निजामुद्दीन मरकज केस की सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट में 2 जुलाई को होगी. सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पता लगाने के लिए कहा है कि क्या राज्य के अधिकारियों ने बाहर से आए लोगों के वीजा को रद्द करने का कोई आदेश जारी किया है. इस मामले में सीयू सिंह ने कहा कि वीजा रद्द करने का आदेश 900 व्यक्तियों के लिए एक सामान्य नोट था.
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गृह मंत्रालय की अधिसूचना कहती है कि निर्णय राज्य के अधिकारियों द्वारा मामले के आधार पर लिया जाना है. यह पता लगाना होगा कि क्या आदेश पारित किए गए थे. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या मरकज में शामिल लोगों का वीजा रद्द करने का व्यक्तिगत आदेश जारी किया गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर वीजा रद्द कर दिया गया है तो आप हमको स्पष्टीकरण देना होगा कि वे भारत में अभी भी क्यों हैं. यदि वीजा रद्द नहीं किया गया है तो यह एक अलग स्थिति है. अब मामले की सुनवाई 2 जुलाई को होगी.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक याचिका पर हलफनामा दायर करते हुए मरकज मामले की सीबीआई जांच से केंद्र सरकार ने मना किया था. तबलीगी मरकज मामले में पुलिस की तरफ से की जा रही जांच को सरकार ने सही बताया था.
सरकार के हलफनामे में कहा गया था कि 21 मार्च को ही दिल्ली पुलिस ने तबलीगी जमात के मुखिया मौलाना साद को मरकज में जमा लोगों को वापस भेजने के लिए कहा था, लेकिन इसका पालन नहीं हुआ. उल्टे यह जानकारी सामने आई है कि मौलाना साद लोगों को वहीं रुके रहने और मरकज में शामिल होने के लिए कह रहा है.
लॉकडाउन के ऐलान के साथ केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार ने भी सोशल डिस्टेंसिंग जैसे कई मसलों पर निर्देश जारी किए. लेकिन तबलीगी जमात के लोगों ने जानबूझकर सभी निर्देशों की उपेक्षा की. ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता है कि पुलिस और प्रशासन की तरफ से तबलीगी मरकज मामले में कोई लापरवाही बरती गई.
संजय शर्मा