केजरीवाल के अयोध्या दौरे का AAP को दिल्ली में कितना फायदा मिलेगा?

वादे के मुताबिक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पूरे परिवार के साथ अयोध्या जाकर राम लला का दर्शन कर आये हैं. एक सर्वे में दिल्ली के ज्यादातर युवा राम मंदिर को लेकर गौरवांवित महसूस कर रहे हैं, लेकिन वोट देने के मामले में झुकाव बीजेपी की तरफ है - फिर अरविंद केजरीवाल के हिस्से में क्या आने वाला है?

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अरविंद केजरीवाल, राम मंदिर उद्घाटन का न्योता पाकर बाद में जाकर पूरे परिवार के साथ दर्शन का वादा पूरे करने वाले पहले नेता बन गये हैं अरविंद केजरीवाल, राम मंदिर उद्घाटन का न्योता पाकर बाद में जाकर पूरे परिवार के साथ दर्शन का वादा पूरे करने वाले पहले नेता बन गये हैं

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 13 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 4:12 PM IST

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी उन नेताओं में शामिल हैं जिन्हें अयोध्या के राम मंदिर उद्घाटन समारोह का न्योता मिला था, और तब वो भी नहीं गये थे. अरविंद केजरीवाल भी अखिलेश यादव जैसे नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने समारोह के बाद पूरे परिवार के साथ अयोध्या जाने का वादा किया था. 

लेकिन अरविंद केजरीवाल वो वादा पूरा करने वाले पहले नेता बन गये हैं. अरविंद केजरीवाल ने पूरे परिवार के साथ अयोध्या जाकर राम लला का दर्शन कर लिया है. साथ ही, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी पूरे परिवार के साथ दर्शन किया है. 

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हाल ही में दिल्ली के युवाओं के बीच 2024 के लोक सभा चुनाव को लेकर एक सर्वे हुआ था, जिसमें अयोध्या में बने राम मंदिर को लेकर भी उनकी राय ली गई है. लोकनीति-सीएसडीएस सर्वे में उन युवाओं को शामिल किया गया था, जो पहली बार वोट देने जा रहे हैं. सर्वे में शामिल ज्यादातर युवा राम मंदिर बनने को लेकर खुशी का इजहार कर रहे थे. मतलब, वोट डालते वक्त दिल्ली के युवाओं के मन में भी वही भाव हो सकता है, जो यूपी के लोगों में देखा जा रहा है.

लंबे अरसे से अरविंद केजरीवााल अयोध्या से कनेक्ट होने की लगातार कोशिश कर रहे हैं, क्या उनकी ये कोशिश दिल्ली में आदमी पार्टी को भी वोट दिला पाएगी? हाल के MoTN सर्वे में दिल्ली की सभी सात लोक सभा सीटें बीजेपी को मिलने का अनुमान लगाया गया था. 

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केजरीवाल का भी मंदिर आंदोलन पूरा हुआ

अरविंद केजरीवाल दिल्ली के बुजुर्गों के बीच खुद को श्रवण कुमार के रूप में पेश करने की कोशिश करते हैं, जब भी वो लोगों को अयोध्या भेजने का इंतजाम करते हैं. केजरीवाल और उनकी टीम दिल्ली के लोगों को अयोध्या रवाना भी करते हैं, और दर्शन के बाद लौटने पर स्वागत भी करते हैं - और जिन राज्यों में भी अरविंद केजरीवाल चुनावी रैलियां करते हैं, ऐसे ही लोगों को अयोध्या दर्शन कराने का वादा भी करते हैं. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अरविंद केजरीवाल का नरम और गरम रुख बदलता हुआ देखा जा सकता है, लेकिन अयोध्या को लेकर वो हमेशा ही सजग रहते हैं. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या जाकर दिवाली मनाते हैं, तो अरविंद केजरीवाल दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर पहुंच जाते हैं. दिवाली समारोह का पूरा प्रचार प्रसार भी किया जाता है - और आम आदमी पार्टी लाइव स्ट्रीमिंग भी कर चुकी है. 

लेकिन अरविंद केजरीवाल की ये तत्परता दिल्ली के युवाओं को राजनीतिक रूप से खास आकर्षित नहीं कर पा रही है, लोकनीति-सीएसडीएस का सर्वे तो यही बताता है. लोकनीति सर्वे में भी आम आदमी पार्टी को दिल्ली में एक भी संसदीय सीट मिलने की संभावना नहीं दिखाई पड़ रही है. हाल में हुए इंडिया टुडे के देश का मिजाज सर्वे में भी दिल्ली की सारी सीटें बीजेपी के हिस्से में जाने का अनुमान लगाया गया था - और आम आदमी पार्टी 2019 की तरह ही तीसरे पायदान पर लुढ़कती नजर आ रही है.

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लोकनीति-CSDS सर्वे में शामिल 67 फीसदी युवाओं का कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर बन जाने पर वे काफी गौरवांवित महसूस कर रहे हैं, और 15 फीसदी ऐसे भी हैं जो किसी न किसी रूप में मंदिर निर्माण को गौरव की बात मानते हैं. दिल्ली के ही 8 फीसदी युवाओं को नहीं लगता कि मंदिर का बन जाना कोई गौरव की बात है, और 8 फीसदी युवा वोटर ऐसे भी हैं जिन्हें इसमें गर्व करने जैसी कोई बात नहीं लगती. 

