'कभी भी बुलावा आ सकता है...', सच हो गई कथावाचक की भविष्यवाणी, साइलेंट अटैक से मौत, 7 दिन की कथा दो दिन में ही समाप्त

शिवमहापुराण कथा के दूसरे दिन पंडित राकेश व्यास ने श्रोताओं से भावपूर्ण अंदाज में कहा था, "भगवान के यहां से कभी भी बुलावा आ सकता है, एक दिन सभी को जाना ही है." उन्होंने शिवमहापुराण की कथा में उसी दिन भाव भरे प्रसंग में कहा था, "जिंदगी रंज-ओ-गम का मेला है. कल मैं रहूं या न रहूं, तुम रहो या न रहो, कथा का श्रवण कर लीजिए. राजा हो, रंक हो या फकीर, सभी को एक दिन जाना है."

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कथास्थल पर पसरा सन्नाटा. कथास्थल पर पसरा सन्नाटा.

पंकज शर्मा

  • राजगढ़ ,
  • 04 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 10:20 AM IST

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है. यहां राधाकृष्ण मंदिर में चल रही सात दिवसीय शिवमहापुराण कथा के दौरान इंदौर से आए कथावाचक पंडित राकेश व्यास की उनके ही कथन के अगले दिन साइलेंट हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई. मान्यता है कि व्यास गद्दी से कही गई बात ईश्वर की वाणी होती है और वह सिद्ध हो जाती है, और इस घटना ने इसे सच साबित कर दिया.

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मंगलवार को कथा सुनाते हुए पंडित राकेश व्यास ने श्रोताओं से भावपूर्ण अंदाज में कहा था, "भगवान के यहां से कभी भी बुलावा आ सकता है, एक दिन सभी को जाना ही है." उन्होंने शिवमहापुराण की कथा में उसी दिन भाव भरे प्रसंग में कहा था, "जिंदगी रंज-ओ-गम का मेला है. कल मैं रहूं या न रहूं, तुम रहो या न रहो, कथा का श्रवण कर लीजिए. राजा हो, रंक हो या फकीर, सभी को एक दिन जाना है." 

अगले ही दिन बुधवार सुबह उनके शब्द सच साबित हो गए. आयोजन समिति के सदस्य कालूराम गुर्जर ने बताया कि सुबह जब वे चाय लेकर उनके पास पहुंचे और आवाज दी, तो कोई जवाब नहीं मिला. शरीर में कोई हलचल न देख तुरंत उन्हें पास के नर्सिंग होम ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने साइलेंट हार्ट अटैक से उनकी मृत्यु की पुष्टि की. 

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सिटी थाना प्रभारी वीरेंद्र धाकड़ ने बताया कि पुलिस को सूचना मिलने पर अस्पताल पहुंची, जहां डॉक्टरों ने बताया कि रात में नींद के दौरान साइलेंट अटैक से उनकी मृत्यु हो गई थी. परिजनों ने पोस्टमॉर्टम से इनकार कर दिया, जिसके बाद शव उन्हें सौंप दिया गया. पंडित राकेश व्यास के परिजन ब्यावरा पहुंचे और शव को लेकर इंदौर के बावल्या खुर्द रवाना हो गए.

आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि मंगलवार रात तक पंडित राकेश देर रात तक सभी से बातचीत करते रहे थे. उनकी कथा का अंदाज इतना भावपूर्ण था कि श्रोताओं को लग रहा था कि शायद उन्हें अपने अंत का आभास हो गया था. सात दिनों तक चलने वाली यह कथा 7 अप्रैल तक प्रस्तावित थी, लेकिन दो दिन बाद ही यह दुखद घटना हो गई. अब कथा स्थल पर सन्नाटा पसरा हुआ है और उनके शब्द आयोजकों के मन में बार-बार गूंज रहे हैं. कथावाचक की मृत्यु ने न केवल आयोजन समिति, बल्कि पूरे ब्यावरा में शोक की लहर फैला दी है.

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