राफेल पर सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस, पढ़ें कैसे चले गए दांव-पेंच

प्रशांत भूषण ने पूछा, सरकार को कैसे पता चला कि कैग की रिपोर्ट में बाद में कुछ हिस्से जोड़े जाएंगे? सरकार को नवंबर 2018 में कैसे पता चला कि कैग 2019 की रिपोर्ट में कीमतों से जुड़ा हिस्सा जोड़ेगा?

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सु्प्रीम कोर्ट की फाइल फोटो (इंडिया टुडे आर्काइव) सु्प्रीम कोर्ट की फाइल फोटो (इंडिया टुडे आर्काइव)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 मई 2019,
  • अपडेटेड 8:53 PM IST

राफेल विमान सौदा मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. सरकार की दलीलों पर इस मामले के याचिकाकर्ता और वकील प्रशांत भूषण 2 हफ्ते में लिखित दलील देंगे. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिसंबर 2018 में दिए फैसले के खिलाफ रिव्यू याचिका दायर की गई है जिस पर शुक्रवार को सुनवाई हुई. याचिकाकर्ताओं में प्रशांत भूषण के अलावा यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और संजय सिंह शामिल हैं.

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प्रशांत भूषण की दलील

प्रशांत किशोर ने कोर्ट के समक्ष जिरह शुरू की और अपनी बातें रखीं. भूषण ने कहा, फैसले की समीक्षा का आधार ये है कि दिसंबर 2018 का जजमेंट इसी पर आगे बढ़ रहा था कि याचिकाकर्ता सौदे को रद्द करने की मांग कर रहे थे, जबकि हमलोग ललिता कुमारी जजमेंट के आधार पर सौदे की जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे हैं. रिव्यू की जरूरत इसलिए भी है क्योंकि सरकार की ओर दी गई गलत सूचनाओं के कारण जजमेंट में कई त्रुटियां हैं. यहां तक कि सरकार ने खुद इस मामले में करेक्शन एप्लिकेशन दायर किया है.

प्रशांत भूषण ने जिरह के दौरान पूछा, 'सरकार को कैसे पता चला कि कैग की रिपोर्ट में बाद में कुछ हिस्से जोड़े जाएंगे? सरकार को नवंबर 2018 में कैसे पता चला कि कैग 2019 की रिपोर्ट में कीमतों से जुड़ा हिस्सा जोड़ेगा?' भूषण ने कहा, 'सौदे में एंटी करप्शन क्लॉज क्यों हटाया गया. इस बारे में सरकार जवाब नहीं दे पाई है. यह अकेला मुद्दा फैसला सुनाने के लिए पर्याप्त आधार है. इस सौदे में न तो कोई बैंक गारंटी ली गई और न ही कोई सॉवरन गारंटी. राफेल विमान की सप्लाई में देरी हो रही है, जबकि पहले कहा गया था कि 36 विमानों की सप्लाई जल्द हो जाएगी.'

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प्रशांत भूषण ने सरकार के इस दावे पर भी सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) इस सौदे पर केवल नजर रखे हुए था न कि पीएमओ किसी समानांतर सौदेबाजी में शामिल था. भूषण ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) का भी इसमें रोल था. सौदे में कई ऐसी बातें हैं जिससे तय होता है कि पीएमओ नजर रखने से ज्यादा कुछ कर रहा था जिसकी पूरी जांच होनी चाहिए.

प्रशांत भूषण ने अपनी दलील में कहा, 'प्रधानमंत्री ने जब सौदे का ऐलान किया, उस वक्त अनिल अंबानी और फ्रांस के रक्षा अधिकारियों के बीच बैठक हो रही थी. लगभग उसी वक्त अनिल अंबानी को फ्रांस सरकार की ओर से टैक्स में बहुत बड़ी छूट मिली.'

