'12वीं पास हूं, पत्नी के कारण पढ़ नहीं पाए...', कोर्ट जाकर पत्नी से हर महीने 5000 का मुआवजा लेने वाले अमन की पूरी कहानी

इंदौर की फैमली कोर्ट ने पत्नी द्वारा परेशान किए गए एक युवक के पक्ष में फैसला सुनाया है. पति ने पत्नी की वजह से पढ़ाई छुटने और बेरोजगार होने का हवाला देकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था.

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कोर्ट जाकर पत्नी से हर महीने 5000 का मुआवजा लेने वाले अमन की पूरी कहानी (प्रतीकात्मक तस्वीर) कोर्ट जाकर पत्नी से हर महीने 5000 का मुआवजा लेने वाले अमन की पूरी कहानी (प्रतीकात्मक तस्वीर)

aajtak.in

  • इंदौर,
  • 23 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 2:29 PM IST

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में इंदौर की एक फैमिली कोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाया, जिसको सुनकर लोग हैरान रह गए. आम तौर पर अदालतों के फैसलों में सुनने को मिलता है कि पत्नी को जिंदगी गुजारने और भरण-पोषण की जिम्मेदारी पति को उठानी होगी, इसके लिए हर महीने कुछ पैसे देने होंगे. लेकिन इस मामले में बिल्कुल उल्टा हुआ है और कोर्ट ने पत्नी को आदेश दिया है कि वह अपने पति को हर महीने पांच हजार रूपए दे, जिससे पति का भरण-पोषण हो सके.

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कोर्ट ने जिस व्यक्ति अमन (23) के हक में फैसला सुनाया है, वह उज्जैन का रहने वाला है. उसने दिसंबर 2023 में अपनी पत्नी नंदिनी (22) के खिलाफ केस दायर किया था और 2 महीने बाद अब फरवरी 2024 में कोर्ट ने उसके पक्ष में फैसला सुनाया है.

कैसे शुरू हुई मोहब्बत और कब हुई दोनों की शादी?
अमन के वकील मनीष झरौला के मुताबिक साल 2020 में उनके मुवक्किल अमन की एक कॉमन फ्रेंड के जरिए नंदिनी (22) से हुई थी. दोनों की बातचीत आगे बढ़ी और नंदिनी ने अमन को प्रपोज किया. इसके बाद जुलाई 2021 में अमन और नंदिनी की आर्य समाज मंदिर में शादी हुई और दोनों लोग इंदौर में ही किराए के मकान में साथ रहने लगे. 

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अदालत ने किस कानून के तहत फैसला सुनाया है?
अमन के वकील मनीष झरौला ने बताया कि फैमिली कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act, 1955) की धारा 24 के तहत यह फैसला सुनाया है.

हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 24 क्या कहती है?
अधिनियम की धारा 24 के तहत, अदालत को यह देखना होगा कि क्या आवेदक (पत्नी या पति) के पास अपने समर्थन और कार्यवाही के आवश्यक खर्चों के लिए पर्याप्त स्वतंत्र आय नहीं है और फिर कार्यवाही और इस तरह के खर्चों का फैसला करना होगा. आवेदक की खुद की आय और प्रतिवादी की आय को ध्यान में रखते हुए, अदालत हर महीने के लिए उचित आय तय करेगी. 

इस धारा की तुलना अधिनियम की धारा 25 से की जा सकती है, जो स्थायी गुजारा भत्ता और भरण-पोषण से संबंधित है. धारा 25 के तहत, अदालत प्रतिवादी को आदेश दे सकती है कि वह प्रतिवादी की अपनी आय और अन्य संपत्ति को ध्यान में रखते हुए आवेदक को जिंदगी भर उसके भरण-पोषण और समर्थन के लिए एकमुश्त/मासिक/आवधिक राशि का भुगतान करे. 

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नंदिनी ने अपनी दलील में क्या कहा?
अमन की पत्नी नंदिनी ने अपने पति को हर महीने भत्ता देने में असमर्थता जताई और दावा किया कि वह बेरोजगार है. नंदिनी का खंडन करते हुए अमन ने अदालत को बताया कि जब वह नंदिनी को छोड़कर अपने माता-पिता के पास गया, तो उसने मेरे लिए गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, उस वक्त उसने पुलिस को बताया था कि वह ब्यूटी पार्लर चलाती है.
नंदिनी ने कोर्ट में दावा किया कि वह कोई काम नहीं कर रही है जबकि अमन कमाता है लेकिन वह इसका कोई सबूत पेश नहीं कर सकी. इसलिए कोर्ट ने फैसला अमन के पक्ष में सुनाया. कोर्ट ने कहा कि अब अमन को नंदिनी के साथ नहीं रहना होगा और उसकी पत्नी से उसे हर महीने 5 हजार रूपए मिलेंगे.

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किस वजह से पति को अदालत जाना पड़ा?
अमन कोर्ट को बताया कि नंदिनी के साथ शादी करने के बाद वह अमन को परेशान करने लगी थी, समझाने की काफी कोशिश के बाद भी उसके लिए नंदिनी का व्यवहार नहीं बदला. इन सभी परिस्थितियों ने निराश होकर वह शादी के दो महीने के बाद ही सितंबर 2021 में नंदिनी को छोड़कर अपने माता-पिता के पास चला गया. इसके बाद दिसंबर 2023 में अमन ने अपनी पत्नी नंदिनी के खिलाफ अदालत का रुख किया.

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अमन ने अपनी पत्नी पर क्या आरोप लगाए हैं?
अमन ने अपना दुख साझा करते हुए कोर्ट के समक्ष कहा कि मैं सिर्फ 12वीं पास हूं. मैंने कॉलेज में एडमिशन तो ले लिया था लेकिन नंदिनी की वजह से मुझे अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी, मैं बेरोजगार हूं. अमन के वकील ने बताया कि नंदिनी और उसके परिवार वालों ने अमन पर दबाव बनाकर जबरदस्ती उसके साथ शादी की थी और इसके बाद जब वो दोनों किराए के कमरे में रहते थे, तो नंदिनी उसका यौन उत्पीड़न कर रही थी. 
ऐसे में अमन ने कोर्ट से मांग की कि उसको भरण-पोषण भत्ता दिलवाया जाए. उसने यह भी बताया कि मैं इसी वजह से शादी नहीं करना चाहता था कि मेरी पढ़ाई पर इसका बुरा असर होगा. 
 

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