वरुण गांधी अन्ना हजारे के आमंत्रण पर जाएंगे रालेगण सिद्धि!

भारतीय जनता पार्टी के नेता व सांसद वरुण गांधी अगले माह महाराष्ट्र प्रांत के रहने वाले समाजसेवी व आंदोलनकारी अन्ना हजारे के गांव रालेगण सिद्धि जा सकते हैं. ऐसी खबरें सूत्रों के हवाले से आई हैं. सूत्र बताते हैं कि वरुण गांधी ने अन्ना हजारे के उनके गांव आने वाले न्यौते को स्वीकार कर लिया है.

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वरुण गांधी वरुण गांधी

हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 20 मई 2017,
  • अपडेटेड 5:27 AM IST

भारतीय जनता पार्टी के नेता व सांसद वरुण गांधी अगले माह महाराष्ट्र प्रांत के रहने वाले समाजसेवी व आंदोलनकारी अन्ना हजारे के गांव रालेगण सिद्धि जा सकते हैं. ऐसी खबरें सूत्रों के हवाले से आई हैं. सूत्र बताते हैं कि वरुण गांधी ने अन्ना हजारे के उनके गांव आने वाले न्यौते को स्वीकार कर लिया है. गौरतलब है कि वरुण गांधी संसद के अंतिम सत्र में वरुण गांधी ने कहा था कि राइट टू रिकॉल पर संसद में कानून बनाया जाए. इस पर वे प्राइवेट मेम्बर बिल लाए थे. कल अन्ना हजारे ने पत्र लिखकर राइट टू रिकॉल पर वरुण गांधी का समर्थन किया.

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बीजेपी में हाशिए पर हैं वरुण गांधी
भाजपा सांसद बीते लंबे अर्से से पार्टी में हाशिए पर हैं. पार्टी में कोई उनकी सुध तक नहीं ले रहा. पार्टी ने बीते यूपी विधानसभा चुनाव में भी उनसे किनारा कर लिया था. उन्हें कैम्पेन के दौरान इस्तेमाल नहीं किया.

वरुण ने किया ट्वीट
राइट टू रिकॉल पर अन्ना का समर्थन पत्र मिलने के बाद वरुण गांधी ने ट्वीट में लिखा कि वे पार्टी नेतृत्व से इस मुद्दे पर बहस की शुरुआत का आग्रह करते हैं. उन्होंने इसे लोकतंत्र की जड़ों को गहरा बनाने के साथ राजनीति में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जरूरी बताया. उन्होंने इस मसले पर से भी समर्थन एवं सहयोग मांगा है. सूत्रों के हवाले से आने वाली खबरों पर गौर करें तो अन्ना हजारे जहां देश भर में राइट टू रिकॉल पर बड़ी बहस चाहते हैं और पार्टी में हाशिए पर जा चुके वरुण गांधी भी इस मुद्दे पर बड़ा आंदोलन खड़ा करना चाहते हैं.

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राइट टू रिकॉल के साथ ही हो राइट टू रिजेक्ट
अन्ना हजारे ने पत्र में ये भी लिखा कि राइट टू रिकॉल के साथ ही का कानून भी होना चाहिए. ऐसा होने के बाद ही सही मायनों में देश में लोकतंत्र आएगा. उन्होंने नोटा को अधूरा कहने के साथ ही उसमें सुधार की जरूरत जताई. उन्होंने कहा कि लोगों के पास ऐसे अधिकार होने चाहिए कि उम्मीदवार पसंद न आने पर उन इलाकों में दुबारा चुनाव कराने के लिए राइट टू रिजेक्ट कानून बने. इसके साथ ही नोटा में सुधार की जरूरत भी जताई.

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