राफेल के लिए 17 स्क्वाड्रन को एक्टिव करेगा एयरफोर्स, करगिल में दिखाया था पराक्रम

भारतीय वायुसेना बहुचर्चित राफेल विमानों का स्वागत करने के लिए तैयार है. 1999 में करगिल युद्ध के समय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने गोल्डन ऐरोज 17 स्क्वाड्रन की कमान संभाली थी. अब गोल्डन ऐरोज स्क्वाड्रन फिर से शुरू होने जा रहा है.

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इस महीने के अंत तक भारत में राफेल विमान आने शुरू हो जाएंगे (फोटो-IANS) इस महीने के अंत तक भारत में राफेल विमान आने शुरू हो जाएंगे (फोटो-IANS)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 8:50 AM IST

  • भारतीय वायुसेना शुरू करेगी ‘गोल्डन ऐरोज’ 17 स्क्वाड्रन
  • राफेल विमान उड़ाने वाली पहली इकाई होगी स्क्वाड्रन
  • 2016 में भारतीय वायुसेना ने स्क्वाड्रन को बंद कर दिया

भारतीय वायुसेना (आईएएफ) अपनी ‘गोल्डन ऐरोज’ 17 स्क्वाड्रन (वायु सेना की टुकड़ी) को मंगलवार से फिर से शुरू कर सकती है जो बहुप्रतिक्षित राफेल लड़ाकू विमान उड़ाने वाली पहली इकाई होगी. वायुसेना से जुड़े आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ मंगलवार को अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर एक समारोह में 17 स्क्वाड्रन को फिर से शुरू करेंगे जिसे राफेल विमान के देश में आने पर रिसीव करने की तैयारी माना जा रहा है.

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भारतीय वायुसेना बहुचर्चित राफेल विमानों का स्वागत करने के लिए तैयार है. 1999 में करगिल युद्ध के समय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने ‘गोल्डन ऐरोज’ 17 स्क्वाड्रन की कमान संभाली थी. बठिंडा एयर बेस से संचालित स्क्वाड्रन को 2016 में बंद कर दिया गया था. तब भारतीय वायुसेना ने रूस निर्मित मिग 21 विमानों को चरणबद्ध तरीके से हटाना शुरू किया था.

1951 में हुई स्क्वाड्रन की स्थापना

स्क्वाड्रन की स्थापना 1951 में की गई थी और शुरुआत में इसने हैविलैंड वैंपायर एफ एमके 52 लड़ाकू विमानों की उड़ानों को संचालित किया था.

भारत को फ्रांस से पहला राफेल विमान इस महीने के अंत में मिल सकता है. भारतीय वायुसेना (आईएएफ) ने राफेल विमान का स्वागत करने के लिए जरूरी ढांचा तैयार करने और पायलटों के प्रशिक्षण समेत सभी औपचारिक तैयारियों को पूरा कर लिया है.

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सूत्रों ने कहा कि विमान के पहले दस्ते को अंबाला एयर फोर्स स्टेशन में तैनात किया जाएगा. अंबाला एयर फोर्स स्टेशन को भारतीय वायुसेना के रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में गिना जाता है. यहां से भारत-पाक सीमा करीब 220 किलोमीटर है. राफेल विमान की दूसरी स्क्वाड्रन पश्चिम बंगाल के हासीमारा केंद्र में तैनात रहेगी.

2016 में राफेल पर हुआ था सौदा

भारत ने सितंबर 2016 में फ्रांस के साथ एक बड़ा समझौता करते हुए 58 हजार करोड़ रुपये में 36 राफेल विमान का सौदा किया था. भारतीय वायुसेना की टीम पहले ही फ्रांस का दौरा कर चुकी है.इससे पहले पिछले साल सितंबर में भारतीय वायुसेना की 6 सदस्यीय टीम ने फ्रांस के डासॉल्ट मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट का दौरा किया था. इस टीम के साथ वायुसेना के डिप्टी चीफ एयर मार्शल रघुनाथ नांबियार ने पहली भारतीय राफेल काम्बैट एयरक्रॉफ्ट पर उड़ान भी भरा था.

भारतीय वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया था कि सितंबर, 2019 में हमें पहला एयरक्रॉफ्ट मिल जाएगा. यह फ्रांस में 1,500 घंटे की टेस्ट फ्लाइंग के बाद ही भारतीय वायुसेना में शामिल किया जाएगा. राफेल विमान भारतीय धरती पर भारतीय वायुसेना में पहली बार मई, 2020 में तब शामिल हो पाएगा जब अंबाला एयरफोर्स बेस पर 4 विमानों वाली पहली खपत यहां पहुंचेगी. अंबाला एयरफोर्स बेस पर इस खास विमान की तैनाती की जाएगी.

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