कैबिनेट विस्तार से पहले मंत्री मनोज पांडे बर्खास्त, शिवपाल नहीं होंगे शामिल

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चार साल के अंदर सातवीं बार अपनी कैबिनेट का विस्तार करने जा रहे हैं. प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक सोमवार सुबह 11 बजे राजभवन में नए मंत्रियों को शपथ दिलाएंगे.

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अखिलेश यादव अखिलेश यादव

लव रघुवंशी / अनूप श्रीवास्तव / बालकृष्ण

  • लखनऊ,
  • 27 जून 2016,
  • अपडेटेड 11:24 AM IST

उत्‍तर प्रदेश में कैबिनेट विस्‍तार के पहले सोमवार को अखिलेश सरकार ने मंत्री मनोज पांडे को बर्खास्‍त कर दिया. बताया जाता है कि पांडे की जगह नारद राय ले सकते हैं.

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चार साल के अंदर सातवीं बार अपनी कैबिनेट का विस्तार करने जा रहे हैं. प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक सोमवार सुबह 11 बजे राजभवन में नए को शपथ दिलाएंगे. माना जा रहा है कि यह चुनाव के पहले का आखिरी कैबिनेट विस्तार होगा.

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वहीं खबर है कि शिवपाल यादव कैबिनेट विस्तार में शामिल नहीं होंगे. वह कैबिनेट विस्तार से पहले ही गृहनगर इटावा वापस लौट चुके हैं. माना जा रहा है कि कौमी एकता दल के विलय से हुई किरकिरी के बाद वे पार्टी से नाराज हैं. शिवपाल ने ही मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का सपा में विलय कराया था. बाद में अखिलेश ने विलय रद्द कर दिया था.

बंजर जमीन को सही करेंगे शिवपाल
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चुनाव के पहले मंत्रिमंडल का विस्तार करके और मंत्रिमंडल में फेरबदल करके वोटों के बीज डाल रहे हैं ताकि चुनाव के समय यह फसल लहलहाए. लेकिन ठीक इसी मौके पर शिवपाल यादव ने इटावा जाकर बंजर जमीन को सही करने का काम चुन लिया. इटावा में उन्होंने परती भूमि विकास विभाग के अधिकारियों की बैठक बुलाई है जिसमें आसपास के जिलों के अधिकारी शामिल होंगे.


शिवपाल यादव को बंजर जमीन की चिंता यूं ही नहीं सता रही है. कौमी एकता दल की समाजवादी पार्टी में विलय को लेकर जिस तरह से उनकी फजीहत हुई है, वह किसी से छिपी नहीं है. यह बात बिल्कुल साफ है की बैठक तो सिर्फ बहाना है शिवपाल यादव अपनी नाराजगी दिखाने के लिए इटावा चले गए हैं.

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कौमी एकता दल को समाजवादी पार्टी में शामिल कराने में, बलराम यादव के साथ शिवपाल यादव ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई थी. लेकिन मुख्यमंत्री ऐसे नाराज हुए की बलराम सिंह यादव को ही मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया था.

इस खींचतान के बीच शनिवार को जब समाजवादी पार्टी की पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक हुई तो उसमें शिवपाल यादव बिल्कुल अकेले पड़ गए. यहां तक कि रामगोपाल यादव ने भी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का साथ दिया. आखिर में समझौता यह हुआ की बलराम सिंह यादव को फिर से मंत्री बना दिया जाए, और कौमी एकता दल से पल्ला छुड़ा लिया जाए.


मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाने वाले, बलराम यादव के मंत्रिमंडल में वापसी से उनकी इज्जत तो बच गई, लेकिन शिवपाल यादव के के पास फजीहत के अलावा कुछ भी नहीं बचा. मंत्रिमंडल विस्तार में वरिष्ठ मंत्री आजम खान भी मौजूद नहीं थे, जो मेरठ के एक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं.

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