घोड़ों को क्यों पहनाए जाते हैं बर्फ वाले जूते? उससे क्या होता है

घोड़ों को पहनाए जाने वाले आईस बूट्स दरअसल ठंडक देने वाले खास लेग रैप होते हैं, जिनका इस्तेमाल पैरों की सूजन, दर्द और थकान कम करने के लिए किया जाता है. रेस, ट्रेनिंग या ज्यादा दौड़ने के बाद ये जूते घोड़ों की मांसपेशियों को आराम पहुंचाते हैं और चोट से बचाने में मदद करते हैं. इनमें जेल पैड या बर्फ रखने की जगह होती है, जिससे कोल्ड थेरेपी मिलती है.

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आजकल हॉर्स रेसिंग और प्रोफेशनल ट्रेनिंग में आईस बूट्स का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है. ( Photo: ITG) आजकल हॉर्स रेसिंग और प्रोफेशनल ट्रेनिंग में आईस बूट्स का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:09 AM IST

घोड़ों को दुनिया के सबसे ताकतवर और मेहनती जानवरों में गिना जाता है. रेसिंग, पोलो, घुड़सवारी और कई कामों में उनका इस्तेमाल किया जाता है. तेज दौड़ने और लगातार ट्रेनिंग की वजह से उनके पैरों पर काफी दबाव पड़ता है. कई बार लंबे समय तक दौड़ने या ज्यादा मेहनत करने के कारण घोड़ों के पैरों में सूजन, दर्द और थकान होने लगती है. ऐसे में उनकी देखभाल के लिए खास तरह के आईस बूट्स पहनाए जाते हैं. नाम सुनकर कई लोगों को लगता है कि ये जूते बर्फ पर चलने के लिए होते हैं, लेकिन असल में ऐसा नहीं है. आईस बूट्स एक तरह की कोल्ड थेरेपी का हिस्सा होते हैं, जो घोड़ों के पैरों को ठंडक पहुंचाकर दर्द और सूजन कम करने में मदद करते हैं. जिस तरह इंसान चोट लगने पर बर्फ या आइस पैक का इस्तेमाल करते हैं, उसी तरह घोड़ों के पैरों को राहत देने के लिए इन खास बूट्स का इस्तेमाल किया जाता है.

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क्या होते हैं आईस बूट्स?
आजकल हॉर्स रेसिंग और प्रोफेशनल ट्रेनिंग में आईस बूट्स का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है, क्योंकि ये घोड़ों की मांसपेशियों को आराम देने और चोट से बचाने में मदद करते हैं. इनमें खास जेल पैड या बर्फ रखने की जगह होती है, जो पैरों को लंबे समय तक ठंडक पहुंचाती है. यही वजह है कि बड़े अस्तबलों और रेसिंग सेंटरों में इन्हें घोड़ों की देखभाल का अहम हिस्सा माना जाता है. आईस बूट्स खास तरह के लेग रैप या बूट होते हैं, जिनमें ठंडक बनाए रखने वाले जेल पैड या बर्फ रखने की जगह होती है. इन्हें घोड़ों के घुटनों के नीचे वाले हिस्से पर पहनाया जाता है. जब ये ठंडे बूट पैरों पर लगाए जाते हैं, तो वहां की गर्मी कम होती है और सूजन घटने लगती है. इससे घोड़े को आराम मिलता है और उसकी मांसपेशियां जल्दी रिकवर हो जाती हैं.

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कैसे काम करती है कोल्ड थेरेपी?
विशेषज्ञों के मुताबिक, घोड़े के पैरों में बहुत कम मांसपेशियां होती हैं और वहां की नसें और टेंडन काफी कमजोर होते हैं. तेज दौड़ने के दौरान इन हिस्सों पर लगातार दबाव पड़ता है. अगर समय पर देखभाल न की जाए, तो छोटी समस्या भी बड़ी चोट में बदल सकती है. इसलिए ट्रेनिंग या रेस के बाद आईस बूट्स पहनाना जरूरी माना जाता है. हॉर्स रेसिंग में इन बूट्स का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है. रेस खत्म होने के बाद घोड़ों के पैरों में काफी गर्मी पैदा हो जाती है. ऐसे में आईस बूट्स लगाने से शरीर का टेंपरेचर बैलेंस रहता है और पैरों को ठंडक मिलती है. इससे घोड़े जल्दी थकते नहीं और अगली ट्रेनिंग के लिए जल्दी तैयार हो जाते हैं.

बाजार में मिल रहे हैं एडवांस आईस बूट्स
कई बार जब किसी घोड़े को चोट लग जाती है या उसके पैरों में सूजन आ जाती है, तब भी डॉक्टर आईस बूट्स इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं. यह थेरेपी ब्लड फ्लो को कंट्रोल करने और दर्द कम करने में मदद करती है. यही वजह है कि बड़े अस्तबलों और ट्रेनिंग सेंटरों में इन्हें घोड़ों की देखभाल का अहम हिस्सा माना जाता है. आईस बूट्स इस्तेमाल करने का तरीका भी काफी आसान होता है. पहले इन्हें फ्रीजर या ठंडे पानी में रखा जाता है ताकि इनके अंदर मौजूद जेल अच्छी तरह ठंडा हो जाए. इसके बाद इन्हें घोड़े के पैरों पर कुछ समय के लिए बांध दिया जाता है. आमतौर पर 15 से 20 मिनट तक इन्हें लगाया जाता है. जरूरत के हिसाब से यह प्रक्रिया दिन में कई बार दोहराई भी जा सकती है.

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आजकल बाजार में कई तरह के एडवांस आईस बूट्स उपलब्ध हैं. कुछ में विशेष कूलिंग जेल होता है, जबकि कुछ में बर्फ रखने की अलग जगह दी जाती है. कई कंपनियां ऐसे हल्के और आरामदायक आईस बूट्स बना रही हैं, जिन्हें घोड़े आसानी से पहन सकें. सोशल मीडिया पर भी अक्सर रेसिंग घोड़ों के पैरों में ये बूट्स देखकर लोग हैरान हो जाते हैं. लेकिन असल में यह कोई फैशन नहीं, बल्कि घोड़ों की सेहत और फिटनेस से जुड़ी जरूरी चीज है. Ice Boots घोड़ों को दर्द, सूजन और थकान से राहत देकर उन्हें स्वस्थ और एक्टिव बनाए रखने में मदद करते हैं.

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