आपने अक्सर आदत के कारण लोगों को नाखून चबाते तो देखा ही होगा. ये काफी सामान्य लक्षण है. लोग तनाव या फिर निर्णय लेने की स्थिति में ऐसा करते हैं लेकिन क्या आपने कभी किसी को अपनी ही स्किन (त्वचा) को चबाते देखा है?
सुनने में ये बड़ा अजीब लगता है पर त्वचा को चबाना एक तरह का डिसॉर्डर है इसे डर्मैटोफेजिया कहते हैं. इसमें पीड़ित सिर्फ किसी परेशानी या तनाव के कारण नहीं बल्कि अकारण भी स्किन चबाता रहता है.
दरअसल डर्मैटोफेजिया, ऑब्सेसिव कम्पलसिव डिसॉर्डर (OCD) की वजह से होती है. इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति हमेशा अपने शरीर को लेकर बेचैन और चिंतित रहता है जिसकी वजह से वो धीरे-धीरे अपने शरीर की त्वचा को चबाना शुरू कर देता है.
कई बार ये भी पाया गया कि जिनके माता-पिता को ये बीमारी थी उनके बच्चों में भी इसके लक्षण दिखे. इसके अलावा जरूरत से ज्यादा तनाव और अकेलापन भी डर्मैटोफेजिया की वजह हो सकता है.
डर्मैटोफेजिया से बचने के उपाय-
ये बीमारी देखने में भले छोटी हो, पर अगर आपने सही समय और डॉक्टर की देख-रेख में इसका इलाज नहीं करवाया तो ये आपके शरीर को खराब कर सकती है.
1. नाखून को मुंह के पास आने से रोकें-
मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि मरीज के नाखून पर कोई ऐसा पदार्थ लगा दिया जाए जिसकी दुर्गंध के कारण मरीज अपने हाथों को मुंह के पास ना ले जाए. ऐसा करने से वो नाखून के पास की त्वचा नहीं चबाएंगे. मरीज की आदत को बदलने के लिए नकली नाखून का सहारा भी लिया जा सकता है जो एक्रेलिक के बने होते हैं.
2. मरीज को अकेला ना महसूस होने दें-
इस उपचार के दौरान बातचीत करके मरीज को प्रेरित किया जाता है. उनकी परेशानियों को सुनकर समस्या का समाधान निकाला जाता है. ये माना जाता है कि मरीज से बात करके, परेशानियों को सुनकर उनके तनाव और अकेलेपन को कम किया जा सकता है. जिससे मरीज त्वचा को चबाना कुछ कम कर सकता है.
3.मेडिकल उपचार-
डर्मैटोफेजिया दवाइयों से भी ठीक किया जा सकता है. अवसाद को कम करने वाली दवाइयां भी इस बिमारी से उबरने में मरीज की सहायता करती हैं. लेकिन ये दवाइयां हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही लेनी चाहिए वरना आपको इसका भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
रोहित