लोकसभा में प्रियंका गांधी ने संभाली कमान, PM मोदी के संबोधन के दौरान विपक्ष के मौन की कहानी!

संसद में जहां आमतौर पर तीखे टकराव और हंगामा देखने को मिलता है, वहीं पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर प्रधानमंत्री मोदी के बयान के दौरान एक अलग तस्वीर नजर आई. प्रधानमंत्री को विपक्ष ने शांत रहकर सुनने का फैसला किया. सियासी सरगर्मी के बीच विपक्ष का यह संयम और परिपक्वता एक दुर्लभ क्षण था, जिसने दिखाया कि राष्ट्रीय मुद्दे राजनीति से ऊपर होते हैं.

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राष्ट्रीय मुद्दे पर सियासत से ऊपर उठी संसद, लोकसभा में विपक्ष ने शांत रहकर सुना पश्चिम एशिया संघर्ष पर प्रधानमंत्री का बयान. (Photo: ITG) राष्ट्रीय मुद्दे पर सियासत से ऊपर उठी संसद, लोकसभा में विपक्ष ने शांत रहकर सुना पश्चिम एशिया संघर्ष पर प्रधानमंत्री का बयान. (Photo: ITG)

ऐश्वर्या पालीवाल

  • नई दिल्ली,
  • 23 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:47 PM IST

अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ युद्ध का 24वां दिन और देशभर में एलपीजी संकट को लेकर विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांग रहा था. संसद और बीजेपी रिपोर्टर के तौर पर, मैंने अपना दिन संसद के अंदर संभावित हंगामे की उम्मीद के साथ शुरू किया. जैसा अनुमान था, कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने इस मुद्दे पर नोटिस भी दिया था. मैं इसे कवर करने के लिए पूरी तरह तैयार थी, तभी दोपहर 12 बजे खबर मिली कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर प्रधानमंत्री मोदी का पहला बयान लोकसभा में दोपहर 2 बजे होने वाला है.

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मुझे लग रहा था की विपक्ष हंगामा करेगा, जवाब मांगेगा. इसी उम्मीद से मैं 1:50 बजे लोकसभा की प्रेस गैलरी में पहुंची. हैरानी की बात यह थी कि सामान्य दिनों की तुलना में गैलरी असामान्य रूप से खाली थी. कुछ रिपोर्टर अपनी सीटें ले रहे थे. मैं भी जल्दी से बैठ गई और तभी मेरी नजर पड़ी घड़ी पर, 1:56 बज रहे थे और सामने से प्रधानमंत्री सदन में प्रवेश कर रहे थे. सफेद कुर्ता और ग्रे मोदी जैकेट में, वह तय समय से चार मिनट पहले पहुंचे थे.

मैंने देखा की- जैसे ही दरवाजा खुला और प्रधानमंत्री अपनी सीट की ओर बढ़े, बीजेपी सांसदों ने 'भारत माता की जय' के नारे लगाने शुरू कर दिए. अमित शाह, राजनाथ सिंह और किरेन रिजिजू पहले से ही अपनी सीटों पर मौजूद थे. विपक्ष की प्रतिक्रिया देखने के लिए मैंने तुरंत विपक्षी बेंचों की ओर देखा, प्रधानमंत्री का स्टेटमेंट शुरू होने में 4 मिनट बाकी थे, प्रियंका गांधी वाड्रा अपनी सीट पर बैठी थीं, मणिकम टैगोर भी मौजूद थे, लेकिन राहुल गांधी और के.सी. वेणुगोपाल जैसे बड़े चेहरे गायब थे. लगभग 1:59 बजे असदुद्दीन ओवैसी सदन में दाखिल हुए.

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प्रियंका का इशारा और शांत विपक्ष

उसी समय मैंने देखा कि मणिकम टैगोर, प्रियंका गांधी के पास जाकर उनसे बात कर रहे थे. दोनों के बीच एक संक्षिप्त चर्चा हुई की प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान कैसे प्रतिक्रिया देनी है? कुछ ही पलों में यह तय हो गया कि वे बिना किसी हंगामे के प्रधानमंत्री का बयान सुनेंगे. जैसे ही घड़ी ने 2 बजाए, प्रधानमंत्री मोदी खड़े हुए और उन्होंने बोलना शुरू किया. उन्होंने कहा की भारत इस युद्ध से प्रभावित हुआ है. 2:03 बजे कुछ टीएमसी सांसद भी सदन में आए, लेकिन महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी जैसे तेज-तर्रार चेहरे नदारद थे. इसी बीच बीजेपी के अन्य सांसद भी धीरे-धीरे आकर अपनी सीटें लेने लगे.

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी 60% एलपीजी आयात करता है. उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 10 वर्षों में ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण के लिए सरकार ने जो कदम उठाए हैं, वे आज देश के काम आ रहे हैं. पूरे भाषण के दौरान विपक्षी बेंचें शांत रहीं. मैंने देखा कि प्रियंका गांधी वाड्रा ध्यानपूर्वक प्रधानमंत्री को सुन रही थीं. उनके सामने वाली पंक्ति में बैठे दीपेंद्र हुड्डा बीच-बीच में पीछे मुड़कर उनसे चर्चा कर रहे थे. 2:06 बजे समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, मणिकम टैगोर के पास पहुंचे और दोनों के बीच विपक्ष के रुख को लेकर बातचीत हुई.

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आखिरकार विपक्ष ने सामूहिक रूप से यह निर्णय लिया कि प्रधानमंत्री का बयान बिना किसी बाधा के सुना जाएगा. जहां एक ओर एनडीए के सांसद बड़ी संख्या में मौजूद थे- जेडीयू, टीडीपी, शिवसेना के सदस्य. वहीं विपक्ष के कुछ ही सांसद मौजूद थे, लेकिन सभी शांत थे. प्रधानमंत्री का बयान ठीक 24 मिनट बाद, 2:24 बजे समाप्त हुआ. उन्होंने बैठकर पानी पिया, फिर राजनाथ सिंह और अमित शाह की ओर मुड़कर उनसे संक्षिप्त बातचीत की, स्पीकर को नमन किया और सदन से बाहर चले गए. बीजेपी और संसद की 5 साल की मेरी रिपोर्टिंग में, यह एक बेहद असामान्य पल था, जब हंगामे की जगह सुनने ने ले ली. युद्ध जैसे अति-संवेदनशील मुद्दे पर दोनों पक्षों की परिपक्वता एक साथ देखने को मिली.

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