कश्मीरी गेट दिल्ली में स्थित है, जो दिल्ली के ऐतिहासिक किलेबंद शहर का उत्तरी द्वार है.पुरानी दिल्ली का यह द्वार यमुना नदी के निकट स्थित था. कहा जाता है कि बादशाह शाहजहां ने शाहजहांबाद नाम का एक शहर बसाया था. यह आज के पुरानी दिल्ली का इलाका था. इसी शहर का उत्तरी दरवाजा कश्मीरी गेट कहलाया. (Photo - ITG)
शाहजहांबाद शहर की दीवारों के उत्तरी द्वार पर इस गेट का निर्माण हुआ था, जो रास्ता कश्मीर की ओर जाता था. यही वजह है कि इस द्वार का नाम 'कश्मीरी गेट' पड़ा. क्योंकि यह उत्तर दिशा की ओर, कश्मीर जाने वाली सड़क की ओर था. बाद में सैन्य अभियंता रॉबर्ट स्मिथ ने 1835 में दोबारा इसका निर्माण कराया था. आज यह उत्तरी दिल्ली के पुराने क्षेत्र में स्थित एक इलाके का नाम भी है. (Photo - ITG)
आज यह एक महत्वपूर्ण सड़क नेटवर्क का जंक्शन है. क्योंकि लाल किला, आईएसबीटी और दिल्ली जंक्शन रेलवे स्टेशन इसके आसपास स्थित हैं. दिल्ली के किलेबंद शहर के उत्तरी द्वार के आसपास का क्षेत्र, जो लाल किले (दिल्ली का लाल किला) की ओर जाता था, कश्मीर की ओर था. इसलिए इसका नाम कश्मीरी गेट रखा गया. (Photo - ITG)
किलेबंद शहर के दक्षिणी द्वार को दिल्ली गेट कहा जाता है. जब अंग्रेजों ने 1803 में पहली बार दिल्ली में बसना शुरू किया, तो उन्होंने पुराने दिल्ली शहर की दीवारें मिली. उन्होंने धीरे-धीरे कश्मीरी गेट क्षेत्र में अपनी आवासीय बस्तियां स्थापित कीं, जहां कभी मुगलों के महल और कुलीन वर्ग के घर हुआ करते थे. (Photo - ITG)
1857 के विद्रोह के दौरान इस कश्मीरी गेट को राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि मिली. इसे भारतीय स्वतंत्रता का पहला युद्ध स्थल भी माना जाता है. भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों ने इसी कश्मीरी गेट से अंग्रेजों पर तोप के गोले दागे और इस क्षेत्र का इस्तेमाल युद्ध और अंग्रेजों के प्रतिरोध की रणनीति बनाने के लिए किया. (Photo - ITG)
बाद में अंग्रेजों ने विद्रोहियों को शहर में प्रवेश करने से रोकने के लिए भी इसी कश्मीरी गेट का इस्तेमाल किया था. संघर्षों के प्रमाण आज भी मौजूदा दीवारों को हुए नुकसान के रूप में दिखाई देते हैं. कश्मीरी गेट 1857 के भारतीय विद्रोह के दौरान ब्रिटिश सेना के एक महत्वपूर्ण हमले का स्थल था. 14 सितंबर, 1857 की सुबह बारूद का इस्तेमाल करके पुल और गेट के बाएं हिस्से को नष्ट कर दिया गया था, जिससे दिल्ली की घेराबंदी के अंत में विद्रोहियों पर अंतिम हमले की शुरुआत हुई. (Photo - ITG)
1857 के बाद, अंग्रेज सिविल लाइंस चले गए और कश्मीरी गेट दिल्ली का फैशनेबल और व्यावसायिक केंद्र बन गया. यह दर्जा इसे 1931 में नई दिल्ली के निर्माण के बाद ही खोना पड़ा. 1965 में, वाहनों के सुचारू आवागमन के लिए कश्मीरी गेट के एक हिस्से को ध्वस्त कर दिया गया था, तब से यह एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है. (Photo - ITG)