मोदी और बीजेपी के लिए बंगाल का ‘जंगलराज’ बिहार के मुकाबले कितना मुश्किल?

बिहार से बंगाल की ओर चुनावी गंगा बहाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब जंगलराज के नाम पर ममता बनर्जी को घेरने लगे हैं. बंगाल के लिए वो महा-जंगलराज शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं - क्या जंगलराज बिहार की तरह बंगाल में भी कमाल दिखा सकेगा?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घुसपैठियों के बहाने ममता बनर्जी को बंगाल में महाजंगलराज के नाम पर घेरा है. (Photo: File) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घुसपैठियों के बहाने ममता बनर्जी को बंगाल में महाजंगलराज के नाम पर घेरा है. (Photo: File)

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 19 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:56 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में फिर से 'पोरिबर्तन' का आह्वान किया है. और, कहा है कि बंगाल के लोग 15 साल के महा-जंगलराज का खात्मा करने जा रहे हैं. पिछले चुनावों की तरह मोदी ने इस बार भी कहा कि बंगाल की जनता अब असली परिवर्तन चाहती है. 

बिहार चुनाव के ठीक बाद मोदी ने कहा था कि गंगा बिहार के बाद बंगाल की तरफ ही बहती है. अब मोदी कह रहे हैं, अभी तो बीजेपी-एनडीए ने बिहार में जंगलराज को रोका है... अब टीएमसी के महाजंगलराज को विदा करने के लिए तैयार है.

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बीजेपी की नजर तो पश्चिम बंगाल पर 2014 में केंद्र की सत्ता पर काबिज होने के बाद से ही लगी है. मुकुल रॉय के बाद 2021 में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर शुभेंदु अधिकारी के बीजेपी में आ जाने के बाद काफी उम्मीद भी हो गई थी. मुकुल रॉय के मुकाबले शुभेंदु अधिकारी ज्यादा फायदेमंद भी रहे. कम से कम ममता बनर्जी को नंदीग्राम से लड़ने के लिए ललकार कर हरा तो दिया ही था - बिहार का तो बस नाम लिया जा रहा है, बंगाल फतह की तैयारी तो दिल्ली में बीजेपी की जीत के साथ ही तेज कर दी गई थी. 

घुसपैठियों से लेकर डबल इंजन सरकार तक

जिस मुद्दे को लेकर ममता बनर्जी पिछले साल से भाषा आंदोलन चला रही हैं, प्रधानमंत्री मोदी ने सिंगूर में उसी मुद्दे पर फोकस किया. बीजेपी और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के बीच टकराव के कई मसले हैं, जिसमें घुसपैठियों पर दोनों एक दूसरे के खिलाफ आक्रामक नजर आते हैं. 

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ममता बनर्जी का आरोप है कि बीजेपी शासित राज्यों में बांग्ला भाषा बोलने वाले पश्चिम बंगाल के प्रवासी लोगों (ज्यादातर मजदूर) को बांग्लादेशी बताकर टार्गेट किया जाता है. बीजेपी सरकारों का दावा होता है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़कर उनको वापस भेजने की कोशिश होती है, ममता बनर्जी बीजेपी के खिलाफ भाषा आंदोलन चला रही हैं. 

घुसपैठियों के मुद्दे पर ही प्रधानमंत्री मोदी ने तृणमूल कांग्रेस सरकार और ममता बनर्जी पर तीखा हमला किया है. बीजेपी की रैली के मंच से मोदी ने आरोप लगाया, तृणमूल घुसपैठियों के लिए नकली डॉक्यूमेंट बना रही है... उनके लिए धरने पर बैठी है... तृणमूल घुसपैठियों को बचाने के लिए कुछ भी कर सकती है.

प्रधानमंत्री मोदी ने ममता बनर्जी को घेरने के लिए संदेशखाली, शिक्षक भर्ती घोटाला और केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं का बंगाल के लोगों को फायदा न मिलने पर फोकस किया. संदेशखाली के बहाने महिलाओं की सुरक्षा पर जोर दिया. शिक्षक भर्ती घोटाले का नाम लेकर भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े किए - और, केंद्रीय योजनाओं का नाम लेकर डबल इंजन सरकार के फायदे समझाने की कोशिश की. 

1. मोदी ने कहा, टीएमसी के राज में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं... भाजपा को आपका एक वोट पक्का करेगा कि कॉलेज में रेप-हिंसा की घटनाओं पर लगाम लगे... एक वोट तय करेगा कि बंगाल में संदेशखाली जैसी घटना ना हो.

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2. बोले, टीएमसी का छोटे से छोटा नेता खुद को बंगाल का माई-बाप समझने लगा है... हुगली को शिक्षक भर्ती घोटाले के लिए बदनाम किया है... बीजेपी उनको सजा दिलाएगी... आपको एक बात याद रखनी है, बंगाल में निवेश तभी आएगा... जब माफिया और दंगाइयों को हटाया जाएगा.

3. मोदी ने ये भी बताया कि वो क्या चाहते हैं. बोले, बंगाल के नौजवानों, किसानों, माताओं-बहनों की हर संभव सेवा करूं... ये मेरा प्रयास रहता है... टीएमसी सरकार केंद्र की योजनाओं को आप तक पहुंचने नहीं देती... इनको मोदी से दिक्कत है, ये मुझे समझ आता है... लेकिन टीएमसी बंगाल के लोगों से अपनी दुश्मनी निकाल रही है.

