मोदी का कांग्रेस को जवाब- पहले 'नामदारों' के फोन कॉल से मिलते थे अमीरों को लोन

उन्होंने ये भी आश्वस्त किया कि नामदारों की वजह से बैंकों का जो भी पैसा फंसा है उसकी पाई-पाई वसूली जाएगी और इसका उपयोग गरीबों के कल्याण के लिये किया जाएगा.

Advertisement
राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

जावेद अख़्तर

  • नई दिल्ली,
  • 02 सितंबर 2018,
  • अपडेटेड 9:22 AM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डाक विभाग के भुगतान बैंक के शुंभारंभ पर कांग्रेस की जमकर आलोचना की. पीएम मोदी ने बैंकों में लूट का ठीकरा कांग्रेस के सिर फोड़ते हुए ये आरोप लगाया कि उन्होंने अर्थव्यवस्था पर लैंड्समाइन बिछा रखे थे. मोदी ने यह आरोप भी लगाया कि पहले नामदार के फोन कॉल पर लोन मिलते थे.

पीएम मोदी ने अंधाधुध कर्ज बांटकर अर्थव्यवस्था की राह में बारूदी सुरंग बिछाने को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार में नामदारों के फोन कॉल के बाद चुनिंदा कारोबारियों को ऋण दिए गए.

Advertisement

उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र में डूबे कर्ज की भारी समस्या के लिये कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के समय 'फोन पर कर्ज' के रुप में हुए घोटाले को जिम्मेदार ठहराया. साथ ही उन्होंने कहा कि 'नामदारों' के इशारे पर बांटे गए कर्ज की एक-एक पाई वसूली की जाएगी.

प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को डाक विभाग के भुगतान बैंक के शुंभारंभ के अवसर पर यहां आयोजित कार्यक्रम के दौरान यह बात कही. उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार द्वारा 12 बड़े ऋण डिफॉल्टरों में से किसी को भी ऋण नहीं दिया गया है. इन पर 1.75 लाख करोड़ रुपये का बकाया है.

NPA पर जानकारी छुपाई

उन्होंने कहा कि पिछली संप्रग सरकार ने गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) से जुड़ी जानकारियों को छुपाया. उनकी सरकार ने इसकी विधिवत पहचान की और इन चूकों से निपटने और वसूली के कड़े कानून बनाए.

Advertisement

पिछली सरकार ने देश को धोखे में रखा कि केवल 2 से 2.5 लाख करोड़ रुपये का एनपीए है जबकि असल में यह 9 लाख करोड़ रुपये था.

प्रधानमंत्री की ओर से यह प्रतिक्रिया कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि यूपीए सरकार में एनपीए 2.5 लाख करोड़ रुपये था जो एनडीए सरकार में बढ़कर 12.5 लाख करोड़ रुपये हो गया.

मोदी ने कहा कि 2014 में उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद देखा कि सरकारी बैंक लूट लिये गये हैं. 2008 से 2014 के बीच बैंकों द्वारा दिया गया कर्ज उछलकर 52 लाख करोड़ रुपये हो गया जबकि 2008 से पहले के छह दशक में यह आंकड़ा सिर्फ 18 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा था.

उन्होंने कहा कि बिना जांच परख और नियमों को ताक पर रखकर कर्ज बांटे जा रहे थे. कर्ज न चुकाने वाले को ऋण पुनर्गठन के नाम पर और अधिक कर्ज दिये गये. मोदी ने कहा, 'ये ऋण कैसे दिये गये? नामदारों की ओर से एक फोन कॉल पर अमीरों को कर्ज दे दिये जाते थे.'

उन्होंने कहा, 'कांग्रेस और उसके नामदारों की इस फोन बैंकिंग से देश को बड़ा नुकसान हुआ. बैंकों ने नामदारों की इसलिये सुनी क्योंकि शीर्ष अधिकारी इन्हीं नामदारों के द्वारा नियुक्त किये गये थे. बैंकों ने अच्छी तरह यह जानते हुए कि कर्ज का पैसा नहीं आएगा, कर्ज दिया.'

Advertisement

मोदी ने कहा कि 2014 में हमारी सरकार बनने के बाद हमें लगा कि कांग्रेस और उसके नामदारों ने देश की अर्थव्यवस्था की राह में बारूदी सुरंग बिछा दी है. उसके फटने से अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान हो सकता था, सरकार ने न केवल बीमारी को पकड़ने बल्कि उसको जड़ से खत्म करने के लिये कदम उठाये.

मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने नामदारों द्वारा बिछाई गयी बारूदी सुरंग को "निष्क्रिय" कर दिया और इसका परिणाम है कि आज चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 8.2 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर देखने को मिली है.

उन्होंने कहा कि आज जो वृद्धि दर है वह हमारी अर्थव्यस्था की अपनी ताकत के बल पर है. देश न केवल सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था है बल्कि सबसे तेज गति से गरीबी का शमन भी कर रहा है.

पीएम मोदी ने ये भी कहा कि 50 करोड़ रुपये से अधिक से सभी कर्जों की समीक्षा की गयी है और कर्जों की वसूली में नियमों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित किया जा रहा हैय प्रधानमंत्री ने कहा कि बैंकों को आपस में मिलाने का प्रस्ताव है. उनके काम में विशेषज्ञता का समावेश किया गया है.

वसूलेंगे बकाया

मोदी ने कहा कि '12 बड़े ऋण डिफॉल्टरों पर 1.75 लाख करोड़ रुपये का बकाया है. अन्य 27 चूककर्ताओं पर एक लाख करोड़ रुपये बकाया है. हम सुनिश्चित करेंगे कि इनसे एक-एक पाई वसूल की जाए.'

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »