सिंधु बॉर्डर: किसान आंदोलन के 'बीर' बालक की कहानी, ट्राली में पढ़ाई के साथ लड़ रहा हक की लड़ाई

बीर जलंधर के सेंट जूड्स कॉन्वेंट स्कूल में सातवीं कक्षा का छात्र है. पढ़ाई ऑनलाइन चल रही है. लेकिन यहां न लैपटॉप है, न टेबल-कुर्सी, लिहाजा बीर मोबाइल पर ही स्कूल का पूरा काम निपटा लेता है. 

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किसान पिता के साथ आंदोलन में बीर किसान पिता के साथ आंदोलन में बीर

मौसमी सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 08 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 8:59 AM IST
  • सिंधु बॉर्डर पर चल रहा है किसानों का प्रदर्शन
  • जालंधर से पिता के साथ आया सातवीं क्लास का बीर
  • यहीं ट्राली में बैठकर पढ़ाई पूरी करता है बीर

नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का धरना प्रदर्शन चल रहा है. आज इसी कड़ी में किसानों ने भारत बंद बुलाया है. दिल्ली के सिंधु बॉर्डर पर किसान बड़ी संख्या में डटे हुए हैं और उनके प्रदर्शन का यहां आज 13वां दिन है. किसान यहां पूरे इंतजाम के साथ आए हुए हैं. कुछ किसान परिवार के साथ भी हैं. 

12 साल का बीर भी सिंधु बॉर्डर पर है. उसकी आंखों में एक अलग ही चमक है. बीर किसान पिता के साथ आंदोलन में भाग ले रहा है तो यहीं उसकी पढ़ाई भी चल रही है. पढ़ाई के साथ-साथ वह अपने जत्थे के किसानों की सेवा भी करता है.

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बीर जलंधर के सेंट जूड्स कॉन्वेंट स्कूल में सातवीं कक्षा का छात्र है. पढ़ाई ऑनलाइन चल रही है. लेकिन यहां न लैपटॉप है, न टेबल-कुर्सी, लिहाजा बीर मोबाइल पर ही स्कूल का पूरा काम निपटा लेता है. 

मोबाइल से स्कूल का काम करता है बीर

बीर की कहानी वाकई एक वीर बालक की कहानी है. 25 नवंबर को जब जलंधर के पास उसके गांव तलवन से किसानों का जत्था निकला तो बीर ने अपने पिता को कहा कि वह भी उनके साथ दिल्ली चलेगा और वो दिल्ली पहुंच गया. बीर ने बताया, ''मैं बड़ा होकर किसान बनना चाहता हूं. मोदी जी ने ऐसे कानून पास कर दिए हैं जो किसान के खिलाफ हैं, वे हमको कमजोर बनाते हैं, इसलिए मैं पापा जी के साथ आ गया, मैं अपने गांव में नई टेक्नोलॉजी लाऊंगा, नए-नए तरीके से खेती करूंगा.''

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सेवा में भी जुटा है बीर
इस कड़ाके की सर्दी में बीर सेवा और निष्ठा की एक नई मिसाल है. वह ना सिर्फ अपना ध्यान रखता है बल्कि औरों का ध्यान भी रखता है. सुबह का खाना बनाकर सब लोग सिंधु बॉर्डर पर बने स्टेज पर भाषण सुनने जाते हैं और उसके बाद वह शाम को आकर अपनी पढ़ाई करता है.  फिर सब मिल बांट कर खाना खाते है. 

अपने बेटे के लिए उसके पिता पवित्र सिंह कभी कभी चिंता तो करते हैं मगर उनको लगता है कि ज़मीनी हकीकत ही बीर को और मज़बूत बनाएगी. पिता पवित्र सिंह ने कहा, ''मुझे लगता है कि उसको पता होना चाहिए कि अपने हक के लिए कैसे लड़ना है, हम लोग क्यों यह आंदोलन कर रहे हैं, क्या संघर्ष कर रहे हैं? वह भी हमारे साथ यहां पर सेवा करता है, साथ-साथ अपनी पढ़ाई लिखाई भी.''

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ट्राली ही बनी बीर की क्लास

बीर के पिता के पास दस एकड़ जमीन है, उसी में वह लोग खेतीबाड़ी करते हैं. अब बीर बड़े होकर अपने पिता की तरह किसान बनना चाहता है. घर की याद आती है तो वो मां और छोटे भाई से वीडियो कॉल पर बात कर उनका हालचाल पूछ लेता है. 

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बीर ने तय किया है कि वह अपने पिता को लिए बगैर घर वापस नहीं जाएगा. तब तक उनके साथ ही रहेगी जब तक यह सफर मंजिल तक नहीं पहुंचता. बीर ट्रैक्टर की ट्रॉली में वह अपने पापा और लगभग 10 और लोगों के साथ चैन की नींद सो जाता है, इस उम्मीद के साथ कि शायद कल एक नई सुबह होगी.


 

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