गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में ईडी ने 8 इंजीनियरों के खिलाफ दर्ज किया केस

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सत्ता में आने के साथ ही इस घोटाले में जांच के आदेश दिए थे, जिसके बाद जांच शुरू हुई थी. बीते साल 19 जून को पुलिस ने भी इस मामले में केस दर्ज किया था.

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फाइल फोटो फाइल फोटो

शिवेंद्र श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 29 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 10:16 AM IST

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अखिलेश यादव सरकार के दौरान हुए गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में ईडी ने केस दर्ज कर लिया है. ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत ये कार्रवाई की है. इसमें सिंचाई विभाग के 8 इंजीनियरों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है.

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की सरकार ने सत्ता में आने के बाद इस घोटाले में जांच के आदेश दिए थे, जिसके बाद इसमें जांच शुरू हुई थी. बीते साल 19 जून को पुलिस ने भी इस मामले में केस दर्ज किया था.

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आपको बता दें कि इस मामले में सीबीआई भी जांच कर रही है. बीते अगस्त में प्रमुख सचिव गृह उत्तर प्रदेश ने सीबीआई को एक पत्र लिखा था, जिसमें सिंचाई विभाग के आठ अभियंताओं को आरोपी बनाया गया था. बाद में गोमती नगर थाने में इनके खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज हुई थी.

मामले की शिकायत के मुताबिक सपा सरकार के दौरान गोमती नदी के किनारे को विकसित करने की योजना शुरु की गई थी, जिसमें 1513 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे. इस खर्चे में गड़बड़ी की शिकायतें मिली थीं, लेकिन तत्कालीन सपा सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की. मार्च में जब सरकार बदली तो इस मामले में जांच शुरु की गई, बाद में जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी.

सीबीआई ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी. आरोपों के मुताबिक, 1513 करोड़ रुपए के खर्चे वाले प्रोजेक्ट में बगैर काम किए ही 1437 करोड़ रुपए यानी 95 फीसदी राशि पहले ही जारी कर दी गई. शिकायतों के बावजूद पूरा काम नहीं हुआ, जिसके बाद जांच शुरू हुई. आरोपों के मुताबिक परियोजना में मिली राशि में घोटाला करने में अधिकारियों ने और इंजीनियरों ने जमकर खेल किया.

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गेमन इंडिया नाम की जिस कंपनी को ठेका दिया गया, वह पहले से डिफॉल्टर थी. सरकार की शिकायत के मुताबिक इसमें परियोजना से जुड़े अधिशासी अभियंता, अधीक्षण अभियंता, मुख्य अभियंता और प्रमुख अभियंता मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं. बीजेपी सरकार के गठन के बाद ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की बात की थी. 

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