क्यों संकट में हैं ईरान के तेल कुएं? न निकलना रोक सकते हैं, न स्टोर करने की जगह

ईरान के सामने अब तेल स्टोर करने का संकट आ गया है. सप्लाई चेन प्रभावित होने के बाद से ईरान से तेल बाहर नहीं जा रहा है और ईरान में तेल स्टॉक बढ़ता जा रहा है. ऐसे में तेल के कुएं बंद करने का वक्त भी आ सकता है.

Advertisement
ईरान में अब ऑयल स्टोरेज अहम समस्या बन रही है. (Photo: Pexels) ईरान में अब ऑयल स्टोरेज अहम समस्या बन रही है. (Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:21 PM IST

जिस तेल के दम पर ईरान अपना दबदबा कायम कर रहा था, वो ही तेल अब ईरान के लिए मुश्किल बन गया है. दरअसल, अब ईरान के सामने तेल का बंदोबस्त करना ही संकट बन रहा है. युद्ध ने ईरान को ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है कि अब तेल का स्टॉक ही उसके लिए मुश्किल बन रहा है. अब ईरान के पास 12 से 22 दिनों तक तेल स्टोरेज का प्रबंध है, इसके बाद ईरान के पास तेल रखने की जगह नहीं रहेगी. इसके बाद ईरान को अपने तेल का उत्पादन बंद करना होगा या फिर अमेरिका से कोई समझौता करना होगा. दरअसल, अभी अमेरिका की वजह से तेल सप्लाई अटकी पड़ी है और दूसरे देशों में तेल नहीं जा पा रहा है.

Advertisement

मार्च में ईरान रोजाना 18 लाख बैरल तेल बेच रहा था, जो आँकड़ा अब करीब 5 लाख पर आ गया है. ऐसे में ईरान के पास तेल का स्टॉक बढ़ता जा रहा है. लेकिन, अमेरिका की नाकाबंदी की वजह से ईरान अपना तेल दूसरे देशों ने नहीं भेज पा रहा है. हालात ऐसे आ गए हैं कि ईरान अब अपने पुराने जहाज में भी तेल स्टोर कर रहा है. ईरान अपने पुराने वीएलसीसी जहाजों में तेल भरकर रख रहा है, जिनमें काफी बड़ी मात्रा में तेल रखा जा सकता है. अब इन कबाड़ जहाजों को गोदाम के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है. 

ईरान के साथ ही अन्य तेल उत्पादक देश भी संकट में है और उन्हें तेल उत्पादन कम करना पड़ रहा है. अगर ये ही स्थिति मई में भी बनी रहती है तो ईरान को मई के बीच में अपने उत्पादन में कमी करनी होगी. ऐसे में ईरान को 15 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन कम करना होगा. इसके बाद भी समस्या लगातार बढ़ती जाएगी. लेकिन, अगर ईरान तेल के कुओं को बंद करने का फैसला करता है तो ईरान के लिए काफी मुश्किल होगी और नुकसान भी ज्यादा होगा. अगर कुओं से तेल नहीं निकाला जाता है तो काफी मुश्किल बढ़ जाती है. 

Advertisement

अगर तेल नहीं निकाला जाए तो क्या होगा?

अगर तेल के कुओं के प्राकृतिक प्रेशर को बंद कर दिया जाता है तो कुआं एक तरह से डेड हो जाता है. यानी ये भरोसा नहीं है कि आगे जब तेल निकालने की कोशिश की जाए तो तेल निकलेगा ही. इस स्थिति में तेल निकलना हमेशा के लिए बंद हो सकता है. कई बार इस स्थिति में 50 फीसदी तेल निकलता है और कई बार पूरी तरह से तेल निकलना बंद हो जाता है. इसके साथ ही जो तेल के कुएं में पाइप लगे होते हैं, उनमें पैराफिन, गाद जमकर पत्थर बन जाता है और ऐसा हो जाए तो इसे ठीक करना लगभग असंभव होता है. इसलिए इनका लगातार इस्तेमाल होना जरूरी है. 

इसके साथ ही कई बार लंबे समय से इस्तेमाल ना होने पर तेल जम जाता है और पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर बर्बाद होने का खतरा बढ़ जाता है. साथ ही कुआं बंद होते ही पानी ऊपर आ जाता है. जब उत्पादन लगातार होता रहता है तो पानी का संतुलन भी बना रहता है. ऐसा ना होने पर पानी की परत ऊपर हो जाती है. खास बात ये है कि इस दौरान सिर्फ खारा पानी निकलता है और कुआं पूरी तरह बेकार हो जाता है. इससे वापस उत्पादन करने पर तेल नहीं निकल पाता है. इसे वाटरआऊट सिचुएशन कहा जाता है.

Advertisement

इसके बाद जब पुराने बंद पड़े कुएं को फिर से शुरू किया जाता है तो बेहद खर्चा होता है. पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाता है. इस स्थिति में नए कुआं तैयार आसान और सस्ता रहता है. इस स्थिति में ईरान के लिए मुश्किल स्थिति पैदा हो सकती है और अमेरिका चाहता है कि ईरान बातचीत के लिए तैयार हो जाए. 
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement