देश में बढ़ रहे हैं दिल के रोगी

दुनिया भर में दिल के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. पर भारत में स्थिति और भी खतरनाक है. एक हालिया अध्ययन के बाद विशेषज्ञों ने यह दावा किया है.

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मेधा चावला

  • नई दिल्ली,
  • 10 दिसंबर 2016,
  • अपडेटेड 5:51 PM IST

दुनिया भर के पांच प्रमुख कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी के अध्यक्षों ने 'कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया' (सीएसआई) के 68वें वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लिया. उन्होंने इस दौरान कहा कि हाल में आए कई रिपोर्ट में दिल की बीमारियों के तेजी से बढ़ने के साथ भारत कई चुनौतियों का सामना कर रहा है.
अमेरिकन हार्ट्स एसोसियेशन के अध्यक्ष प्रोफेसर मार्क क्रीगर ने कहा कि दिल की बीमारी के बढ़ने में डायबिटीज एक बड़ा कारक है.

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क्रीगर ने कहा कि उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल वाले डायबिटीज के मरीजों को दिल की बीमारियां होने का ज्यादा खतरा है। उन्होंने आगाह किया कि डायबिटीज के मरीजों के अपने ग्लूकोज का स्तर नियंत्रित ना करने पर उन्हें दिल की बीमारी हो जाएगी।


वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ सलीम यूसुफ ने कहा कि दिल की बीमारियों से भारत में काफी लोग मारे जाते हैं। लोगों को स्वस्थ दिल के लिए अपने दैनिक आहार में कारबोहाइड्रेट की मात्रा कम कर देनी चाहिए और ज्यादा फल शामिल कर लेने चाहिए। यूसुफ ने दिल की बीमारी से बचने के लिए नियमित व्यायाम के महत्व पर भी जोर दिया।


यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी के अध्यक्ष जेरोएन बाक्स ने कहा कि दिल की बीमारियों का पता लगाने के लिए नई तकनीकों का विकास किया गया है, लेकिन नई तकनीक एवं पद्धतियों को लेकर लोगों का रवैया बदलने की जरूरत है।

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