अरुण शौरी ने क्या कहा

अरुण शौरी ने झूठी गवाही को लेकर जिरह शुरू की. शौरी ने कहा कि सरकार कहती है कि सभी दस्तावेज कैग को दिए जा सकते हैं तो कोर्ट को देने में क्या दिक्कत है? जजमेंट में हर एक त्रुटि के लिए सरकार की ओर से दी गई गलत जानकारी जिम्मेवार है. आपने (कोर्ट) सरकार में भरोसा जताया लेकिन सरकार ने इस भरोसे को तोड़ा. अरुण शौरी ने जजमेंट में और भी त्रुटियों की ओर इशारा किया और कहा कि ये एक्सीडेंटल नहीं है. शौरी ने कहा, आपने (कोर्ट) सरकारी नोट के आधार पर बयान दिया लेकिन सरकार ने आपके भरोसे को तोड़ा.

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अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल की दलील

अटॉर्नी जनरल ने सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा, 'याचिकाकर्ताओं की ओर से कुछ मूलभूत बातें उठाई गई हैं. उन बातों में कुछ अन्य पहलू जोड़कर मुद्दे को तूल दिया गया है. विमान की कीमतों की जहां तक बात है तो यह इंटरगवर्मेंटल एग्रीमेंट (आईजीए) की धारा 10 के तहत तय की गई है. आईजीए के तहत कीमतें नहीं बताई जा सकतीं. कोर्ट ने भी कीमतें नहीं पूछी हैं बल्कि प्रोसीजर की जानकारी मांगी गई है. हमने प्रोजीसर के बारे में बता दिया है. अगर इसमें कोई त्रुटि है भी तो सौदे की समीक्षा का यह आधार नहीं बनता.'

वेणुगोपाल ने कहा, 'वे (याचिकाकर्ता) सौदे पर सवाल उठाना चाह रहे हैं जो देश के लोगों की सुरक्षा को प्रभावित करता है. राफेल विमान सजावट के लिए नहीं हैं. ये हरेक व्यक्ति की सुरक्षा के लिए निहायत जरूरी है. दुनिया में ऐसा कहीं नहीं होता कि ऐसा मामला कोर्ट में लाया जाए.'

CJI और जस्टिस केएम जोसफ के सवाल

वेणुगोपाल की बात सुनकर जस्टिस केएम जोसफ ने ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के बारे में पूछा. उन्होंने अटॉर्नी जनरल से कहा, इसका फैसला कौन करता है, क्या ये कोर्ट इस पर निर्णय ले सकता है? सीजेआई रंजन गोगोई ने सॉवरन गारंटी के बारे में सवाल उठाया. अटॉर्नी जनरल ने इसके जवाब में रूस और अमेरिका के साथ हुए रक्षा सौदों का हवाला दिया जिसमें बैंक गारंटी से भारत को छूट दी गई है. जस्टिस जोसफ ने डोमेन एक्सपर्ट के डिसेंट नोट के बारे में जानकारी मांगी (प्रशांत भूषण के मुताबिक इंटरनेशनल निगोशिएटिंग टीम के तीन रक्षा विशेषज्ञों ने राफेल के मूल्य निर्धारण के संबंध में आपत्तियां लेते हुए एक असहमति नोट जारी किया था). जस्टिस जोसफ के इस सवाल पर वेणुगोपाल ने कहा, तीन रक्षा विशेषज्ञों ने जो मुद्दे उठाए हैं उसे डिफेंस इक्वीजिशन कमेटी को रेफर कर दिया गया है. अंततः तीनों विशेषज्ञ सहमत हो गए. जोसफ ने पूछा, तीनों विशेषज्ञों की सहमति कोर्ट में पेश करने में आपको कोई आपत्ति है? न्यायिक सीमाओं का हवाला देते हुए एटॉर्नी जनरल ने कहा, आपको (कोर्ट) इसमें नहीं जाना चाहिए लेकिन इसके बावजूद आप चाहते हैं तो मैं ऐसा करूंगा.

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इन सभी दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राफेल सौदे की रिव्यू याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.

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