हिंद महासागर में श्रीलंका के तट से महज 40 नॉटिकल मील दूर अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी युद्धपोत को डुबोए जाने की घटना ने भारत की रणनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी और जयराम रमेश ने इस घटना को भारत की विदेश नीति की विफलता और ऊर्जा सुरक्षा के लिए सीधा खतरा करार दिया है.
राहुल गांधी ने चेतावनी देते हुए कहा कि दुनिया एक उतार-चढ़ाव वाले दौर में है. कांग्रेस नेता ने कहा, "हमारा 40% से ज्यादा तेल आयात होर्मुज स्ट्रेट से होता है. लड़ाई अब हमारे आसपास पहुंच गई है, ईरानी जहाज हिंद महासागर में डूब गया है, फिर भी प्रधानमंत्री चुप हैं. भारत को एक मजबूत हाथ की जरूरत है, न कि एक ऐसे PM की जिसने हमारी रणनीतिक स्वतंत्रता के साथ समझौता कर लिया हो."
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक चौंकाने वाला तथ्य शेयर करते हुए लिखा, ''जिस ईरानी युद्धपोत को अमेरिका ने डुबोया, वह अभी कुछ दिन पहले (19-25 फरवरी 2026) विशाखापट्टनम में आयोजित भारतीय नौसेना के 'मिलान' अभ्यास में शामिल हुआ था. यह जहाज भारत का मेहमान था. हमारे पानी से निकलते ही इसे निशाना बनाया जाना चौंकाने वाला है. मोदी सरकार की चुप्पी दर्शाती है कि वह डरी हुई है."
केरल कांग्रेस बोली- क्या वॉशिंगटन हमें भरोसे में नहीं लेता?"
केरल कांग्रेस ने इस कार्रवाई को भारतीय संप्रभुता का अपमान बताया. उन्होंने सवाल किया कि एक 'रणनीतिक साझेदार' (अमेरिका) भारत को बिना बताए उसके इलाके में ऐसी मनमानी कार्रवाई कैसे कर सकता है? माल ढुलाई और इंश्योरेंस के रेट बढ़ने लगे हैं, जिसका असर जल्द ही हर भारतीय की जेब पर पड़ेगा. कांग्रेस ने मांग की है कि भारत को वाशिंगटन के सामने अपनी आधिकारिक नाराजगी दर्ज करानी चाहिए.
भारत के लिए चिंता की बात क्यों?
भारत अपनी 80% ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है. हिंद महासागर में इस तरह की सैन्य सक्रियता ग्लोबल ट्रेड और एनर्जी सप्लाई चेन को पूरी तरह तबाह कर सकती है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार की 'चुप्पी' भारत के आर्थिक भविष्य को जोखिम में डाल रही है.
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