भोपाल में कथित दहेज प्रताड़ना और मौत के मामले में मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा के परिवार ने उनकी सास, रिटायर्ड जज गिरीबाला सिंह के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. परिवार ने कहा कि ट्विशा पर लगाए गए ड्रग्स और मानसिक बीमारी के आरोप पूरी तरह से 'चरित्र हनन' हैं और यह उनकी मौत से ध्यान भटकाने की कोशिश है.
ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली थीं. उनकी शादी दिसंबर 2025 में वकील समर्थ सिंह से हुई थी, जिनसे उनकी मुलाकात 2024 में एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी.
पति पर 10 हजार इनाम
इस बीच, सोमवार को स्थानीय अदालत ने फरार पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी. इसके बाद भोपाल पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है. पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है.
सास के आरोपों पर परिवार का पलटवार
रिटायर्ड जज गिरीबाला सिंह ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया था कि ट्विशा मानसिक रूप से अस्वस्थ थीं और उनका इलाज चल रहा था, जिसमें उन्हें स्किज़ोफ्रेनिया जैसी दवाएं दी जा रही थीं. इन दावों को खारिज करते हुए ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने कहा कि आरोपियों को अब इसलिए कुछ भी कहने की छूट मिल गई है क्योंकि लड़की अब जीवित नहीं है.
उन्होंने कहा कि इन आरोपों को अदालत में साबित करना होगा और किसी भी तरह की सार्वजनिक बदनामी एक गंभीर अपराध है. उन्होंने यह भी कहा कि एक उच्च न्यायिक पद पर रहे व्यक्ति द्वारा ऐसे बयान देना बेहद आपत्तिजनक है.
ट्विशा को लेकर पिता ने क्या कहा?
नवनिधि शर्मा ने अपनी बेटी को प्रतिभाशाली, करियर को लेकर सजग और शिक्षित बताया और कहा कि उसे मानसिक रोगी बताने की कोशिश गलत है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर उनकी बेटी मानसिक रूप से बीमार थी तो फिर ससुराल पक्ष के दावे कितने सही हैं.
मां ने भी लगाए आरोप
ट्विशा की मां रेखा शर्मा ने कहा कि परिवार पर आर्थिक निर्भरता या पैसों के लेन-देन के आरोप भी गलत हैं. उन्होंने कहा कि उनके परिवार को कभी आर्थिक तंगी नहीं रही. उनका आरोप है कि ससुराल पक्ष ट्विशा के करियर को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा था.
SIT की चल रही जांच
मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है ताकि फरार पति समर्थ सिंह का पता लगाया जा सके. वहीं, परिवार ने आरोप लगाया है कि स्थानीय जांच पक्षपातपूर्ण है और मामले को मध्य प्रदेश से बाहर ट्रांसफर किया जाना चाहिए.
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