22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के जरिए सीमा पार आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया था. इसके जवाब में पाकिस्तान ने करीब 15 मिसाइलें और सैकड़ों ड्रोन के जरिए भारत के उत्तरी-पश्चिमी हिस्सों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाने की कोशिश की. आजतक ने पंजाब बॉर्डर पर ग्राउंड जीरो से जायजा लिया कि कैसे भारतीय सेना ने पाकिस्तान के इन हवाई हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया.
ब्रिगेड कमांडर ब्रिगेडियर विक्रम चतरथ के मुताबिक, सेना ने अपनी पारंपरिक एंटी-एयरक्राफ्ट गन जैसे एल-70 और ज़ू-23 को आधुनिक रडार और नाइट विजन सिस्टम से अपग्रेड किया है.
अब 'आकाशतीर' संचार प्रणाली के जरिए थलसेना और वायुसेना के बीच रियल टाइम डेटा शेयर किया जा रहा है, जिससे दुश्मन की हर हरकत पर पैनी नजर रखी जा रही है.
ड्रोनों का इस्तेमाल और नाइट ऑपरेशन
सीमा पर तैनात सोवियत-निर्मित 23 मिमी दोहरी-बैरल वाली ZU-23 गन को अब ड्रोन का 'काल' कहा जा रहा है. लेफ्टिनेंट सौरभ प्रताप सिंह ने बताया कि 2.5 किमी की मारक क्षमता वाली यह गन प्रति मिनट 2000 गोलियां दाग सकती है. सूबेदार नासराय्या ए. और हवलदार जगेंद्र के मुताबिक, आधुनिक नाइट विजन सिस्टम लगने के बाद अब यह गन रात के अंधेरे में भी कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोनों और हेलीकॉप्टरों को पलक झपकते ही ढेर कर सकती है.
रूस से मिली अत्याधुनिक Igla-S मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम अब भारतीय जवानों के कंधों पर है. महज 18 किलो वजन वाला यह सिस्टम 6 किमी की रेंज में किसी भी फाइटर जेट या ड्रोन को इंजन की गर्मी (इन्फ्रारेड) के जरिए ट्रैक कर खत्म कर देता है. वहीं, लेफ्टिनेंट कर्नल विशाल कुमार ने एल-70 (L-70) एंटी-एयरक्राफ्ट गन की ताकत दिखाई. स्वीडन की बोफोर्स कंपनी द्वारा विकसित और भारत में निर्मित यह गन अब ऑटो-ट्रैकिंग सिस्टम से लैस है, जो एक मिनट में 300 राउंड फायर कर ड्रोनों के झुंड को तबाह करने में माहिर है.
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भारत का स्वदेशी सिक्योरिटी कवर
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्वदेशी 'आकाश' मिसाइल सिस्टम ने गेमचेंजर की भूमिका निभाई. 25 किलोमीटर की रेंज और 55 किलो के वॉरहेड वाली इस मिसाइल को 'बीईएल' द्वारा निर्मित मल्टी-फंक्शनल रडार से सहयोग मिलता है, जो 80 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन को ट्रैक कर लेता है. सबसे जरूरी 'आकाशतीर' सिस्टम है, जिसने सेना और वायुसेना के रडार और सैटेलाइट डेटा को एक नेटवर्क में जोड़ दिया है.
यह सिस्टम तय करता है कि किस खतरे को कौन सा हथियार नष्ट करेगा. इसी कोऑर्डिनेशन की वजह से सिरसा में भी एक मिसाइल को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया गया था. जैसी सुरक्षा दे रहा है, जिसे ‘आयरन डोम’ जैसा ही माना जा रहा है. ये सिस्टम अलग-अलग तकनीकों को जोड़कर बनाया गया है, जिसे ‘आकाशतीर’ कमांड नेटवर्क ऑपरेट करता है.
मंजीत नेगी