Karnataka CM Swearing-In LIVE Updates: कर्नाटक में आज नया अध्याय शुरू होने जा रहा है. कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार आज राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे. 64 साल के नेता डीके शिवकुमार का शपथ ग्रहण समारोह आज शाम 4:05 बजे लोक भवन के 'ग्लास हाउस' में होगा, जहां राज्यपाल थावरचंद गहलोत उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे. शिवकुमार के साथ-साथ, मंत्रिमंडल गठन के पहले चरण में मंत्रियों का एक समूह भी शपथ ले सकता है.
हालांकि, मंत्रियों की आखिरी लिस्ट का ऑफिशियल ऐलान अभी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक नई सरकार में करीब 13 मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है. पिछले हफ्ते, निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पार्टी आलाकमान के निर्देश पर पद छोड़ने के कुछ ही दिनों बाद, शिवकुमार को कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया.
आठ बार के विधायक और प्रभावशाली वोक्कालिगा नेता के लिए, आज का समारोह एक लंबे वक्त से संजोए सपने के पूरा होने का प्रतीक होगा. उन्होंने कई साल तक खुद को साउथ इंडिया में कांग्रेस पार्टी के सबसे शक्तिशाली नेताओं में से एक के रूप में स्थापित करने के लिए काम किया था.
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कांग्रेस ने अभी मंत्रियों के नामों का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट गठन के पहले चरण में 13 नेताओं को शामिल करने की मंज़ूरी मिल गई है. संभावित मंत्रियों में यतींद्र, जी. परमेश्वर, के.एच. मुनियप्पा, यू.टी. खादर, के.जे. जॉर्ज, कृष्णा बायरे गौड़ा, एम.बी. पाटिल, प्रियंका खड़गे, सतीश जारकीहोली, रामलिंगा रेड्डी, दिनेश गुंडू राव, बैरती सुरेश और ईश्वर खंड्रे शामिल हैं.
इनमें से यतींद्र को शामिल किए जाने पर खास तौर पर सबका ध्यान गया है. MLC और निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र ने पहले ही कैबिनेट में जगह मिलने का भरोसा जताया था. उनका कहना था कि पार्टी आलाकमान ने उन्हें मंत्री पद देने का आश्वासन दिया है.
सूत्रों ने बताया कि शिवकुमार शुरुआत में एक छोटी कैबिनेट के साथ शपथ लेंगे, और बाद में मंत्रिमंडल का विस्तार करेंगे. कर्नाटक मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री को मिलाकर ज़्यादा से ज़्यादा 34 सदस्य हो सकते हैं.
डीके शिवकुमार बुधवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले हैं. इसके साथ ही उनकी एक ऐसी राजनीतिक यात्रा का समापन होगा, जिसकी पहचान उनकी लगन, गुटों की आपसी लड़ाई और राज्य के सबसे बड़े पद के लिए सालों के इंतज़ार से रही है.
कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष शाम 4:05 बजे लोक भवन के ग्लास हाउस में शपथ लेंगे. यहां राज्यपाल थावरचंद गहलोत उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे. कैबिनेट गठन के पहले चरण में, उनके साथ मंत्रियों का एक समूह भी शपथ ले सकता है.
हालांकि, कैबिनेट की अंतिम रूपरेखा की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, नई सरकार में करीब 13 मंत्रियों को शामिल किए जाने की संभावना है. शिवकुमार का यह पदोन्नति निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कांग्रेस आलाकमान के निर्देश पर पद छोड़ने के कुछ ही दिनों बाद हुआ है. पिछले हफ्ते, उन्हें कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया था, जिससे उनके शपथ ग्रहण का रास्ता साफ हो गया था.
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मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से ठीक पहले, डीके शिवकुमार ने सबसे ऊंचे पद तक पहुंचने के अपने सफर के बारे में बात की और अपने इस मुकाम को निजी महत्वाकांक्षा के बजाय समर्पण और लगन का नतीजा बताया. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "यह कोई सपना नहीं था, यह समर्पण था, कड़ी मेहनत के साथ समर्पण. इसलिए यह एक मुश्किल और परेशानियों भरा दौर था. हालांकि, इसमें देरी हुई, लेकिन इसे नकारा नहीं गया."
कांग्रेस नेता ने नेहरू-गांधी परिवार के साथ अपने लंबे जुड़ाव के बारे में भी बात की और पिछले कई सालों में उन पर भरोसा जताने के लिए पार्टी नेतृत्व को श्रेय दिया.
शिवकुमार ने कहा, "गांधी परिवार के साथ मेरा यही कमिटमेंट था और उन्होंने मुझ पर भरोसा किया, उन्होंने मुझे कई मौके दिए."
सोनिया गांधी और राहुल गांधी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा, "सोनिया गांधी ने कुर्बानी दी. वह प्रधानमंत्री बन सकती थीं. राहुल गांधी प्रधानमंत्री बन सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया."
अपने कार्यकाल को देखते हुए, शिवकुमार ने समाज के सभी वर्गों के लिए काम करने का वादा किया और कर्नाटक को भारत की विकास गाथा का एक अहम इंजन बताया. उन्होंने कहा, "पूरी दुनिया बेंगलुरु और कर्नाटक के जरिए भारत को देख रही है. मुझे समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना होगा- किसानों से लेकर महिलाओं तक, और युवाओं तक - और एक नया 'युवा युग' शुरू होगा."
उन्होंने आगे आने वाली चुनौतियों को भी स्वीकार करते हुए कहा, "इस देश की जनता ने मुझ पर जो भरोसा और विश्वास दिखाया है, उसके लिए मैं बहुत आभारी हूं. मुझे बहुत कड़ी मेहनत करनी होगी और नतीजे देने होंगे."
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कांग्रेस के हलकों में संकट-मोचक और संगठन-पुरुष के तौर पर पहचाने जाने वाले डीके शिवकुमार ने कर्नाटक में पार्टी को फिर से खड़ा करने और राजनीतिक अस्थिरता के दौर में उसकी सरकारों को बचाने में अहम भूमिका निभाई. उनका यह ओहदा, सिद्धारमैया के साथ लंबे वक्त तक चली सत्ता की खींचतान के बाद मिला है. सिद्धारमैया के इस्तीफे ने नेतृत्व में उस बदलाव का रास्ता साफ कर दिया, जिसकी उम्मीद महीनों से की जा रही थी.
नेतृत्व में हुए इस बदलाव पर कर्नाटक के अंदर और पूरी कांग्रेस पार्टी में बारीकी से नजर रखी जा रही है, जहां शिवकुमार को पार्टी के सबसे प्रभावशाली क्षेत्रीय नेताओं में से एक माना जाता है.