कबीर के दर पर मोदी, 2019 से पहले ढाई करोड़ कबीरपंथियों को साधने की कवायद

मोदी संत कबीर के दर पर दस्तक देकर कहीं न कहीं जाति संतुलन के साथ-साथ ढाई करोड़ कबीरपंथियों को साधने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है.

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कबीर की मजार पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कबीर की मजार पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 28 जून 2018,
  • अपडेटेड 11:36 AM IST

बीजेपी मिशन 2019 की तैयारी में जुट गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यूपी के संत कबीर नगर के मगहर से अपने चुनावी अभियान का आगाज कर रहे हैं. कबीर को दलितों, पिछड़ों, शोषितों, सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक एकता का मसीहा माना जाता है.

मौजूदा समय में यही समाज बीजेपी से नाराज दिख रहा है, जिसके जरिए बसपा और सपा मिलकर मोदी को मात देने की जुगत में है. ऐसे में मोदी संत कबीर के दर पर दस्तक दे रहे हैं इसे कहीं न कहीं जाति संतुलन के साथ-साथ ढाई करोड़ कबीरपंथियों को साधने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है.

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बता दें कि सोलहवीं सदी के महान का जन्म वाराणसी में मुस्लिम जुलाहा (बुनकर) समाज में हुआ था. उन्होंने लगभग अपना पूरा जीवन काशी में ही गुजारा, लेकिन आखिरी समय वो मगहर चले आए. मगहर वही जगह है, जहां तमाम सामाजिक मान्यताओं और रुढ़ीवादिता को तोड़ते हुए संत कबीर ने 1518 ई. में अंतिम सांस ली थी.

यूपी के लोकसभा उपचुनावों में अखिलेश और मायावती के साथ आते ही बीजेपी को शिकस्त खानी पड़ी. इतना ही नहीं बीजेपी का जातिगत समीकरण भी बिगड़ा है. ऐसे में बीजेपी फिर एक बार अपने सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले को मजबूत करने की कवायद में जुट गई है.

पिछले दिनों यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जामिया मिलिया विश्वविद्यालय में दलितों को आरक्षण न मिलने पर सवाल खड़ा किया और कहा कि कोई भी पार्टी इन दोनों विश्वविद्यालयों में दलितों के आरक्षण पर नहीं बोलती है.

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पर उनके दर्शन को नजदीक से जानने-समझने के लिए उनके अनुयायी नेपाल, पूर्वोत्तर के सिक्किम से लेकर उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी प्रांत गुजरात,  दिल्ली, जम्मू, छत्तीसगढ़, और मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों से मगहर पहुंचे हैं.

कबीरपंथियों में सबसे ज्यादा दलित और पिछड़े समुदाय के लोग शामिल हैं. ऐसे में पीएम मोदी मगहर में कबीर के दर पर आए अनुयायियों को संबोधित करेंगे. माना जा रहा है कि इसके जरिए मोदी जहां कबीरपंथियों को साधने की कवायद में हैं. वहीं मुसलमानों में बड़ी आबादी कबीर को मानने वाली हैं खासकर जुलाहा समाज को भी कहीं न अपने पाले में लाने की कोशिश है.

गुजरात में रामकबीर पंथ का प्रभाव

संत कबीर के अनुयायी देश भर में हैं. लेकिन गुजरात के ग्रामीण क्षेत्र में रामकबीर पंथ का खासा प्रभाव है. माना जाता है कि गुजरात के हर गांव में कम से कम एक परिवार कबीर पंथ से जरूर जुड़ा हुआ है. पीएम मोदी भी गुजरात से हैं और ग्रामीण इलाके से है. उन्होंने कई मौको पर कबीर के दोहे के जरिए अपनी बात रखते रहे हैं. ऐसे में मोदी कबीरपंथियों के बीच कबीर की विचारधारा को रखेंगे.

इस साल जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं. उनमें भी कबीर के अनुयायी काफी तादाद में है. छत्तीसगढ़ में कबीर पंथ की कई शाखाएं और उप शाखाएं हैं. राजस्थान के नागौर में , पटना में फतुहा मठ, बिद्दूपुर मठ, भगताही शाखा, छत्तीसगढ़ी या धर्मदासी शाखा, हरकेसर मठ, लक्ष्मीपुर मठ जैसे कई मठों, संस्थाओं पर कबीर पंथ के अनुयायी हैं.

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