पंजाबियों की पहली पसंद कनाडा, राजनयिक तनाव से अमेरिका और ब्रिटेन भी जा सकते हैं भारतीय स्टूडेंट्स!

पंजाब में स्टूडेंट्स की पहली पसंद कनाडा भी बना हुआ है. आजतक से बातचीत में एक पंजाबी परिवार ने बताया कि उन्होंने पहले अपने बेटे को पढ़ाई के लिए कनाडा भेजा और अब बेटी को भी भेजने की तैयारी है. हालांकि, कुछ भारतीय परिवारों में तनाव देखा जा रहा है. उन्हें डर है कि भारत और कनाडा के बीच राजनयिक विवाद के कारण स्टडी वीजा में देरी हो सकती है. कहा जा रहा है कि कुछ छात्र ऑस्ट्रेलिया, यूके और यूएस जैसे अन्य देशों का रुख कर सकते हैं.

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पंजाब में स्टूडेंट्स के बीच पढ़ाई के लिए कनाडा पहली पसंदीदा जगह बना हुआ है. पंजाब में स्टूडेंट्स के बीच पढ़ाई के लिए कनाडा पहली पसंदीदा जगह बना हुआ है.

मनजीत सहगल

  • चंडीगढ़,
  • 22 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 2:55 AM IST

भारत और कनाडा के बीच राजनयिक विवाद से रिश्तों में खटास आ गई है. दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव भारतीय छात्रों के लिए परेशानी बढ़ा देने वाला साबित हो रहा है. हालांकि, पंजाब में स्टूडेंट्स को रिश्ते में सुधार आने की उम्मीद है और कनाडा को पढ़ाई और नौकरी के लिहाज से पहली पसंद बता रहे हैं. वहीं, माना जा रहा है कि भारतीय छात्र अब ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे दूसरे देशों की ओर रुख कर सकते हैं. 

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आजतक ने रूपनगर और चंडीगढ़ पासपोर्ट सेवा केंद्रों पर जाकर लोगों से बात की. 21 साल के धनप्रीत सिंह पंजाब के मनसा के रहने वाले हैं और IELTS ट्रेनिंग ले रहे हैं ताकि उन्हें कनाडा की एक यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिल सके. वो एक पुलिस फाउंडेशन कोर्स चुनना चाहते हैं जिससे उसे PR पाने का अवसर मिलेगा और कनाडाई पुलिस विभाग में नौकरी मिल सकेगी. कनाडा में काम करने का एक और कारण यह है कि उनके भाई समेत कई रिश्तेदार पहले से ही वहां बस गए हैं. धनप्रीत को कनाडा और भारत के बीच राजनयिक तनाव के बारे में जानकारी है. लेकिन उम्मीद करते हैं कि जल्द ही स्थिति बदल जाएगी.

'मंदी की वजह से काम नहीं मिल रहा'

धनप्रीत कहते हैं कि हां, मैं चिंतित हूं क्योंकि इसका असर छात्रों पर पड़ने वाला है. कनाडा की अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर निर्भर है. वहां पहले से ही मंदी है. लोगों को काम नहीं मिल रहा है. खर्च बढ़ गए हैं. इसलिए इसका असर छात्रों पर ज्यादा पड़ेगा. विवाद को शांत किया जाना चाहिए. हमारे तीन साथी भी कनाडा जाने की योजना बना रहे हैं.

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धनप्रीत की मां राजेंदर कौर का कहना है कि उन्हें बेटे को विदेश भेजने के लिए पड़ोसियों से उधारी लेनी है और कुछ कर्ज भी लेना होगा. पंजाब में कोई नौकरियां नहीं हैं. इसलिए कनाडा भेज रहे हैं. राजिंदर कौर कहती हैं, बहुत तनाव है लेकिन भगवान हमारी मदद करेंगे.

'कनाडाई वीजा पाने में खर्च कर दिए 27 लाख'

इसी तरह रमन कौर को नर्सिंग में मास्टर करने के लिए पहले ही स्टडी वीजा मिल चुका है. रमन अपने पिता का पासपोर्ट बनवाने के लिए पंजाब के रूपनगर में मिलीं. वो कनाडा जा रही हैं. उनका भाई पहले से ही वहां रहता है. रमन कहती हैं कि मैंने ऑस्ट्रेलियाई स्टूडेंट वीजा पाने के लिए पहले ही 15-16 लाख रुपये बर्बाद कर दिए हैं. मुझे वो वीजा नहीं मिल पाया है. बाद में मैंने कनाडाई स्टूडेंट वीजा पाने के लिए अतिरिक्त 27.5 लाख रुपये खर्च किए हैं. मैं अपनी कनाडाई डिग्री पूरी करने के बाद पूरे महीने का वेतन एक दिन में हासिल कर सकूंगी. 

'रिश्तेदार से उधार ले रहे, जमीनें बेच रहे परिजन'

रमन कहती हैं कि मैं भारत और कनाडा के बीच तनाव से अवगत हूं. मैं यह सोचकर उदास नहीं होना चाहती और उम्मीद करती हूं कि तनाव खत्म हो जाएगा. आईटीबीपी में सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त हुए रमन के पिता रणजीत सिंह कहते हैं कि बेरोजगारी से छुटकारा पाने के लिए कर्ज लेना बेहतर था. उन्होंने कहा, लोग अपने बच्चों को विदेश भेजने के लिए रिश्तेदारों से उधार ले रहे हैं. अपनी जमीनें बेच रहे हैं या कर्ज जुटा रहे हैं, जिससे नौकरी की गारंटी होगी. उन्होंने कहा, रमन का छोटा भाई पहले से ही कनाडा में काम कर रहा है.

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माना जा रहा है कि भारत और कनाडा के बीच तनाव होने के चलते भारतीय छात्र अब दूसरे देशों की ओर भी रुख कर सकते हैं. क्योंकि माता-पिता को डर है कि दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव लंबे समय तक जारी रहने से करियर पर फर्क पड़ सकता है और पैसे भी फंस सकते हैं. इसके अलावा, स्टडी वीजा या पीआर प्रक्रिया में देरी हो सकती है. ऐसी अटकलें हैं कि कनाडाई सरकार भारतीय छात्रों के लिए एजुकेशन वीजा की संख्या भी सीमित कर सकती है.

'कनाडा में 41 प्रतिशत भारतीय छात्र रहते'

एक अनुमान के अनुसार, कनाडा में कुल अंतर्राष्ट्रीय छात्रों में से करीब 41 प्रतिशत भारतीय हैं. चंडीगढ़ स्थित स्टूडेंट वीजा एक्सपर्ट का कहना है कि तनाव की वजह से भारतीय छात्र ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे अन्य देशों की ओर भी रुख कर सकते हैं.

आजतक की मुलाकात चंडीगढ़ निवासी भावना से हुई. उन्होंने हाई एजुकेशन के लिए यूके जाने का प्लान बताया. भावना कहती हैं, कनाडा में वीजा सेवाएं बंद करने के भारत के फैसले से निश्चित रूप से भारतीय छात्रों और उनके रिश्तेदारों पर असर पड़ेगा. मुझे आश्चर्य हुआ कि लोग केवल कनाडा क्यों जा रहे हैं जबकि अन्य देशों में भी बेहतर विकल्प उपलब्ध हैं.

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'कनाडा के लिए सबसे ज्यादा स्टूडेंट्स स्टडी वीजा लेते'

बता दें कि 2022 में करीब 7.5 लाख भारतीय छात्र पढ़ाई के लिए विदेश गए. 2022 में 2,26,450 भारतीय छात्र कनाडा में पढ़ाई करने पहुंचे तो दूसरे नंबर पर स्टूडेंट्स की पसंद अमेरिका बना. यूएस में 1,99,182 भारतीय छात्रों ने एडमिशन लिया. छात्रों की संख्या के मामले में ब्रिटेन तीसरे नंबर पर रहा. यूके ने 1.4 लाख भारतीय छात्रों को स्टूडेंट वीजा जारी किया.

कहा जा रहा है कि कनाडा में वीजा सेवाएं रुकने से भारतीय अंतरराष्ट्रीय छात्रों और उनके रिश्तेदारों की स्वदेश वापसी पर असर पड़ेगा. घरेलू छात्रों के लिए कनाडा की सब्सिडी वाली शिक्षा नीति पर भी असर पड़ेगा. कनाडा में कुल अंतरराष्ट्रीय छात्रों में करीब 40% भारतीय स्टूडेंट हैं और कनाडाई अर्थव्यवस्था में 4.9 बिलियन डॉलर का योगदान दे रहे हैं.

'स्टूडेंट्स को कोई दिक्कत नहीं होगी'

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि कनाडा में इंडियन स्टूडेंट्स को कोई दिक्कत नहीं होगी. वो वहां दूतावास में संपर्क कर सकते हैं. विदेश मंत्रालय का कहना है कि रिश्तों का असर भारत के छात्रों पर नहीं पड़ेगा. यहां तक की वीजा पर लगाई गई अस्थाई पाबंदी का असर भी. भारतीय छात्रों पर नहीं पडे़गा, यानी कनाडा में पढ़ रहे छात्रों के परिजनों को डरने की कोई जरूरत नहीं है.

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भारत ने कनाडा के लोगों के लिए वीजा सर्विस रद्द क्यों की?

सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि कनाडा में भारतीय राजनायिकों को खुलेआम खालिस्तानी आतंकी धमकी दे रहे हैं. खालिस्तानी आतंकियों पर कनाडा सरकार की नरमी की वजह से भारतीय दूतावास में काम करना इस वक्त मुश्किल है, लिहाजा इस वजह से अस्थाई तौर पर वीजा सर्विस रद्द कर दी गई है. दुनिया के किसी कोने में रहने वाले कनाडा के 
लोगों को भारत वीजा नहीं देगा.

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