नहीं माने राहुल गांधी तो लग सकती है मनीष तिवारी की लॉटरी, बन सकते हैं लोकसभा में पार्टी के नेता

राहुल गांधी के भविष्य का पेंच अभी तक सुलझा नहीं है. पार्टी के नेता चाहते हैं कि राहुल अध्यक्ष के पद पर बने रहें. वहीं, राहुल किसी गैर-गांधी को ये जिम्मेदारी देने पर अड़े हैं.

Advertisement
मनीष तिवारी (फाइल फोटो) मनीष तिवारी (फाइल फोटो)

कुमार विक्रांत

  • नई दिल्ली,
  • 14 जून 2019,
  • अपडेटेड 9:23 AM IST

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी हार के बाद अपना पद छोड़ने पर अड़े है. पार्टी के तमाम बड़े नेता उनको मनाने में जुटे हैं. इसी बीच पार्टी ने एक बार फिर सोनिया गांधी को कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुन लिया. ऐसे में 17 जून से शुरू हो रहे संसद सत्र के पहले पार्टी को राज्यसभा और लोकसभा में अपना नेता चुनना होगा. हालांकि, इसका अधिकार पहले ही बतौर संसदीय दल नेता सोनिया का दिया जा चुका है.

Advertisement

सूत्रों की मानें तो राहुल के भविष्य का पेंच अभी तक सुलझा नहीं है. पार्टी के नेता चाहते हैं कि राहुल अध्यक्ष के पद पर बने रहें. वहीं, राहुल किसी गैर-गांधी को ये जिम्मेदारी देने पर अड़े हैं. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि सोनिया संसदीय दल की नेता, राहुल लोकसभा में नेता और पार्टी में महासचिव प्रियंका गांधी फिर गैर गांधी अध्यक्ष की भूमिका रबर स्टाम्प से ज्यादा नहीं रह जाएगी.

ऐसे हालात में लोकसभा के 52 सांसदों में कांग्रेस में बेहतर पकड़ और वरिष्ठता के लिहाज से तीन नाम उभरते हैं- शशि थरूर, मनीष तिवारी और अधीर रंजन चौधरी. वजह ये भी है कि बाकी ज्यादातर सांसद तमिलनाडु, केरल और पंजाब से हैं और नए भी हैं. वहीं, पिछले 5 सालों में मल्लिकार्जुन खडगे लोकसभा में पार्टी के नेता रहे, वो खुद चुनाव हार चुके हैं.

Advertisement

अगर बात शशि थरूर की करें, उनका प्रोफाइल बड़ा है, लेकिन उत्तर भारत की गांव गरीब तक उनका बुद्धिजीवी चेहरा पार्टी को फिट नहीं लगता. साथ ही अपनी पत्नी की मौत के मामले में वो आरोपी हैं और वो मामला अभी तक खत्म नहीं हुआ है. इसके अलावा कई बार के बंगाल के सांसद अधीर रंजन चौधरी जो तेज तर्रार होने के साथ ही गर्म मिजाज के माने जाते हैं, वहीं ममता बनर्जी के सख्त विरोधी रहे हैं. अब संसद में ममता की पार्टी के साथ की बात आएगी तो मामला उलझ सकता है.

ऐसे में तेजी से मनीष तिवारी का नाम उभरता है. दरअसल, मनीष तिवारी कांग्रेस में छात्र जीवन से उठकर आए हैं. पहले पार्टी की छात्र इकाई एनएसयूआई के महासचिव बने, फिर अध्यक्ष भी रहे. कांग्रेस पार्टी के सचिव बने, उसके बाद पार्टी की यूथ विंग के यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे. मनीष यूपीए सरकार में सूचना प्रसारण मंत्री भी बनाए गए. मनीष पार्टी के प्रवक्ता अरसे से हैं. हालांकि, 2014 के चुनावों में स्वास्थ्य कारणों से मनीष ने चंडीगढ़ सीट ना मिलने पर अपनी सीटिंग सीट लुधियाना से चुनाव लड़ने से मना किया था, जिसके बाद आलाकमान उनसे खुश नहीं था, लेकिन मनीष को ये जिम्मेदारी देकर पार्टी ये संदेश दे सकती है कि कांग्रेस में जमीन से उठे कार्यकर्ता को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है.

Advertisement

हालांकि, बाद में मनीष ने अपने स्वास्थ्य की बात सामने रखी. बीते सालों में पार्टी के पक्ष को रखा. हिंदी-अंग्रेजी दोनों भाषाओं में मनीष अच्छी पकड़ रखते हैं. हालांकि, अन्ना आंदोलन के वक्त अन्ना हजारे के खिलाफ खराब शब्दों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पर उनकी खासी किरकिरी हुई थी. उसके बाद मनीष ने शब्दों के चयन में खासी सावधानी बरतना शुरू किया. मनीष ने पंजाब विधानसभा चुनाव में चुनाव लड़ने के लिए जोर शोर से टिकट मांगा, शायद आलाकमान को ये संदेश देने के लिए कि वो चुनाव से भागने वालों में से नहीं है. ऐसे में मनीष तिवारी अगर लोकसभा में कांग्रेस के नेता बना दिए जाएं, तो चौंकने जैसा कुछ नहीं.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »