूरत तस्वीर की तलाश एक परिवार की पूरी दुनिया बदल देगी. राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित गोरी धाम में एक ऐसा हादसा हुआ, जिसने शादी की खुशियों को मातम में बदल दिया.
चित्तौड़गढ़ का रहने वाला अर्जुन दमामी अपनी मंगेतर के साथ घूमने और कुछ यादगार तस्वीरें लेने यहां पहुंचा था. लेकिन कुछ मिनट बाद ही वह मंगेतर की आंखों के सामने गहरे पानी में समा गया. गोरी धाम राजसमंद के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में गिना जाता है. पहाड़ियों के बीच बहता पानी, प्राकृतिक कुंड और हरियाली यहां आने वालों को अपनी तरफ खींचते हैं. सोशल मीडिया के दौर में ऐसी जगहें फोटोशूट और रील्स के लिए पहली पसंद बन चुकी हैं.
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अर्जुन भी अपनी मंगेतर और उसके अंकल के साथ यहां पहुंचा था. मंदिर परिसर तक सब कुछ सामान्य था. लेकिन इसके बाद कहानी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी. मंगेतर के अंकल मंदिर परिसर में रुक गए. अर्जुन और उसकी मंगेतर नीचे की तरफ चले गए. दोनों ने कहा कि कुछ फोटो लेकर वापस आ जाएंगे.
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नीचे पहुंचने के बाद दोनों फोटोशूट में व्यस्त थे. सामने प्राकृतिक नजारा था और पास ही पानी से भरा गहरा कुंड. इसी दौरान अर्जुन पानी के करीब पहुंचा. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह नहाने के लिए भी आगे बढ़ा, तभी अचानक उसका पैर फिसल गया.
एक पल पहले जो युवक तस्वीरों के लिए पोज दे रहा था, अगले ही पल गहरे पानी में खुद को संभालने की कोशिश कर रहा था. मंगेतर ने मदद के लिए चीखना शुरू कर दिया. लेकिन कुंड की गहराई इतनी ज्यादा थी कि अर्जुन कुछ ही क्षणों में पानी के भीतर गायब हो गया. यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं था, बल्कि एक ऐसा सीन था, जिसे शायद उसकी मंगेतर जिंदगी भर भूल नहीं पाएगी.
जिस शख्स के साथ उसने आने वाले जीवन के सपने देखे थे, उसे अपनी आंखों के सामने डूबते देखना किसी सदमे से कम नहीं था. उसकी चीख सुनकर आसपास मौजूद लोग दौड़े. कुछ लोगों ने बचाने की कोशिश भी की, लेकिन पानी गहरा था और जगह बेहद कठिन... तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
रातभर चलता रहा तलाशी अभियान
घटना की सूचना मिलते ही दिवेर थाना पुलिस मौके पर पहुंची. स्थानीय ग्रामीणों और नागरिक सुरक्षा टीम को भी बुलाया गया. पानी में देर रात तक सर्च ऑपरेशन चलता रहा. लेकिन अंधेरा, गहराई और दुर्गम इलाका राहत कार्य में बड़ी बाधा बने रहे. हर बीतते घंटे के साथ परिजनों और साथ मौजूद लोगों की उम्मीदें कम होती जा रही थीं.
आखिरकार अगले दिन उदयपुर से SDRF की टीम बुलाई गई. सुबह फिर से संयुक्त अभियान शुरू हुआ. गोताखोरों ने गहरे पानी में उतरकर तलाश शुरू की. घंटों की मशक्कत के बाद अर्जुन का शव कुंड से बाहर निकाला जा सका.
100 फीट ऊंची पहाड़ी बनी नई चुनौती
जिस कुंड से शव निकाला गया, वहां तक पहुंचना जितना मुश्किल था, वहां से शव को बाहर लाना उससे भी ज्यादा कठिन. शव को खाई जैसे हिस्से से निकालकर लगभग 100 फीट ऊंची खड़ी पहाड़ी तक पहुंचाना था. रास्ता संकरा और फिसलन भरा था. स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस जवानों ने मिलकर यह जिम्मेदारी उठाई. कंधे से कंधा मिलाकर उन्होंने शव को ऊपर तक पहुंचाया.
अर्जुन की मौत की खबर उसके घर पहुंची तो माहौल बदल गया. जिस घर में शादी की तारीखों, कपड़ों और मेहमानों की बातें हो रही थीं, वहां अचानक सन्नाटा छा गया. परिजन उस युवक का इंतजार कर रहे थे जो जल्द ही दूल्हा बनने वाला था. लेकिन घर पहुंची उसकी पार्थिव देह. पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है.
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गोरी धाम की यह घटना एक परिवार के लिए तो सदमा है ही, यह उन तमाम लोगों के लिए भी चेतावनी है, जो फोटो, वीडियो और सोशल मीडिया कंटेंट के लिए जोखिम भरी जगहों तक पहुंच जाते हैं. अक्सर खूबसूरत दिखने वाले जलकुंड, झरने और पहाड़ी इलाके भीतर से कितने खतरनाक हो सकते हैं, इसका अंदाजा बाहर से नहीं लगता.
अर्जुन और उसकी मंगेतर भी शायद कुछ खूबसूरत तस्वीरें लेकर लौटना चाहते थे. लेकिन गोरी धाम का वह गहरा कुंड उनकी कहानी का आखिरी फ्रेम बन गया. एक तरफ कैमरा था, दूसरी तरफ सपनों से भरी जिंदगी. लेकिन एक फिसलन ने दोनों के बीच हमेशा के लिए दूरी पैदा कर दी.
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