जब हम कार, बाइक या ट्रेन में सफर करते हैं तो हमें पता होता है कि उन्हें रोकने के लिए ब्रेक लगाए जाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हजारों किलो वजन वाला विमान, जो सैकड़ों किलोमीटर की रफ्तार से उड़ता है, वह जमीन पर उतरने के बाद आखिर रुकता कैसे है? दरअसल हवाई जहाज को रोकना किसी साधारण गाड़ी को रोकने जितना आसान नहीं होता. इसके लिए कई तरह की तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि हवाई जहाज में ब्रेक कैसे लगाए जाते हैं.
पहियों में लगे होते हैं खास ब्रेक
हवाई जहाज के पहियों में भी ब्रेक होते हैं, लेकिन ये कार या बाइक के ब्रेक से काफी मजबूत और अलग होते हैं. इन्हें डिस्क ब्रेक सिस्टम कहा जाता है. जब पायलट ब्रेक लगाता है तो पहियों के अंदर लगे डिस्क एक-दूसरे से रगड़ खाते हैं और विमान की रफ्तार धीरे-धीरे कम होने लगती है. हवाई जहाज के ब्रेक इतने ताकतवर होते हैं कि वे भारी विमान को भी कुछ ही दूरी में रोक सकते हैं. हालांकि पायलट इन्हें धीरे-धीरे इस्तेमाल करता है ताकि पहियों पर ज्यादा दबाव न पड़े.
इंजन की ताकत से भी लगता है ब्रेक
विमान को रोकने के लिए सिर्फ पहियों के ब्रेक ही नहीं होते. इसमें एक खास तकनीक का इस्तेमाल होता है जिसे थ्रस्ट रिवर्सर (Thrust Reverser) कहा जाता है. जब विमान रनवे पर उतरता है तो पायलट इंजन की हवा की दिशा को उल्टा कर देता है. यानी जो हवा विमान को आगे धकेलती है, वही हवा अब उसे पीछे की ओर रोकने लगती है. इससे विमान की गति तेजी से कम हो जाती है. यह तकनीक खासकर बड़े पैसेंजर विमानों में बहुत काम आती है.
पंखों की मदद से भी कम होती है रफ्तार
विमान के पंखों के ऊपर कुछ खास हिस्से लगे होते हैं जिन्हें स्पॉइलर (Spoiler) कहा जाता है. जैसे ही विमान जमीन को छूता है, ये स्पॉइलर ऊपर उठ जाते हैं. इनके उठने से दो फायदे होते हैं. पहला, विमान की हवा में उठने की ताकत (लिफ्ट) कम हो जाती है और विमान पूरी तरह जमीन पर टिक जाता है. दूसरा, हवा का दबाव बढ़ने से विमान की रफ्तार कम होने लगती है. इस तरह स्पॉइलर भी विमान को रोकने में मदद करते हैं.
रनवे की लंबाई भी होती है अहम
विमान को सुरक्षित तरीके से रोकने के लिए रनवे की लंबाई भी बहुत महत्वपूर्ण होती है. बड़े हवाई अड्डों पर रनवे कई किलोमीटर लंबे बनाए जाते हैं ताकि विमान के पास रफ्तार कम करने के लिए पर्याप्त जगह हो. इसके अलावा रनवे की सतह भी खास तरह से बनाई जाती है ताकि पहियों को बेहतर पकड़ मिल सके और विमान जल्दी रुक सके.
कंप्यूटर सिस्टम भी करता है मदद
आजकल आधुनिक विमानों में ऑटो-ब्रेक सिस्टम भी होता है. पायलट रनवे की स्थिति और विमान की रफ्तार के हिसाब से पहले ही ब्रेक की सेटिंग तय कर देता है. जैसे ही विमान जमीन पर उतरता है, कंप्यूटर अपने आप सही मात्रा में ब्रेक लगाता है. इससे विमान सुरक्षित तरीके से रुक जाता है.