टाइटेनिक अपने समय का एक अनोखा और विशाल जहाज था. समुद्र में जब यह रवाना हुआ, उससे पहले इसके बारे में यही चर्चा थी कि यह जहाज कभी डूब ही नहीं सकता है. दुर्भाग्य से यह बेहतरीन और लाजवाब जहाज समुद्र की गहराईयों में समा गया था. (Photo - Getty)
टाइटेनिक के डूबने की घटना पर कई फिल्में और डॉक्यूमेंट्री भी बनीं हैं और कई समुद्री खोज अभियान इसके मलबे को खोजने के लिए चलाए गए. ऐसे में जानते हैं इस टाइटेनिक की कहानी क्या है. यह जहाज कहां से रवाना हुआ था और इसे कहां पहुंचना था? साथ ही यह भी जानेंगे कि यह विशाल जहाज किस जगह डूबा था. (Photo - Pixabay)
15 अप्रैल, 1912 को आधी रात के बाद सुबह 2:20 बजे ब्रिटिश समुद्री जहाज टाइटेनिक कनाडा के न्यूफाउंडलैंड से लगभग 400 मील दक्षिण में उत्तरी अटलांटिक महासागर में डूब गया था. उस वक्त जहाज पर 2,200 यात्री और चालक दल के सदस्य सवार थे. यह विशाल जहाज ढाई घंटे पहले एक हिमखंड से टकरा गया था. (Photo - Pexels)
10 अप्रैल को, आरएमएस टाइटेनिक, जो अब तक निर्मित सबसे विशाल और सबसे आलीशान समुद्री जहाजों में से एक था, उसने अटलांटिक महासागर के अपने पहले सफर पर इंग्लैंड के साउथेम्प्टन से प्रस्थान किया. (Photo - Getty)
टाइटैनिक को आयरिश जहाज निर्माता विलियम पिर्री ने डिजाइन किया था और इसे बेलफास्ट में बनाया गया था. इसे दुनिया का सबसे तेज जहाज माना जाता थ. इसकी लंबाई जहाज के पिछले हिस्से से अगले हिस्से तक 883 फीट थी और इसके ढांचे को 16 हिस्सों में बांटा गया था, जिन्हें जलरोधक माना जाता था. (Photo - Getty)
चूंकि इनमें से चार हिस्सों में पानी भरने पर भी जहाज की उत्प्लावन क्षमता में कोई खास कमी नहीं आती थी, इसलिए टाइटैनिक को कभी न डूबने वाला जहाज माना जाता था. बंदरगाह से निकलते समय, जहाज न्यूयॉर्क नाम के स्टीमर के बहुत करीब आ गया था. फिर सुरक्षित रूप से उससे आगे निकल गया, जिससे टाइटैनिक के डेक पर मौजूद सभी यात्रियों ने राहत की सांस ली. (Photo - Getty)
टाइटेनिक जिस अटलांटिक समुद्री मार्ग पर अपनी पहली यात्रा पर निकला था, वो शिपिंग रूट काफी व्यस्त होता था और जहाजों में एक दूसरे से आगे निकलने और अपने गंतव्य तक पहले पहुंचने की होड़ मची रहती थी. टाइटेनिक जहाज लगभग 2,200 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को लेकर चल रहा था. (Photo -Reuters)