बिहार और बंगाल में फर्क है

बीजेपी के लिए चैलेंज तो बिहार में भी था. बरसों से नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज होने के कारण सत्ता विरोधी लहर का काउंटर चुनौती थी. लेकिन, बीजेपी ने नीतीश कुमार को साथ लेकर रास्ता निकाल लिया. सत्ता में होने के कारण चुनौतियों से मुकाबला आसान होता है, बिहार में ऐसा ही हुआ. बंगाल में बिहार से अलग स्थिति है.

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बीजेपी ने 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में भी ममता बनर्जी पर लगातार हमला बोला था. अब बिहार के जंगलराज को आगे बढ़ाकर पश्चिम बंगाल में भुनाने की कोशिश हो रही है. बिहार में नीतीश कुमार ने जंगलराज को मुद्दा बनाकर ही सत्ता हासिल की थी, और तभी से बीजेपी के साथ मिलकर जंगलराज के नाम पर लोगों को डराते रहे हैं - और चुनाव दर चुनाव फायदा उठाते रहे हैं.

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बिहार के उसी जंगलराज के प्रयोग को पश्चिम बंगाल में आजमाए जाने की तैयारी चल रही है. मोदी के भाषण से पूरी तरह साफ हो चुका है. बस असर थोड़ा बड़ा करने की कोशिश है, इसीलिए मोदी ने बंगाल में जंगलराज को महाजंगलराज कहना शुरू कर दिया है. और रैली में पहुंची भीड़ के बहाने कह रहे हैं कि बंगाल अब बदलाव चाहता है, और - ‘जनता अब टीएमसी के महाजंगलराज को उखाड़ फेंकने के लिए तैयार है.’

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में मोदी ने तेजस्वी यादव को ‘जंगलराज के युवराज’ कह कर संबोधित किया था, और फिर बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा उसी स्टाइल में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को घेरा था. 

जनवरी, 2021 में जेपी नड्डा ने बर्धमान में कहा था, ‘आज कल पश्चिम बंगाल में एक नए राजकुमार की चर्चा हो रही है... किस तरीके से धन का उपार्जन उसने किया है, ये जनता जानती है... लेकिन ये ज्यादा दिन तक नहीं चलने वाला... सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा... पश्चिम बंगाल की जनता मुंहतोड़ जवाब देगी.

1. केंद्र की सत्ता में आने के पांच साल बाद बीजेपी ने 2019 के आम चुनाव में अच्छी खासी घुसपैठ कर ली थी. लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव में तो चूक ही गई, 2024 के आम चुनाव में 2019 भी नहीं दोहरा पाई - एक बार फिर ममता बनर्जी पहले से ही अपना किला बचाने के लिए घेरेबंदी कर चुकी हैं. 

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2. बीजेपी के लिए एक चीज आसान जरूर हुई है. कोलकाता में I-PAC के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी के खिलाफ ममता बनर्जी की रेड. ममता बनर्जी अपने तरीके से हर बार ऐसा करती रही हैं, और ऐसी मुश्किलों से आसानी से उबर जाती हैं, लेकिन इस बार कानूनी तौर पर मुश्किल थोड़ी बड़ी लगती है - लेकिन, ऐसा भी नहीं कि बीजेपी का रास्ता साफ हो चुका है. 

3. ममता बनर्जी के सामने भी बिखरा विपक्ष है, और अपने वोट बैंक को लेकर वो पूरी शिद्दत से मैदान में डटी हुई हैं. 2020 के बिहार चुनाव के बाद दीपांकर भट्टाचार्य जैसे कुछ नेताओं ने लेफ्ट को मिलकर बीजेपी के खिलाफ ममता बनर्जी का साथ देने की सलाह दी थी, लेकिन आपस में ही सहमति नहीं बनी. ममता बनर्जी लेफ्ट, कांग्रेस और बीजेपी तीनों के साथ लगभग एक ही तरीके से पेश आती हैं. कांग्रेस को तो आस पास आने भी नहीं देती हैं. 

4. अगर बंगाल में भी बीजेपी को एजेंसियों के ऐक्शन पर राजनीति आगे बढ़ाने का मौका मिलता है, तो हो सकता है दिल्ली जैसी स्थिति पैदा हो जाए. क्योंकि अभिषेक बनर्जी पर भी मनीष सिसोदिया जैसा संकट मंडरा रहा है, और कहीं ऐसा न हो अरविंद केजरीवाल की तरह ममता बनर्जी भी लपेटे में न आ जाएं.

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5. बिहार और बंगाल में सबसे बड़ा फर्क तो लालू यादव और ममता बनर्जी के बीच का है, जहां लालू यादव के कार्यकाल में हुए अपराधों और भ्रष्टाचार का सीधा नाता लालू से ही जुड़ा था, वैसा ममता बनर्जी के मामले में नहीं है.

ममता बनर्जी के संगी-साथियों पर भले ही संगीन आरोप हों, लेकिन ममता बनर्जी खुद अपने विरोधियों की नजर में भी क्लीन हैं.  

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