राजस्थान: श्लोक पढ़कर जज ने पिता-पुत्र में कराया समझौता, भावुक होकर दोनों ने खत्म किया विवाद

राजस्थान (Rajasthan) में जोधपुर (Jodhpur) के पीपाड़ में जज (Judge) ने बाप बेटे के बीच क़ानून की किताब से नहीं बल्कि संस्कृत के श्लोक पढ़कर अनोखे तरीक़े से मुक़दमे को ख़त्म करवाया.

Advertisement
श्लोक पढ़कर जज ने पिता पुत्र में समझौता कराया श्लोक पढ़कर जज ने पिता पुत्र में समझौता कराया

शरत कुमार

  • जोधपुर ,
  • 11 जुलाई 2021,
  • अपडेटेड 4:20 PM IST
  • भावुक होकर पिता-पुत्र ने किया राजीनामा
  • जज ने संस्कृत का श्लोक सुनाकर खत्म कराया विवाद

राजस्थान (Rajasthan) में जोधपुर (Jodhpur) के पीपाड़ में जज (Judge) ने बाप बेटे के बीच कानून की किताब से नहीं बल्कि संस्कृत के श्लोक (Sanskrit Shlok) पढ़कर अनोखे तरीक़े से मुक़दमे को ख़त्म करवाया.

राष्ट्रीय लोक अदालत में आसोपागांव का मामला सुनवाई के लिए आया था जिसमें बेटे ने बाप के ऊपर संपत्ति के लिए मुक़दमा कर रखा था और बाप ने भी बेटे के ऊपर देखभाल नहीं करने का केस दर्ज कराया था.

Advertisement

जोधपुर के जिला एवं सेशन न्यायाधीश राघवेंद्र काछवाल ने मुक़दमे की सुनवाई के बाद संस्कृत में श्लोक का उच्चारण करते हुए कहा कि पिता के प्रति पुत्र का फर्ज होता है. उन्होंने कहा.

''पिता धर्म: पिता स्वर्ग: पिता हि परमं तप:। पितरि प्रीतिमापन्ने प्रीयन्ते सर्वदेवता:''

उसके बाद बाप और बेटे दोनों को श्लोक का अर्थ समझाते हुए कहा कि पिता धर्म हैं, पिता स्वर्ग हैं और पिता ही सबसे श्रेष्ठ तप हैं. पिता के प्रसन्न हो जाने पर सम्पूर्ण देवता प्रसन्न हो जाते हैं.

इसपर भी क्लिक करें- जोधपुर: इलाज के बहाने तांत्रिक ने दलित महिला के साथ किया दुष्कर्म, पुलिस ने दबोचा
 
ज़िला जज के व्याख्यान से पिता और पुत्र दोनों की आंखों में आंसू भर आए और दोनों ने मुकदमा जारी रखने के बजाए जज साहब से राज़ीनामे के लिए बोला और इस तरह से बाप बेटे के बीच चल रहा विवाद खत्म हो गया. पिता पुत्र के विवाद को इस अनोखे तरीके से खत्म कराने की लोग तारीफ कर रहे हैं. जोधपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत में राज़ीनामे में और प्री लिटिगेशन के 180 मुकदमों का आपसी समझौते से निस्तारण किया गया.

Advertisement

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »