इन दिनों डायनासोर के चमड़े से बने हैंडबैग की काफी चर्चा हो रही है. कई लोगों ने इस दावे पर संदेह भी व्यक्त किया है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर ये मामला क्या है? वैज्ञानिकों और डिजाइनरों ने गुरुवार को अमेरिका से प्राप्त डायनासोर की एक प्रजाति टायरानोसॉरस रेक्स के जीवाश्मों से प्राप्त कोलेजन (मज्जा) से तैयार किए गए लैदर से बना एक हैंडबैग पेश किया. (Photo - Reuters)
निर्माणकर्ताओं ने बताया कि यह बैग लैब में विकसित चमड़े के महत्व को प्रदर्शित करता है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नीले रंग के इस बैग को एम्स्टर्डम के आर्ट जू संग्रहालय में एक पिंजरे में एक चट्टान पर टी. रेक्स की प्रतिकृति के नीचे 11 मई तक प्रदर्शित किया जाएगा. जिसके बाद इसकी नीलामी की जाएगी, जिसकी शुरुआती कीमत कथित तौर पर पांच लाख डॉलर यानी करीबन 5 करोड़ रुपये से अधिक है. (Photo - Reuters)
इस पहल के पीछे के वैज्ञानिकों ने कहा कि यह सामग्री डायनासोर के अवशेषों से निकाले गए प्राचीन प्रोटीन के टुकड़ों का उपयोग करके विकसित की गई थी, जिन्हें एक अज्ञात जानवर की कोशिका में डाला गया था. ताकि कोलेजन का उत्पादन किया जा सके, जिसे बाद में चमड़े में परिवर्तित कर दिया गया.इस 'टी. रेक्स लेदर' बैग बनाने वाली तीन कंपनियों में से एक, द ऑर्गेनॉइड कंपनी के सीईओ थॉमस मिशेल ने कहा कि इसमें कई तकनीकी चुनौतियां थीं. जीनोमिक इंजीनियरिंग फर्म ऑर्गेनॉइड और रचनात्मक एजेंसी वीएमएल, जो इस परियोजना के पीछे की अन्य फर्मों में से एक है. (Photo - Reuters)
उन्होंने इससे पहले 2023 में ऊनी मैमथ के डीएनए को भेड़ की कोशिकाओं के साथ मिलाकर एक विशाल मांस का गोला बनाने के लिए सहयोग किया था. बी-ग्रोन लेदर लिमिटेड के सीईओ चे कॉनन, जिन्होंने इंजीनियर कोलेजन से हैंडबैग के लिए चमड़ा बनाने पर काम किया है, उन्होंने कहा कि टी-रेक्स मूल ने इसे कुछ ज्यादा दमदार बना दिया है. (Photo - Reuters)
कोनन ने लैब में उत्पादित चमड़े के बारे में कहा कि यह सिर्फ चमड़े के एक पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के बारे में नहीं है, यह एक तकनीकी विकास है. इस प्रोजेक्ट से बाहर के कुछ वैज्ञानिकों ने 'टी. रेक्स लैदर' शब्द पर संदेह व्यक्त किया है. उनका कहना है कि इसके लिए अन्य जानवरों की सामग्री की जरूरत हुई होगी. (Photo - Reuters)
एम्स्टर्डम के व्रीजे यूनिवर्सिटेट की डच जीवाश्मविज्ञानी मेलानी ड्यूरिंग ने कहा कि डायनासोर की हड्डियों में कोलेजन केवल खंडित अंशों के रूप में ही मौजूद रह सकता है, जिनका इस्तेमाल टी. रेक्स की त्वचा या चमड़े को फिर से बनाने के लिए नहीं किया जा सकता है. (Photo - Reuters)
वहीं मैरीलैंड विश्वविद्यालय के जीवाश्म विज्ञानी थॉमस आर. होल्ट्ज़ जूनियर ने भी इसी तरह कहा कि टी. रेक्स के जीवाश्मों में पाया जाने वाला कोई भी कोलेजन हड्डी के अंदर से आता है, न कि त्वचा से, और यह कि पूरी तरह से मेल खाने वाले प्रोटीन में भी बड़े पैमाने पर फाइबर संगठन की कमी होगी जो पशु चमड़े को उसके विशिष्ट गुण प्रदान करता है. (Photo - Reuters)
इसके जवाब में मिशेल ने कहा कि मैं यह कहना चाहूंगा कि जब आप पहली बार कुछ नया करते हैं, तो हमेशा आलोचना होती है और मुझे लगता है कि हम उस आलोचना के लिए वास्तव में आभारी हैं. यह वैज्ञानिक अन्वेषण की आधारशिला है. मुझे लगता है कि कोई भी व्यक्ति टी. रेक्स जैसा कुछ बनाने के इतने करीब कभी नहीं पहुंचा है और शायद भविष्य में भी इतना करीब नहीं पहुंच पाएगा. (Photo - Reuters)