उपहार कांड: गोपाल अंसल को काटनी होगी पूरी सजा, 4 हफ्ते में करना होगा सरेंडर

उपहार सिनेमा हॉल में लगी आग के मामले में दोषी करार दिए गए गोपाल अंसल को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा. कोर्ट ने उनकी जेल की सजा घटाने से इनकार कर दिया और अब उन्हें छह महीने से ज्यादा की बची सजा पूरी करनी होगी.

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उपहार अग्निकांड उपहार अग्निकांड

अनुषा सोनी / अहमद अजीम

  • नई दिल्ली,
  • 09 फरवरी 2017,
  • अपडेटेड 3:22 PM IST

उपहार सिनेमा हॉल में लगी आग के मामले में दोषी करार दिए गए गोपाल अंसल को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. कोर्ट ने गोपाल अंसल की सजा घटाने से इनकार कर दिया और अब उन्हें बची सजा पूरी करनी होगी. सुप्रीम कोर्ट ने सरेंडर के लिए चार हफ्तों का वक्त दिया है. बता दें की 13 जून, 1997 को दिल्ली के उपहार सिनेमा हॉल में आग लग गई थी जिसमें 23 बच्चों समेत 59 लोगों की जान चली गई थी.

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एक साल की सुनाई गई थी सजा
इससे पहले कोर्ट ने मामले में गोपाल अंसल को एक साल जेल की सजा सुनाई गई थी. हालांकि इस मामले में उनकी उम्र का हवाला देते हुए पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट में चली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की 3 सदस्यीय बेंच के दो जज अंसल की सजा घटाने के खिलाफ थे. कोर्ट का कहना था कि चूंकि गोपाल बंसल को उम्र से जुड़ी कोई समस्या नहीं, इसलिए उन्हें सजा में छूट नहीं दी जा सकती. गोपाल पहले ही इस मामले में 4 महीने 20 दिन की सजा पूरी कर चुके हैं. ऐसे में अब उन्हें बचे हुए 7 महीने 10 दिन जेल में काटने पड़ेंगे.

बंसल बंधुओं पर 60 करोड़ का जुर्माना
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अंसल बंधुओं गोपाल और सुशील अंसल को लापरवाही का दोषी करार देते हुए जेल की सजा सुनाई थी. इस सजा के खिलाफ इससे पहले दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अंसल बंधुओं को 60 करोड़ रुपये का जुर्माना अदा कर सजा से बच निकलने की अनुमति दी थी.

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हालांकि अब कोर्ट ने गोपाल अंसल की सजा बरकरार रखते हुए 60 करोड़ रुपये का जुर्माना भी जारी रखा है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, 'कोई भी जुर्माना अपूर्णीय नुकसान को नहीं भर सकता. व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए गोपाल अंसल को सजा देनी चाहिए. जितना गंभीर यह मामला है, उसे देखते हुए 60 करोड़ का जुर्माना ज्यादा नहीं है.'

सजा से संतुष्ट नहीं पीड़ित पक्ष
कोर्ट के इस फैसले से वादी पक्ष एवीयूटी की एन कृष्णामूर्ति खुश नहीं. उन्होंने इस आदेश पर अंसतोष जताते हुए कहा कि इस फैसले से यही पता चलता है कि अमीरों के पास विशेष अधिकार होते हैं. वे बच्चों को मारकर भी बस ट्रॉमा सेंटर के लिए पैसे देकर आजाद घूम सकते हैं. जिस दिन मेरे बच्चे मरे थे, मुझे उसी इन लोगों को गोली मार देनी चाहिए थी.

क्या था उपहार अग्निकांड
बता दें कि 13 जून, 1997 की शाम दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित में हिन्दी फिल्म बॉर्डर दिखाई जा रही थी, तभी वहां आग लग गई और इसमें झुलस कर 59 लोगों की जान चली गई, जबकि 100 के करीब लोग घायल हुए थे.

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