आम आदमी पार्टी (AAP) में जारी उथल-पुथल के बीच कांग्रेस ने उस पर जोरदार हमला बोल दिया है. राघव चड्ढा समेत राज्यसभा के सात सांसदों के BJP में शामिल होने के बाद कांग्रेस को AAP पर निशाना साधने का मौका मिल गया है. कांग्रेस नेता अजय माकन ने AAP को BJP की B टीम बताते हुए कहा कि उसका असली चेहरा सबके सामने आ चुका है.
अजय माकन ने कहा कि AAP का नकाब अब उतर चुका है. पार्टी पूरी तरह बेनकाब हो गई है. AAP असल में BJP की B टीम की तरह काम कर रही है. उन्होंने कहा, ''आने वाले दिनों में पंजाब और दिल्ली में भी AAP को बड़े पैमाने पर पलायन का सामना करना पड़ेगा.'' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब में AAP के शासन ने 'राष्ट्र-विरोधी' लक्षण दिखाए हैं.
कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी ने AAP के साथ सिर्फ दो बार गठबंधन किया था. पहले साल 2014 में चुनाव के बाद और फिर साल 2024 के लोकसभा चुनाव में, लेकिन आम आदमी पार्टी लगातार उन राज्यों में चुनाव लड़ती रही, जहां कांग्रेस और BJP के बीच सीधा मुकाबला था. इस मामले में अजय माकन ने गुजरात और गोवा में हुए चुनावों का उदाहरण दिया.
उन्होंने कहा कि साल 2022 के विधानसभा चुनावों में AAP ने कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया. खासतौर पर गुजरात में उसके बढ़ते वोट शेयर के कारण कांग्रेस का प्रदर्शन सबसे खराब रहा. अरविंद केजरीवाल पर सीधा निशाना साधते हुए अजय माकन ने आरोप लगाया कि साल 2024 में जेल से बाहर आते ही उन्होंने हरियाणा की 90 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया.
इसके अलावा दिल्ली चुनावों में अकेले लड़ने का फैसला भी इसी रणनीति का हिस्सा बताया गया. जब AAP के साथ भविष्य में किसी गठबंधन की संभावना पर सवाल पूछा गया, तो अजय माकन ने साफ कहा कि निकट भविष्य में ऐसा कोई समझौता नहीं होगा और शायद कभी भी नहीं. हाल के घटनाक्रमों के बाद कांग्रेस अब विपक्षी में भी AAP को अलग थलग करना चाहती है.
वैसे आम आदमी पार्टी तकनीकी रूप से इंडिया ब्लॉक का हिस्सा नहीं है, लेकिन कई मुद्दों पर वो विपक्ष का समर्थन करती रही है. कांग्रेस के एक वर्ग का मानना है कि AAP ऐसा करके अपनी वैधता बढ़ाती है और अंततः कांग्रेस के हितों को नुकसान पहुंचाती है. इसी वजह से कांग्रेस अब यह नैरेटिव बनाने में जुटी है कि केजरीवाल का असली चेहरा सामने आ चुका है.
कांग्रेस चाहती है कि विपक्षी दल भी आम आदमी पार्टी से दूरी बना लें. अरविंद केजरीवाल की ममता बनर्जी और एमके स्टालिन जैसे नेताओं के साथ बढ़ती नजदीकियां भी कांग्रेस को खटक रही हैं. जहां एक ओर राहुल गांधी ने तमिलनाडु और पुडुचेरी में स्टालिन के साथ प्रचार नहीं किया, वहीं केजरीवाल ने उनके साथ रोड शो किया. कुछ ऐसा ही पश्चिम बंगाल में भी दिखा.
राहुल गांधी जहां तृणमूल कांग्रेस पर हमला करते रहे, वहीं केजरीवाल ने ममता बनर्जी के समर्थन में प्रचार किया. कांग्रेस के भीतर यह भी आशंका जताई जा रही है कि ये बढ़ती नजदीकियां भविष्य में 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले एक अलग विपक्षी धड़े का रूप ले सकती हैं, जो प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदारी पेश करे. इन बातों को लेकर कांग्रेस में चिंता बढ़ गई है.
राहुल गौतम