जब वोट देने को लेकर सवाल हुआ तो 16 फीसदी युवा ऐसे मिले जो अपना इरादा जाहिर करना नहीं चाहते, लेकिन 67 फीसदी युवा तो खुल कर बीजेपी को वोट देने की बात करते पाये गये हैं. सर्वे में शामिल 8 फीसदी युवा कांग्रेस के पक्ष में खड़े देखे गये, जबकि 7 फीसदी आम आदमी पार्टी के समर्थन में. 

जो हालात हैं उसमें अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के हिस्से में बहुत कुछ आने वाला है, ऐसा तो नहीं लगता. कम से कम लोक सभा चुनाव को लेकर तो बिलकुल ऐसा ही माना जा सकता है - लेकिन कांग्रेस के साथ सीट शेयर करने के मामले में AAP नेतृत्व के तेवर पहले जैसे ही बने हुए हैं. 

दिल्ली में कांग्रेस के साथ फ्रेंडली मैच की तैयारी जारी है

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सर्वे कहता है कि दिल्ली के युवा वोटर राम मंदिर निर्माण से प्रभावित हैं, और बीजेपी को उसका सीधा फायदा मिल सकता है, यूपी और देश के दूसरे हिस्सों के माहौल भी यही इशारा कर रहा है - लेकिन इंडिया टुडे के MoTN सर्वे में आम आदमी पार्टी का तीसरे स्थान पर रह जाना भी गौर करने वाली बात है. 

पंजाब में तो शुरू से ही लग रहा था कि राहुल गांधी की पार्टी कांग्रेस के साथ अरविंद केजरीवाल का गठबंधन नहीं हो पाएगा, लेकिन दिल्ली में भी हाल तकरीबन वैसा ही हो गया है. लुधियाना पहुंच कर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे बोल आते हैं कि पंजाब के लोग लोक सभा की सभी 13 सीटें कांग्रेस की ही झोली में डालेंगे. देखा जाये तो अरविंद केजरीवालऔर उनके साथी तो काफी दिनों से ऐसी ही बातें करते आ रहे हैं. ऐन उसी वक्त आम आदमी पार्टी की तरफ से सोशल साइट X पर एक वीडियो पोस्ट कर दावा किया जाता है कि दिल्ली के लोगों ने तो सभी 7 सीटें आम आदमी पार्टी को देने की ठान रखी है.

दिल्ली में गठबंधन का हाल ये है कि वो टूटा भी नहीं है, और बातचीत का कोई नतीजा भी नहीं निकल रहा है - और कांग्रेस की तरफ से इसकी बड़ी वजह केजरीवाल की डिमांड बतायी जा रही है. मीडिया से बातचीत में दोनों पक्षों की तरफ से कही जा रही बातों से कई चीजें साफ साफ समझ में भी आ रही हैं. कुछ दिनों पहले एनसीपी नेता शरद पवार ने कहा था कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच दिल्ली मे 4-3  सीटों पर समझौते की स्थिति बनी है. मतलब, आम आदमी पार्टी 4 सीटों पर लड़ेगी और कांग्रेस 3 सीटों पर - लेकिन अब ये बात नहीं है. 

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आम आदमी पार्टी के नेता संदीप पाठक ने दिल्ली में कांग्रेस को गठबंधन के तहत महज एक सीट का प्रस्ताव रखा है. अगर कांग्रेस मान जाती है तो आम आदमी पार्टी दिल्ली की छह सीटों पर चुनाव लड़ेगी. और लगे हाथ संदीप पाठक ने ये भी कह दिया है कि AAP के प्रस्ताव पर अगर कांग्रेस का जवाब नहीं आता, तो उनकी पार्टी सभी सीटों के लिए उम्मीदवारों का ऐलान कर देगी.  

कांग्रेस को तो 3 सीटों का प्रस्ताव भी मंजूर था, अब तो संभव ही नहीं लगता. कांग्रेस शायद 3 सीटों पर मान भी जाती, तब भी जबकि पंजाब में किसी तरह के गठबंधन पर कोई दोनों पक्षों में से किसी की तरफ से कोई पहल नहीं हो रही है - लेकिन आगे बढ़ने में केजरीवाल की डिमांड आड़े आ जा रही थी.

बताते हैं कि आम आदमी पार्टी दिल्ली में अपनी शर्तों पर समझौते के साथ ही गोवा और हरियाणा सहित दूसरे राज्यों में भी अपने लिए कुछ सीटें चाहती है. पेच फंस रहा है आम आदमी पार्टी की तरफ से गुजरात की भरूच और चंडीगढ़ लोक सभा सीट की डिमांड को लेकर - और उसके साथ ही हरियाणा में एक सीट की भी मांग है. वैसे केजरीवाल ने जनवरी में गुजरात यात्रा के दौरान राज्य की भरूच लोकसभा सीट पर चैतर वसावा को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था.

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देखा जाये तो बीजेपी के बाद अब आम आदमी पार्टी का भी अयोध्या आंदोलन पूरा हो चुका है, मोदी के आगे दिल्ली के लोग केजरीवाल को बिलकुल भी तरजीह नहीं दे रहे हैं. लोक सभा को लेकर तो यही राय है, विधानसभा चुनाव आने पर वो भी मालूम हो जाएगा. 

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