किरेन रिजिजू ने कांग्रेस चीफ खरगे को लिखा पत्र, महिला आरक्षण विधेयक के लिए मांगा सपोर्ट

महिला आरक्षण कानून के इम्प्लीमेंटेशन को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. इस मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखा है.

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किरेज रिजिजू ने विपक्ष से राजनीति से ऊपर उठने की अपील की है. (File Photo: ITG) किरेज रिजिजू ने विपक्ष से राजनीति से ऊपर उठने की अपील की है. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:33 AM IST

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर महिला आरक्षण कानून के इम्प्लीमेंटेशन में देरी को करोड़ों महिलाओं के साथ अन्याय करार दिया है. रिजिजू ने यह कदम खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे उस पत्र के जवाब में उठाया है, जिसमें कांग्रेस ने सरकार पर राजनीतिक फायदे के लिए जल्दबाजी करने का आरोप लगाया था. 

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संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि 2029 में 'नारी शक्ति' के लिए इस कानून को लागू करना राजनीति नहीं बल्कि भारत की बेटियों से किया गया वादा निभाना है. उन्होंने विपक्षी दल से हिचकिचाहट छोड़कर साथ आने का आह्वान किया है, जिससे उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके. 

बजट सत्र के विस्तार के साथ 16 से 18 अप्रैल तक स्पेशल मीटिंग बुलाई गई है, जिसमें 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में जरूरी संशोधन किए जाएंगे. परिसीमन से जुड़े ये संशोधन 2029 तक इम्प्लीमेंटेशन के लिए अहम हैं, जिससे मामला अनिश्चितता में न फंसा रहे.

राजनीति से ऊपर उठने की अपील

किरेन रिजिजू ने अपने पत्र में जोर देकर कहा कि महिलाओं से किए गए वादों को 'स्थगन की राजनीति' का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब कानून को हकीकत में बदलने का वक्त आया है, तब सवाल उठाना और हिचकिचाना सही नहीं है. मंत्री के मुताबिक, उन्होंने सभी दलों के नेताओं से संवाद किया है, लेकिन अब इरादों को ठोस कार्रवाई में बदलने का वक्त आ गया है.

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इससे पहले मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा था कि परिसीमन और अन्य पहलुओं के विवरण के बिना इस कानून पर किसी उपयोगी चर्चा की उम्मीद करना 'नामुमकिन' है. खरगे ने मांग की थी कि 29 अप्रैल को राज्यों के चुनाव खत्म होने के बाद इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए. उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक माइलेज लेने की कोशिश बताया था.

यह भी पढ़ें: 'हम वही वादा निभा रहे...', लोकसभा में हंगामा कर रहे विपक्ष को किरेन रिजिजू ने क्या याद दिलाया?

मोदी सरकार ने महिला आरक्षण कानून को हकीकत में बदल दिया है और अब इम्प्लीमेंटेशन की बाधाओं को दूर किया जा रहा है. 16 से 18 अप्रैल की स्पेशल मीटिंग में होने वाले संशोधन 2029 से पहले महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए बेहद अहम हैं. रिजिजू ने कहा कि प्रक्रिया के नाम पर देरी करना सिर्फ इंसाफ को रोकना है, जिससे करोड़ों महिलाएं प्रभावित होंगी.

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