हिंदू नववर्ष के मौके पर आज अयोध्या के राम मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना हो गई है. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 150 किलोग्राम के श्रीराम यंत्र की पूजा-अर्चना की, इसकी स्थापना की. श्रीराम यंत्र की स्थापना का यह कार्यक्रम शुभ अभिजात मुहूर्त में हुआ.
इस आयोजन में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अयोध्या पहुंचीं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अयोध्या के महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचने पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने स्वागत किया. राष्ट्रपति एयरपोर्ट से सड़क मार्ग से राम मंदिर के लिए रवाना हो गईं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करीब चार घंटे तक अयोध्या में रहेंगी.
सीएम योगी ने सपा-कांग्रेस पर साधा निशाना
इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यही भारत की आस्था है, जिस आस्था को अंधविश्वास कहकर अपमानित किया गया था. उन्होंने कहा कि अपमानित करने वाले वही लोग हैं, जो उत्तर प्रदेश या देश की सत्ता में रहते थे. सीएम योगी ने कहा कि वह लोग अपनी सत्ता बचाने के लिए नोएडा नहीं जाते थे.
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उन्होंने कहा कि उनके लिए वह अंधविश्वास और रूढ़िवादी नहीं था. लेकिन, राम मंदिर की बात करना, काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण की बात करना, कृष्ण कन्हैया के मथुरा वृंदावन की बात करना उनके लिए अंधविश्वास का पर्याय था. सीएम योगी ने कहा कि यह प्रभु श्रीराम का केवल मंदिर ही नही है, यह भारत के राष्ट्र मंदिर का प्रतीक बन गया है. रामराज्य की आधारशिला भी है. उन्होंने कहा कि आज आपको भारत के अंदर देखने को मिल रहा होगा- राम राज बैठे त्रैलोका, हरषित भए गए सब सोका.
श्रीराम यंत्र क्या है?
सनातन परंपरा में हर एक देवी-देवता के एक यंत्र का विधान है. इन यंत्रों की स्थापना और पूजा-पाठ का विधान है और इन्हें पूजने के लाभ भी बताए गए हैं. जिस तरह से श्री यंत्र, कुबेर यंत्र और नवग्रह यंत्र हैं, उसी तरह भगवान राम का भी श्रीराम यंत्र होता है. श्रीराम यंत्र को भगवान राम की शक्ति का प्रतीक माना जाता है. ज्योतिषविदों का कहना है कि श्रीराम यंत्र का देवगुरु बृहस्पति से गहरा संबंध है.
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ज्योतिष में बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, शिक्षा, धन, संतान और भाग्य का कारक ग्रह माना गया है. इनके प्रभाव से जीवन में सकारात्मकता, सफलता, संतुलन और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है. भगवान राम का जन्म कर्क राशि, पुनर्वसु लग्न में हुआ था. यहां गुरु उच्च राशि कर्क में स्थित होकर गजकेसरी योग का निर्माण करते हैं. भगवान राम को विष्णु जी का सातवां अवतार माना जाता है.
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