बातचीत से सुलझ सकता है बाबरी मस्जिद विवाद: किशोर कुणाल

किशोर कुणाल की राय में इस पेचीदा समस्या को सुलझाने के 2 रास्ते हैं. या तो दोनों पक्षों में रजामंदी कायम हो जाए या फिर कानून के बड़े जानकार दोनों पक्षों की ओर से पेश किये गए सबूतों के आधार पर तय करें कि क्या विवादित स्थल पर वाकई पूजा होती थी?

Advertisement
किताब 'अयोध्या रिविजेटेड' के लेखक किशोर कुणाल (सौजन्य: rediff.com) किताब 'अयोध्या रिविजेटेड' के लेखक किशोर कुणाल (सौजन्य: rediff.com)

सुजीत झा

  • लखनऊ,
  • 22 मार्च 2017,
  • अपडेटेड 2:59 AM IST

क्या दशकों पुराने बाबरी मस्जिद विवाद को बातचीत के जरिये सुलझाया जा सकता है? इस मसले पर 'अयोध्या रिविजेटेड' नाम की किताब लिखने वाले किशोर कुणाल का मानना है कि ये मुमकिन है.

समाधान के 2 रास्ते
किशोर कुणाल की राय में इस पेचीदा समस्या को सुलझाने के 2 रास्ते हैं. या तो दोनों पक्षों में रजामंदी कायम हो जाए या फिर कानून के बड़े जानकार दोनों पक्षों की ओर से पेश किये गए सबूतों के आधार पर तय करें कि क्या विवादित स्थल पर वाकई पूजा होती थी?

Advertisement

पहले हो चुकी है कोशिश
कुणाल के मुताबिक इस मसले को बातचीत के रास्ते से सुलझाने की कोशिश पहले भी हो चुकी है. पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह और नरसिम्हा राव इसी रास्ते से मसले को सुलझाना चाहते थे. लेकिन ऐसा नहीं हो सका. साल 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी फैसला सुनाने से पहले दोनों पक्षों को बुलाकर कहा था कि वो मिल-बैठकर किसी नतीजे पर पहुंचें. लेकिन एक बार फिर दोनों पक्षों में एकराय नहीं बन सकी.

किताब में लिखा है समाधान का रास्ता
किशोर कुणाल का दावा है कि उनकी किताब में इस समस्या के समाधान के लिए कारगर तरीके सुझाए गए हैं. उनकी मानें तो मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनवाने वाला बाबर नहीं बल्कि औरगंजेब था.


Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »