मंत्रियों के साथ चार घंटे तक चली पीएम मोदी की महाबैठक, मिडिल ईस्ट संकट समेत इन मुद्दों पर चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक करीब साढ़े चार घंटे चली. बैठक में 2047 के विजन, ईज ऑफ लिविंग और रिफॉर्म्स पर जोर दिया गया. नौ मंत्रालयों ने प्रेजेंटेशन दिया, जबकि पश्चिम एशिया संकट और उसके आर्थिक असर पर भी चर्चा हुई.

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साढ़े चार घंटे चली बैठक में पीएम मोदी ने मंत्रियों को 2047 विजन पर काम करने का संदेश दिया (Photo: PIB) साढ़े चार घंटे चली बैठक में पीएम मोदी ने मंत्रियों को 2047 विजन पर काम करने का संदेश दिया (Photo: PIB)

हिमांशु मिश्रा / मंजीत नेगी / ऐश्वर्या पालीवाल

  • नई दिल्ली,
  • 21 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:55 PM IST

पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार शाम अपने सभी मंत्रियों के साथ एक बड़ी बैठक की. यह बैठक करीब साढ़े चार घंटे तक चली. इसमें देश की तरक्की से जुड़े कई बड़े मुद्दों पर बात हुई, मंत्रालयों का काम देखा गया और आगे की रणनीति तय की गई.

यह बैठक शाम 5 बजे 'सेवा तीर्थ' में शुरू हुई और साढ़े चार घंटे तक चली. इसमें केंद्र सरकार के सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्री और बाकी राज्यमंत्री भी शामिल हुए. यह इस साल की पहली पूरी कैबिनेट बैठक थी. साथ ही यह उस वक्त हुई जब मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे होने वाले हैं.

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बैठक क्यों बुलाई गई?

सूत्रों के मुताबिक यह बैठक सरकार का एक तरह का 'मिड-टर्म रिव्यू' था. अलग-अलग मंत्रालयों ने क्या किया, पिछले कुछ महीनों में कौन से बड़े फैसले लिए गए, उनका नतीजा क्या रहा और आगे क्या करना है, यह सब पर चर्चा की गई.

9 मंत्रालयों ने प्रेजेंटेशन दी

9 मंत्रालयों ने अपना-अपना काम बैठक में पेश किया. सबसे पहले कॉमर्स मंत्रालय ने प्रेजेंटेशन दी. इसके बाद पेट्रोलियम, गृह मंत्रालय, वित्त और विदेश मंत्रालय जैसे अहम मंत्रालयों के काम का भी रिव्यू हुआ.

मंत्रालयों से पहले ही कहा गया था कि वे अपने सुधारों को चार हिस्सों में बांटकर बताएं. पहला, कानून में बदलाव. दूसरा, नियमों में बदलाव. तीसरा, नीति में बदलाव. और चौथा, काम करने के तरीके में बदलाव. साथ ही यह भी बताना था कि इन बदलावों का आम लोगों पर क्या असर पड़ा.

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पीएम मोदी ने मंत्रियों को क्या कहा?

पीएम मोदी ने मंत्रियों को साफ निर्देश दिए कि 2047 को ध्यान में रखकर काम करें. यानी भारत को 2047 तक एक विकसित देश बनाने का जो लक्ष्य है, उसे हमेशा सामने रखें. उन्होंने 'ईज ऑफ लिविंग' यानी आम लोगों की जिंदगी को आसान बनाने पर और सुधारों पर जोर दिया. बड़ी सरकारी योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर फोकस रहा कि काम ठीक से हो रहा है या नहीं और मंत्रालयों के बीच तालमेल कैसा है.

यह भी पढ़ें: मोदी ने मेलोनी को मेलोडी ही क्यों ग‍िफ्ट की? 2024 के इस वीड‍ियो में छिपा है जवाब

पश्चिम एशिया संकट पर भी हुई बात

इस समय मिडिल ईस्ट यानि पश्चिम एशिया में जो तनाव चल रहा है, उसका असर भारत की इकोनॉमी पर भी पड़ रहा है. बैठक में इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई. 

प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों को कहा कि ऐसे कदम उठाए जाएं जिससे इस संकट की वजह से आम नागरिकों को कम से कम परेशानी हो. खासतौर पर एनर्जी, खेती, खाद, एविएशन, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टरों पर खास ध्यान दिया गया.

पहले से ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में मंत्रियों का एक ताकतवर अनौपचारिक समूह इस मिडिल ईस्ट संकट पर नजर रख रहा है. हालांकि राजनाथ सिंह गुरुवार की बैठक में नहीं थे क्योंकि वे साउथ कोरिया के दौरे पर हैं. इसी तरह स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी जिनेवा में होने के चलते बैठक में नहीं आ सके.

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विदेश मंत्री ने पीएम के 5 देशों के दौरे की जानकारी दी

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक में पीएम मोदी की हाल की पांच देशों की विदेश यात्रा के बारे में सभी मंत्रियों को जानकारी दी. इस दौरे में क्या हासिल हुआ और आगे के लिए क्या रास्ता बना, यह सब बताया गया.

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