राज्यसभा से भी GNCT बिल पास होने पर भड़की AAP, कहा- संसद में हुई लोकतंत्र की हत्या

राज्यसभा से बिल पास होने के बाद डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि आज का दिन लोकतंत्र के लिए काला दिन है. दिल्ली की जनता द्वारा चुनी हुई सरकार के अधिकारों को छीन कर LG के हाथ में सौंप दिया गया.

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो) दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो)

पंकज जैन

  • नई दिल्ली,
  • 24 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 11:27 PM IST
  • विधेयक लोकसभा में 22 मार्च को पारित हुआ था
  • सुप्रीम कोर्ट एक विकल्प हैः अभिषेक मनु सिंघवी

राज्यसभा में बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2021 (GNCT) पारित हो गया. इस बिल के पास होने पर आम आदमी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. AAP इस बिल को लेकर लगातार केंद्र सरकार को घेर रही थी. यह विधेयक लोकसभा में 22 मार्च को पारित हुआ था.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राज्यसभा से GNCT Bill के पास होने को भारतीय लोकतंत्र के लिए शोक का दिन बताया. उन्होंने कहा कि कितनी भी बाधाएं आएं, हम अच्छा काम करना जारी रखेंगे. हम रुकेंगे नहीं और ना ही हमारी रफ्तार कम होगी.

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वहीं, राज्यसभा से बिल पास होने के बाद डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि आज का दिन लोकतंत्र के लिए काला दिन है. दिल्ली की जनता द्वारा चुनी हुई सरकार के अधिकारों को छीन कर LG के हाथ में सौंप दिया गया. विडंबना देखिए कि लोकतंत्र की हत्या के लिए संसद को चुना गया, जो हमारे लोकतंत्र का मंदिर है. दिल्ली की जनता इस तानाशाही के खिलाफ लड़ेगी.

कांग्रेस ने भी लोकसभा में GNCTD बिल का पुरजोर तरीके से विरोध किया था. अब राज्यसभा से बिल पास होने के बाद कांग्रेस नेता अभिषेक मुन सिंघवी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट एक विकल्प है. ऐसे में इस विधेयक को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जा सकता है. 

बिल लाने के पीछे केंद्र ने दिया था ये तर्क

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किशन रेड्डी ने कहा कि दिसंबर, 2013 तक दिल्ली का शासन सुचारू रूप से चलता था और सभी मामलों का हल बातचीत से हो जाता था, लेकिन पिछले कुछ सालों में विषयों को लेकर हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में जाना पड़ा क्योंकि कुछ अधिकारों को लेकर कोई स्पष्टता नहीं थी. 

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रेड्डी ने कहा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कैबिनेट के फैसले, एजेंडा के बारे में उपराज्यपाल को सूचित करना अनिवार्य है. दिल्ली विधानसभा के साथ एक केंद्र शासित प्रदेश है. यह सभी लोगों को समझना चाहिए कि इसकी सीमित शक्तियां हैं. इसकी तुलना किसी अन्य राज्य से नहीं की जा सकती है. 
 

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