पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान से की बात, इंफ्रा प्रोजेक्ट्स पर अटैक की निंदा की

PM मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से फोन पर की बात, क्षेत्रीय स्थिरता-शांति पर जोर, बुनियादी ढांचों पर हमले की निंदा

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पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन के बीच हुई फोन पर खास बातचीत (File Photo) पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन के बीच हुई फोन पर खास बातचीत (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:50 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बात की है. इस दौरान पीएम मोदी ने उन्हें ईद-उल-फितर और ईरानी नए साल नवरोज (Nowruz) की शुभकामनाएं दीं. दोनों नेताओं के बीच हुई इस बातचीत में न केवल त्योहारों की खुशियां साझा की गईं, बल्कि मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालातों और सुरक्षा से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई.

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पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि यह त्योहारी सीजन पूरे पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि लेकर आएगा. पिछले कुछ समय से इस क्षेत्र में चल रहे तनाव के बीच उनका यह संदेश काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि क्षेत्र की शांति ही वैश्विक विकास का असली रास्ता है.

बुनियादी ढांचों पर हमलों की कड़ी निंदा

बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर हो रहे हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की. उनका मानना है कि इस तरह के हमले न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालते हैं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को भी बुरी तरह प्रभावित करते हैं. इससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है.

एक और अहम मुद्दे पर बात करते हुए पीएम मोदी ने नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) की रक्षा करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग हमेशा खुले और पूरी तरह सुरक्षित रहें, ताकि व्यापार में कोई रुकावट न आए.

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28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से क्षेत्र में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं.  इसी कड़ी में प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति के बीच यह दूसरी महत्वपूर्ण बातचीत थी. इससे पहले 12 मार्च को भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई थी, जिसमें राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने ईरान की मौजूदा स्थिति और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर अपना नजरिया साझा किया था. प्रधानमंत्री ने भारत के पुराने रुख को दोहराते हुए साफ कहा कि किसी भी विवाद का हल केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है.

ईरान का ्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा का परिवहन इसी रास्ते से होता है. जंग शुरू होने के बाद से ईरान ने यहां से जहाजों की आवाजाही को काफी सीमित कर दिया है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा बढ़ गया है. इसी संकट को देखते हुए पीएम मोदी ने कई वैश्विक नेताओं, जैसे सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस और मलेशिया के राष्ट्राध्यक्षों से भी संपर्क साधा है, ताकि क्षेत्र में स्थिरता बहाल की जा सके.

आखिर में, प्रधानमंत्री ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए वहां की सरकार द्वारा दिए जा रहे लगातार समर्थन की सराहना की. उन्होंने पेजेश्कियन को धन्यवाद दिया कि ईरान ने हमेशा भारतीयों के हितों का ख्याल रखा है. 

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