SC ने जल्लिकट्टू पर लगाया प्रतिबंध, जयललिता ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी, अध्यादेश लाने की मांग

तमिलनाडु में होने वाले जल्लिकट्टू त्योहार पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद राज्य में लोगों ने विरोध में अपनी दुकानों के शटर गिरा दिए. राज्य की मुख्यमंत्री जयललिता ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है. CM ने इस त्योहार को लेकर अध्यादेश लाने की मांग कर डाली है.

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जल्लिकट्टू को लेकर जयललिता ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी जल्लिकट्टू को लेकर जयललिता ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी

मोनिका शर्मा

  • चेन्नई,
  • 12 जनवरी 2016,
  • अपडेटेड 12:11 AM IST

पशु अधिकार समूह पेटा इंडिया ने मंगलवार को जल्लिकट्टू पर लगे प्रतिबंध को हटाने वाली केंद्र की अधिसूचना पर सुप्रीम कोर्ट के रोक लगाने को आंशिक जीत करार देते हुए कहा कि वह पशुओं की रक्षा के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी. दूसरी तरफ तमिलनाडु में इस फैसले के खिलाफ विरोध शुरू हो गया है.

लोगों ने विरोध में मदुरई समेत कई शहरों में दुकानों को बंद कर दिया. राज्य की मुख्यमंत्री जयललिता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है. सीएम ने अपनी चिट्ठी में इस त्योहार को लेकर अध्यादेश लाने की मांग की है.

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इस दौड़ के पक्ष में है राज्य सरकार
तमिलनाडु सरकार इस विवादित दौड़ के पक्ष में है. के बाद मुख्यमंत्री जयललिता ने फैसले पर खुशी जाहिर की थी. साथ ही भी कहा था. लेकिन एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट्स ने इस फैसले को क्रूर करार दिया था.

2011 से ही है रोक
यूपीए सरकार ने इस विवादित परंपरा पर 2011 में ही प्रतिबंध लगाने का आदेश दे दिया था, लेकिन 2015 तक इसका पालन नहीं हुआ था. अब केंद्र के रोक हटाने के बाद यह पोंगल यानी 15 जनवरी को दौड़ दोबारा होनी थी. लेकिन एनिमल राइट्स वेलफेयर बोर्ड ने केंद्र के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी, जिस पर कोर्ट ने यह फैसला दिया है.


मई 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने बैलों को भी ऐसे जानवरों की श्रेणी में शामिल करने का आदेश दिया था, जिन्हें प्रशिक्षित कर त्योहारों में प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल करने पर रोक हो. इसके बाद पिछले साल पहली बार इस त्यौहार पर रोक लगी थी. तमिलनाडु सरकार ने केंद्र से इस त्योहार को जारी रखने के लिए अध्यादेश लाने की मांग की थी. लेकिन पर्यावरण मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर जल्लिकट्टू और इस तरह के दूसरे आयोजनों का रास्ता साफ कर दिया.

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पेटा का पक्ष
पेटा इंडिया ने यह भी कहा कि यह रोक पशुओं को क्रूरता से भी बचाएगा और अनेक लोगों को इस साल इस तरह की घटना में चोटिल होने या मरने से बचाएगा. उसने कहा कि उच्चतम न्यायालय की रोक पशु अधिकार संगठन के 16वें स्थापना दिवस पर तोहफा के रूप में आई है.

पेटा इंडिया की मुख्य कार्यकारी अधिकारी पूर्वा जोशीपुरा ने कहा, 'अदालत का कदम इस साल इस तरह की घटनाओं में असंख्य लोगों के चोटिल होने या मारे जाने से बचाएगा. पेटा सांड़ों को उत्पीड़न से बचाने के लिए तब तक अपनी लड़ाई जारी रखेगी जब तक कि उच्चतम न्यायालय एकबार फिर इस बात की पुष्टि नहीं करता है कि जल्लिकट्टू और सांड़ों की दौड़ के लिए सभ्य समाज में कोई स्थान नहीं है.' उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की सात जनवरी की उस अधिसूचना पर रोक लगा दी जिसमें तमिलनाडु में पोंगल के त्योहार के दौरान सांड़ों की लड़ाई के खेल जल्लिकट्टू पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया गया था.

जल्लिकट्टू पर लगे प्रतिबंध को हटाने वाली केंद्र की अधिसूचना को शीर्ष अदालत में कल भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई), पेटा इंडिया और बेंगलूर के एक एनजीओ ने चुनौती दी थी.

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