स्वेज और पनामा से गुजरने पर कितना देना पड़ता है टोल?

हॉर्मुज, स्वेज और पनामा के बीच सबसे बड़ा फर्क यही है कि हॉर्मुज एक प्राकृतिक समुद्री मार्ग है, जबकि स्वेज और पनामा मानव-निर्मित नहरें हैं. प्राकृतिक रास्तों पर अंतरराष्ट्रीय कानून लागू होता है, जो मुक्त आवागमन की गारंटी देता है. वहीं, कृत्रिम नहरों का संचालन संबंधित देश करते हैं.

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र्मुज, स्वेज और पनामा के बीच सबसे बड़ा फर्क यही है कि हॉर्मुज एक प्राकृतिक समुद्री मार्ग है पनामा सिटी के रोडमैन पोर्ट पर कंटेनर जहाजों से माल उतारते और चढ़ाते क्रेन (Photo: AP / Matias Delacroix) र्मुज, स्वेज और पनामा के बीच सबसे बड़ा फर्क यही है कि हॉर्मुज एक प्राकृतिक समुद्री मार्ग है पनामा सिटी के रोडमैन पोर्ट पर कंटेनर जहाजों से माल उतारते और चढ़ाते क्रेन (Photo: AP / Matias Delacroix)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:08 PM IST

हाल के दिनों में कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से भारी टोल वसूलने की कोशिश कर रहा है. कहा जा रहा है कि कुछ जहाजों से लाखों डॉलर तक की रकम मांगी जा रही है और चुनिंदा जहाजों को ही गुजरने दिया जा रहा है. हालांकि, इस तरह के दावों की स्वतंत्र पुष्टि करना आसान नहीं है. लेकिन इससे एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा होता है-क्या किसी भी समुद्री रास्ते से गुजरने पर टोल लिया जा सकता है?

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क्या हॉर्मुज पर टोल लग सकता है?

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज एक प्राकृतिक रास्ता है, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग का हिस्सा है. इसका एक हिस्सा ओमान के नियंत्रण में भी आता है.अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून, खासकर संयुक्त राष्ट्र का ‘लॉ ऑफ द सी’ (UNCLOS), ऐसे जलडमरूमध्य को लेकर स्पष्ट नियम तय करता है. इसके तहत 'ट्रांजिट पैसेज' का अधिकार लागू होता है, यानी किसी भी देश के जहाज को बिना रोक-टोक इस रास्ते से गुजरने की अनुमति होती है.

ओमान पहले ही यह कह चुका है कि उसने सभी अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जो इस तरह के मार्गों पर किसी भी तरह का शुल्क लगाने की अनुमति नहीं देते. इसलिए, हॉर्मुज जैसे प्राकृतिक समुद्री रास्तों पर टोल वसूलना अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ माना जाता है.ओमान के मुताबिक हॉर्मुज एक प्राकृतिक समुद्री रास्ता है.

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फिर कहां और कैसे वसूला जाता है टोल?

अगर प्राकृतिक रास्तों पर टोल नहीं लगाया जा सकता, तो फिर दुनिया में ऐसे कौन से समुद्री रास्ते हैं जहां जहाजों को पैसे देने पड़ते हैं? इसका जवाब है-मानव-निर्मित नहरें.

दुनिया की दो सबसे अहम नहरें-स्वेज नहर और पनामा नहर.ऐसे ही उदाहरण हैं, जहां जहाजों को ट्रांजिट फीस देनी पड़ती है.

स्वेज नहर: एशिया और यूरोप के बीच की कड़ी.स्वेज नहर मिस्र में स्थित है और भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ती है. यह एशिया और यूरोप के बीच सबसे छोटा समुद्री रास्ता मानी जाती है.

इस नहर का संचालन मिस्र की सरकारी संस्था ‘सुएज कैनाल अथॉरिटी’ करती है, जो यहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलती है। यह मिस्र की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा राजस्व स्रोत है.

फीस जहाज के आकार, वजन और कार्गो पर निर्भर करती है. बड़े कंटेनर जहाजों को यहां से गुजरने के लिए 5 से 7 लाख डॉलर तक चुकाने पड़ सकते हैं, जबकि तेल टैंकरों के लिए यह रकम 3 से 6 लाख डॉलर के बीच हो सकती है.

पनामा नहर: दो महासागरों के बीच पुल

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पनामा नहर मध्य अमेरिका में स्थित है और अटलांटिक महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ती है. इसका संचालन ‘पनामा कैनाल अथॉरिटी’ करती है.

यहां टोल की गणना कई कारकों के आधार पर होती है, जैसे जहाज का आकार, उसकी क्षमता और वह किस तरह के लॉक्स से गुजरता है. आमतौर पर यहां जहाजों को 1 लाख से 4.5 लाख डॉलर तक का शुल्क देना पड़ता है.इस नहर के जरिए मुख्य रूप से अनाज, कोयला, कंटेनर माल और पेट्रोलियम उत्पादों का परिवहन होता है.

प्राकृतिक और कृत्रिम रास्तों में फर्क

हॉर्मुज, स्वेज और पनामा के बीच सबसे बड़ा फर्क यही है कि हॉर्मुज एक प्राकृतिक समुद्री मार्ग है, जबकि स्वेज और पनामा मानव-निर्मित नहरें हैं.

प्राकृतिक रास्तों पर अंतरराष्ट्रीय कानून लागू होता है, जो मुक्त आवागमन की गारंटी देता है. वहीं, कृत्रिम नहरों का संचालन संबंधित देश करते हैं, इसलिए वे वहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूल सकते हैं.

दुनिया के लिए क्यों अहम है यह मुद्दा?

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री रास्तों में से एक है. वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है.अगर यहां किसी तरह की बाधा आती है-चाहे वह टोल हो, प्रतिबंध हो या सैन्य तनाव तो इसका असर सीधे तेल की कीमतों, सप्लाई चेन और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.

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इसी वजह से, हॉर्मुज को लेकर उठने वाला हर सवाल सिर्फ एक क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि वैश्विक चिंता का विषय बन जाता है.

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