टैरिफ ड्रामा 2.0: अमेरिका से व्यापार समझौते की आखिरी कोशिश में भारत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि शुक्रवार से वो उन देशों को चिट्ठी लिखकर नए टैक्स प्रस्तावों की जानकारी देने वाले हैं, जिनके साथ सहमति लगभग बनने वाली है. जिन देशों से सहमति नहीं होगी, उनपर अमेरिका अपने यहां पुरानी तय दरों से टैक्स वसूलेगा. भारत समेत दर्जनभर देश आखिरी समय पर डील करने की दौड़ में हैं.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

दीपू राय

  • नई दिल्ली,
  • 04 जुलाई 2025,
  • अपडेटेड 4:58 PM IST

अमेरिका के साथ कारोबार करने वाले दुनिया भर के देशों की नजरें 9 जुलाई की डेडलाइन पर हैं. 2 अप्रैल को अमेरिका ने उसके यहां विदेशी समानों पर भारी भरकम टैक्स लगा दिया था, जिसे टैरिफ कहा जाता है. अमेरिका का तर्क है कि बाकी देश अपने बाजार में उसके समानों पर ज्यादा टैक्स लगा रहे हैं, जबकि अमेरिका में यह काफ कम है. बराबरी के तर्क में कई पेचिंदगियां थीं, जिस पर बातचीत के लिए अमेरिका ने 90 दिन का समय दिया था. 

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अब अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि नई मियाद के खत्म होने के बाद पहली अगस्त से विदेशी समानों पर उसके यहां टैक्स की नई दरें लागू हो जाएंगी. फिलहाल शुक्रवार से वो उन देशों को चिट्ठी लिखकर नए टैक्स प्रस्तावों की जानकारी देने वाले हैं, जिनके साथ सहमति लगभग बनने वाली है. जिन देशों से सहमति नहीं होगी, उनपर अमेरिका अपने यहां पुरानी तय दरों से टैक्स वसूलेगा. भारत समेत दर्जनभर देश आखिरी समय पर डील करने की दौड़ में हैं और सबसे बड़ी अड़चन है- जीएम फसलें.

क्या है पूरा मामला?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुक्रवार से 10 से 12 देशों को पत्र भेजने वाले हैं, जिनमें बताया जाएगा कि 1 अगस्त से उनके उत्पादों पर कितना टैक्स लगेगा. ट्रंप ने कहा कि टैरिफ 10% से शुरू होकर 70% तक जा सकते हैं. 

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बता दें कि कुछ देशों जैसे चीन और वियतनाम, पहले ही भारी शुल्क झेल रहे हैं. अब भारत जैसे देश जल्दबाज़ी में डील फाइनल करना चाहते हैं.

क्यों अहम है ये डील?

- ट्रिलियन डॉलर का वैश्विक व्यापार दांव पर
- बिना डील वाले देशों को भारी झटका लग सकता है
- भारत के करीब 53 बिलियन डॉलर के अमेरिकी निर्यात पर असर हो सकता है
- दवाइयों, कपड़ा, ऑटो पार्ट्स जैसे सेक्टर प्रभावित होंगे
 
क्या कहते हैं आंकड़े?

9 जुलाई: डील करने की आखिरी तारीख
26%: भारत पर प्रस्तावित अमेरिकी टैरिफ
53 बिलियन डॉलर: अमेरिका को भारत का सालाना निर्यात
55%: चीन पर वर्तमान टैरिफ
20%: वियतनाम पर डील के बाद टैरिफ
40%: चीन से होकर भेजे जा रहे माल पर शुल्क

 

कितने देशों से हो चुकी है सहमति

- अब तक अमेरिका ने यूके और वियतनाम से डील कर ली है और चीन के साथ शर्तें आसान की हैं, लेकिन टैरिफ अभी भी भारी हैं.

क्या है वियतनाम डील?

- सीधे निर्यात पर 20% टैक्स
- चीन जैसे देशों से होकर आए माल पर 40% टैक्स
 
क्या है भारत की स्थिति?

- डील लगभग तैयार है, 2 से 3 दिन में घोषणा संभव
- सबसे बड़ी बाधा: अमेरिका चाहता है भारत जीएम मक्का और सोया का आयात खोले
- भारत का विरोध: जीएम फसलों पर बैन, किसानों और खाद्य सुरक्षा का हवाला

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अगर 9 जुलाई तक डील नहीं हुई तो क्या होगा?

भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले लगभग सभी उत्पादों पर 26% टैक्स लग सकता है.

समानांतर कानूनी लड़ाई

- एक अमेरिकी अदालत ने ट्रंप के टैरिफ को अवैध बताया है, लेकिन 31 जुलाई की अपील सुनवाई तक वे लागू रहेंगे.

 कौन क्या कह रहा है?

- डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हम शायद कल से देशों को पत्र भेजना शुरू करेंगे. हर दिन 10 देशों को पत्र भेजे जाएंगे, जिनमें बताया जाएगा कि उन्हें अमेरिका से व्यापार करने के लिए कितना टैक्स देना होगा.

CII अध्यक्ष राजीव मेमानी ने कहा कि हर क्षेत्र में 100% जीत नहीं होगी. समझौता कई चरणों में होगा. जिन मुद्दों के बड़े राजनीतिक असर हैं, उन्हें बाद में सुलझाया जाएगा.

अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि हम भारत के साथ समझौते के बहुत करीब हैं.

 

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