डेविड हेडली बोला- मेरे पिता की मौत के बाद हमारे घर आए थे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री

हेडली ने जिरह के तीसरे दिन कहा कि वह अपने सारे अपराध कबूल करता है. उसने कहा, 'मैं बहुत खराब इंसान हूं. मैं मान गया हूं ये. मैं अपराध स्वीकार कर चुका हूं. आप कह रहे हैं तो फिर मान लेता हूं.'

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डेविड हेडली डेविड हेडली

स्‍वपनल सोनल

  • मुंबई,
  • 25 मार्च 2016,
  • अपडेटेड 3:03 PM IST

मुंबई में 26/11 हमलों के साजिशकर्ताओं में शुमार आतंकी डेविड कोलमैन हेडली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए क्रॉस एग्जामिनेशन शुक्रवार को तीसरे दिन भी जारी है. हेडली ने खुलासा बताया कि उसके पिता की मौत के कुछ हफ्तों बाद तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी उसके घर आए थे.

हेडली के मुताबिक, उसके पिता जब रिटायर हुए थे, तब वे रेडियो पाकिस्तान के महानिदेशक थे. उनका निधन 25 दिसंबर 2008 को हुआ था. हेडली ने कहा कि उसके पिता, भाई और कुछ अन्य परिजन पाकिस्तान इस्टैबलिसमेंट से जुड़े हुए थे, लेकिन वह उनका नाम जाहिर नहीं कर सकता.

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कोर्ट को हेडली ने बताया कि उसने खुद अपने पिता से लश्कर के साथ अपनें संबंधों की चर्चा की थी. उसने कहा, 'मैंने खुद अपने पिता को बताया था कि मैं लश्कर से जुड़ा हूं. उन्होंने इस पर आपत्त‍ि जताई थी.' आतंकी ने बताया कि 9/11 के हमले को लेकर कभी उससे कोई पूछताछ नहीं की गई. उसने कहा कि पाकिस्तान में उसे एक बार गिरफ्तार किया गया था, क्योंकि उसकी पूर्व पत्नी फैजा ने उसके खि‍लाफ केस दर्ज करवाया था.

'NIA के कहने पर नहीं लिया इशरत का नाम'
डेविड हेडली ने उन आरोपों को खारिज किया है, जिसमें कहा गया कि पूछताछ के दौरान एनआईए के कहने पर उसने इशरत जहां का नाम लिया और उसे लश्कर का आतंकी बताया. हेडली ने कहा, 'एनआईए ने मुझे इशरत का नाम लेने की सलाह नहीं दी. उन्होंने मुझसे सवाल किया, जिसका मैंने जवाब दिया. वो भला मुझे इशरत का नाम लेने के लिए क्यों कहेंगे? मैंने तहव्वुर राणा के अमेरिका में ट्रायल के दौरान इशरत का नाम इसलिए नहीं लिया क्योंकि उन्होंने मुझसे इस बारे में सवाल नहीं किया. मैं सिर्फ वही कहता जो मुझसे पूछा जाता.'

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'भारत ने तबाह किया था मेरा स्कूल'
हेडली ने खुलासा किया है कि वह भारत से बदला लेना चाहता था, क्योंकि भारतीय विमानों ने 1971 में उसके स्कूल पर बम बरसाए थे. पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकी ने मुंबई के एक कोर्ट में शुक्रवार को कहा, 'मैं भारत से बदला लेना चाहता था. 07 दिसंबर 1971 को भारतीय विमानों ने बमबारी कर मेरे स्कूल को तबाह कर दिया था. उस हादसे में वहां काम कर रहे कई लोग मारे गए थे.' हेडली ने कहा कि कई सारे कारणों में से एक कारण यह भी रहा कि उसने लश्कर-ए-तैयबा ज्वॉइन किया.

'मैंने याचिका में शर्तें नहीं जुड़वाईं' हेडली ने अदालत को बताया कि उसकी याचिका में भारत या पाकिस्तान को प्रत्यर्पण से इनकार जैसी शर्तों को उसने नहीं जुड़वाया है. आतंकी ने कहा, 'इस ओर की मीटिंग के दौरान मैं शामिल नहीं रहा हूं. मैंने याचिका में यह शर्तें नहीं जुड़वाई कि मैं भारत या पाकिस्तान को प्रत्यर्पण नहीं करूंगा या मुझे फांसी की सजा नहीं दी जाए.' उसने कोर्ट से आगे कहा, 'मैंने सोचा कि मैं यहां सरकार की ओर से गवाही देने के लिए लाया गया हूं.'

'मैं बहुत बुरा आदमी हूं'
हेडली ने जिरह के तीसरे दिन कहा कि वह अपने सारे अपराध कबूल करता है. उसने कहा, 'मैं बहुत खराब इंसान हूं. मैं मान गया हूं ये. मैं अपराध स्वीकार कर चुका हूं. आप कह रहे हैं तो फिर मान लेता हूं.'

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कोर्ट को हेडली ने बताया कि उसे रहने के लिए जेल में कोई लग्जरी सुविधा नहीं दी गई. जिरह के दौरान ऐसे सुझाव के सवाल पर उसने हंसते हुए जवाब दिया. वकील वाहब खान से उससे पूछा कि क्या जेल में उसे वैवाहिक अधिकार दिया गया? लेकिन जज जीके सनप और स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर उज्ज्वल निकम ने इस तरह के सवाल करने पर आपत्ति‍ जताई.

लश्कर ने की थी बाल ठाकरे की हत्या की कोशि‍श
गौरतलब है कि इससे पहले गुरुवार को जिरह के दौरान की हत्या की असफल कोशि‍श की थी. उसने यह भी कबूल किया उसने इस बाबत दो बार शि‍वसेना भवन की रेकी की थी.

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