बंगाल में BJP की आंधी में ऐसे पिछड़ी ममता, ये आठ फैक्टर रहे अहम

पश्चिम बंगाल की 293 सीटों पर काउंटिंग जारी है. एक सीट फलता पर 21 मई को मतदान होगा. रुझानों में बीजेपी को बहुमत मिला है. बीजेपी 194 सीटों पर आगे चल रही है जबकि चार सीटें जीत चुकी है.

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पश्चिम बंगाल में BJP की आंधी में ऐसे पिछड़ीं ममता (Photo: ITG) पश्चिम बंगाल में BJP की आंधी में ऐसे पिछड़ीं ममता (Photo: ITG)

प्रीति चौधरी

  • नई दिल्ली,
  • 04 मई 2026,
  • अपडेटेड 4:56 PM IST

पश्चिम बंगाल की 293 सीटों पर काउंटिंग जारी है. एक सीट फलता पर 21 मई को मतदान होगा. रुझानों में बीजेपी को बहुमत मिला है. बीजेपी 194 सीटों पर आगे चल रही है जबकि चार सीटें जीत चुकी है. वहीं, टीएमसी 88 सीटों पर आगे चल रही है जबकि वह एक सीट जीत चुकी है. ऐसे में बंगाल में बीजेपी की इस आंधी के फैक्टर्स  को समझना जरूरी है. 

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फैक्टर 1- हिंदू वोटर्स का ध्रुवीकरण

बंगाल में बीजेपी की आंधी का एक महत्वपूर्ण कारक हिंदू वोटों का व्यापक ध्रुवीकरण है, जहां धार्मिक पहचान के आधार पर लामबंदी से बीजेपी को मदद मिली.

दूसरा फैक्टर- एंटी इंकम्बेंसी की मजबूत लहर 

बंगाल में एंटी इंकम्बेंसी यानी सत्ता विरोधी लहर ने बीजेपी के पक्ष में काम किया. मतदाताओं के कुछ वर्गों ने लंबे समय से बंगाल में सत्ता में रहने और शासन की कथित कमियों के प्रति असंतोष जताया. स्थानीय नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी ने एंटी टीएमसी लहर को और तेज किया.

तीसरा फैक्टर- महिला मतदाताओं और सुरक्षा मुद्दों पर फोकस

महिला मतदाताओं तक सुनियोजित पहुंच और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर लगातार जोर देने से बीजेपी ने उन क्षेत्रों में भी अपनी पकड़ मजबूत की, जिन्हें पारंपरिक रूप से दीदी का वोट बैंक माना जाता था.

चौथा फैक्टर- ‘बाहरी’ नैरेटिव का मुकाबला

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बीजेपी ने क्षेत्रीय पहचान व आकांक्षाओं के साथ जोड़कर बाहरी होने के आरोप को कमजोर करने की कोशिश की.

पांचवां फैक्टर- नरेंद्र मोदी और अमित शाह का हाई-वोल्टेज कैंपेन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में जोरदार चुनाव प्रचार ने पार्टी के संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाया और जमीनी स्तर पर मजबूत माहौल बनाया. इसके साथ ही, यह विश्वास स्थापित करने की कोशिश की गई कि बीजेपी सत्ता में आ सकती है.

छठा फैक्टर- जमीनी स्तर पर मजबूत संगठन

2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के पास तृणमूल कांग्रेस को चुनौती देने के लिए पर्याप्त संगठनात्मक मजबूती नहीं थी. इस कमी को दूर करते हुए पार्टी ने बूथ स्तर की मशीनरी को मजबूत करने और अपने जमीनी नेटवर्क का विस्तार करने पर ध्यान दिया.

सातवां फैक्टर- SIR का प्रभाव

SIR के तहत मतदाता सूची से नाम हटने के प्रभाव से बीजेपी को फायदा पहुंचा और करीबी मुकाबलों में बीजेपी के पक्ष में रुझान को प्रभावित किया.

आठवां फैक्टर- मुस्लिम वोटों का विभाजन

SIR के बावजूद पश्चिम बंगाल में मुस्लिम वोट पूरी तरह से टीएमसी के पक्ष में एकजुट नहीं हुए. जिन सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं का प्रतिशत अधिक है. वहां के रुझानों से टीएमसी के खिलाफ बड़ा झुकाव दिखा. इसका सबसे अधिक फायदा वाम दलों और कांग्रेस को मिला.

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