डिप्लोमेटिक बटन ऑन... जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री अराघची को लगाया फोन, जानिए क्या हुई बात

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से वेस्ट एशिया संघर्ष पर चर्चा की. भारत ने शांति, भारतीयों की सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बताया.

Advertisement
मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात पर एस जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री से चर्चा की. (File Photo: X) मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात पर एस जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री से चर्चा की. (File Photo: X)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:45 AM IST

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को अपने ईरानी काउंटरपार्ट सैयद अब्बास अराघची से बात की और वेस्ट एशिया के हालात पर चर्चा की. 28 फरवरी के बाद से यह उनकी तीसरी बातचीत थी, जब US और इज़रायल ने ईरान पर हमला किया था, जिसके बाद पूरे इलाके के कई देशों पर जवाबी हमले किए गए थे.

जयशंकर ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया, "आज शाम ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ चल रहे झगड़े के बारे में लेटेस्ट डेवलपमेंट पर डिटेल में बातचीत हुई. हम टच में रहने पर सहमत हुए."

Advertisement

दोनों मंत्रियों के बीच पहले दो बार बात हो चुकी है. पहले 28 फरवरी और फिर 5 मार्च को दोनों नेताओं ने बातचीत की थी.

इसके साथ ही, एस जयशंकर ने मंगलवार को अपने जर्मन और दक्षिण कोरियाई समकक्षों से भी बात की क्योंकि नई दिल्ली पश्चिम एशिया संकट, खासकर एनर्जी सप्लाई के नतीजों से निपटने के लिए डिप्लोमैटिक कोशिशें तेज़ कर रही है.

संसद में क्या बोले थे जयशंकर?

एस जयशंकर ने सोमवार को संसद में कहा था कि कोशिशें तो हुई हैं, लेकिन इस वक्त लीडरशिप लेवल पर ईरान के साथ कॉन्टैक्ट करना साफ़ तौर पर मुश्किल है.

जयशंकर ने कहा कि वेस्ट एशिया में लड़ाई के दौरान ईरान में लीडरशिप लेवल पर भी कई लोग मारे गए हैं और उन्होंने सरकार के तीन बड़े मैसेज भी बताए. दिल्ली शांति और बातचीत पर लौटने के पक्ष में है, इंडियन डायस्पोरा की सुरक्षा प्राथमिकता है और एनर्जी सिक्योरिटी सबसे ऊपर होगी.

Advertisement

यह भी पढ़ें: 'हमारा सुप्रीम लीडर तय करना अमेरिका का काम नहीं', अराघची की ट्रंप को दो टूक

राज्यसभा में 'वेस्ट एशिया के हालात पर' अपनी तरफ से बयान देने वाले जयशंकर ने कहा कि लड़ाई शुरू होने के बाद से करीब 67,000 इंडियन नागरिक लड़ाई वाले इलाके से लौट आए हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी पक्ष ने 28 फरवरी को इस इलाके में 'तीन जहाजों' को भारतीय बंदरगाहों पर डॉक करने की इजाज़त मांगी थी, जो 1 मार्च को दे दी गई थी.

 
---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement