हम अक्सर शॉपिंग के लिए बड़े-बड़े मॉल्स में जाते हैं. अपने परिवार या दोस्तों के साथ शाम और वीकेंड बिताने की यह सबसे बेहतरीन जगह होती है. क्योंकि, यहां घूमने के साथ-साथ कुछ खरीदारी भी हो जाती है. लेकिन, क्या कभी इस दौरान शायद ही आपने ध्यान दिया हो कि शॉपिंग मॉल्स की दीवार पर घड़ी दिखाई दी हो. (Photo - Pexels)
अब आगे जब कभी आप मॉल जाएं तो ध्यान दीजिएगा कि वहां घड़ियां नहीं लगाई जाती हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में मॉल में घड़ियां नहीं लगाई जाती हैं? इसका जवाब शायद है, वहां घड़ी नहीं होती है. क्योंकि, शॉपिंग सेंटर उन जगहों में से एक हैं जहां समय पलक झपकते ही बीत जाता है और जहां बीस मिनट की छोटी-मोटी खरीदारी आसानी से घंटों तक चलने वाले बड़े खर्च में बदल सकती है. (Photo - AP)
शॉपिंग सेंटरों में घड़ियां क्यों दिखाई नहीं देती हैं, इसके पीछे एक सोची-समझी वजह काम करती है. यह एक छोटी सी तरकीब है जिसे 'टेम्पोरल डिस्टॉर्शन' कहा जाता है. यानी, किसी व्यक्ति की समय की धारणा को बदलने की क्रिया. ऐसे में समझते हैं कि यह कैसे काम करता है? और क्या इससे हमें ज़्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं? (Photo - Pexels)
Metro.co.uk की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मनोवैज्ञानिक लोरा गीगे ने बताया कि शॉपिंग सेंटरों में घड़ियों का न होना एक सोची-समझी रणनीति है, जो उपभोक्ताओं के मनोविज्ञान से जुड़ी है. यह आपकी मॉल में रुकने के समय को बढ़ाने का काम करता है और इस रणनीति को आपके खर्च को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है. (Photo - Pexels)
शॉपिंग सेंटर एक ऐसा यूनिवर्स है जहां समय की अवधारणा को बड़ी चालाकी से नियंत्रित किया जाता है. घड़ियों का जानबूझकर न होना पर्यावरणीय मनोविज्ञान का एक ऐसा रणनीतिक हिस्सा है, जिसका मकसद आपको समय के बीतने से अलग करना है. (Photo - Pexels)
खरीदारी करते समय हम समय का ध्यान ही नहीं रखते, इस तरह हम खरीदारी में ज्यादा मशगूल हो जाते हैं और यह मॉल में हमारी खर्च करने की प्रवृति को बढ़ावा देता है. क्योंकि हम वहां रखे उत्पादों से नजरें हटा ही नहीं सकते हैं. लोरा का कहना है कि आप जितनी देर तक इस समयहीन अवस्था में रहेंगे, उतनी ही अधिक संभावना है कि आप अतिरिक्त खरीदारी करेंगे, जो आपको मॉल के बाहरी काम और अन्य चीजों से जुड़े समय से अलग करती रहती है. (Photo - Pixabay)
शॉपिंग सेंटर आपको आकर्षित करने के लिए केवल यही रणनीति नहीं अपनाते हैं. वे इस तरह की लाइटिंग की व्यवस्था, तापमान और बैकग्राउंड म्यूजिक का इस्तेमाल करके एक विशेष प्रकार का माहौल भी बनाते हैं, जो आपके मूड को बेहतर बनाता है. (Photo - Pixabay)
ऐसे माहौल आपके तनाव को कम करने में मदद करता है और एक ऐसा वातावरण बनाता है, जहां आप इत्मीनान से खरीदारी के विकल्प देखते हुए खर्च करने के लिए अप्रत्यक्ष तौर पर प्रोत्साहित हों. इसलिए सुपरमार्केट अक्सर धीमा संगीत बजाते हैं ताकि शांत और तनावमुक्त माहौल बना रहे, जिससे आप स्टोर में काफी देर तक रुक सकें. (Photo - Pixabay)