गोरखपुर में नहीं थमा मौत का कोहराम, फिर 2 दिन में 34 बच्चों ने गंवाई जान

इस घटना के बाद BRD कॉलेज के पूर्व राजीव मिश्रा की पत्नी पूर्णिमा शुक्ला को हटा दिया गया है. वह आयुष मंत्रालय के जरिए बीआरडी कॉलेज से जुड़ी थीं. वहीं यूपी के स्वास्थय मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि अभी इस मामले की जांच चल रही है, हम अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रहे हैं.

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गोरखपुर हादसे की फाइल फोटो (एपी) गोरखपुर हादसे की फाइल फोटो (एपी)

शिवेंद्र श्रीवास्तव

  • गोरखपुर,
  • 16 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 1:51 PM IST

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई मासूम बच्चों की मौतों ने हर किसी को झकझोर दिया. लेकिन अभी भी ये मामला थमा नहीं है.

पिछले दो दिनों में बीआरडी कॉलेज में 34 बच्चों की मौत हो गई है. 13 अगस्त की आधी रात से लेकर 14 अगस्त तक 24 बच्चों ने अपनी जान गंवाई तो वहीं 14 अगस्त की आधी रात से लेकर 15 अगस्त तक 10 बच्चों की मौत हुई. आपको बता दें कि जब यह हादसा हुआ था तब से उस समय पिछले हफ्ते तक मृत बच्चों की संख्या 63 थी.

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इस घटना के बाद BRD कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य राजीव मिश्रा की पत्नी पूर्णिमा शुक्ला को हटा दिया गया है. वह आयुष मंत्रालय के जरिए बीआरडी कॉलेज से जुड़ी थीं. वहीं यूपी के स्वास्थय मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि अभी इस मामले की जांच चल रही है, हम अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रहे हैं.

इस बीच डीजी मेडिकल हेल्थ उत्तर प्रदेश जांच के लिए अभी भी बीआरडी अस्पताल में डेरा डाले हुए हैं. जांच में पता चला है की पूर्व प्रधानाचार्य राजीव मिश्रा की पत्नी पूर्णिमा शुक्ला सरकारी कामकाज में भी दखल करती थी. अस्पताल से संबंधित कई आदेश उनके दखल से किए जाते थे. जांच में यह जानकारी आमने सामने आने के बाद सरकार ने अस्पताल से उनका अटैचमेंट भी रद्द कर दिया है. वह आयुष मंत्रालय के जरिए पिछले 4 महीने से अस्पताल में संबंद्ध थी. अब उनकी भूमिका की जांच आयुष मंत्रालय की आईएएस अधिकारी शारदा करेंगी.

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सूत्रों के मुताबिक जांच में आरोप सही से पाए जाने के बाद सख्त कार्रवाई की जा सकती है इस बीच जांच कर रहे पैनल ने अपनी अंतरिम जांच रिपोर्ट भी एडिशनल हेल्थ सेक्रेटरी भारत सरकार को सौंपी है जिसमें बताया गया है कि पिछले साल की तुलना में इस साल इंसेफेलाइटिस से बीआरडी अस्पताल में कम मौतें हुई हैं, पैनल के अधिकारी पिछले 2 दिन से गोरखपुर में ही हैं.

भ्रष्टाचार ने ली बच्चों की जान

आपको बता दें कि इस घटना से जुड़ा एक खुलासा हुआ था. घटना होने से एक दिन पहले ही यह साफ हो गया था कि ऑक्सीजन गैस सिलेंडर की कमी है. लेकिन फिर भी उन्हें मंगाया नहीं गया था. से 350 किमी. दूर इलाहाबाद से मंगाने चाहे, क्योंकि यह सब एक टेंडर प्रक्रिया के जरिए होता है. लेकिन अगर अधिकारी इस चक्कर में ना पड़ते और लोकल इलाके से ही सिलेंडर ले लेते तो शायद लगभग 30 बच्चों की जान बचाई जा सकती थी.

अधिकारियों ने इलाहाबाद और फैजाबाद से सिलेंडर मंगाए, जब घटना हुई तो सिलेंडर रास्ते में ही थे और बच्चे मौत से जूझ रहे थे. एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जापानी बुखार के कारण लगभग 500 मौतें हो चुकी हैं. 1 जनवरी से लेकर 13 अगस्त तक लगभग 1208 तीव्र एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) के केस आए, जिनमें से 152 की मौत हुई.

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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई मौतों में एक बच्चे के पिता राजभर ने अपने बच्चे को खोने के बाद राज्य के स्वास्थय मंत्री, मेडिकल एजुकेशन मंत्री और प् के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. लेकिन कोई FIR दर्ज नहीं हुई. वहीं अभी तक किसी भी मामले की एफआईआर नहीं हुई है, ना ही किसी का पोस्टमार्टम हुआ है.

 

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