'बीजेपी के लिए नैतिक मृत्युदंड की खबर...', केजरीवाल के बरी होने पर क्या बोले अखिलेश, महबूबा समेत विपक्षी नेता

दिल्ली की अदालत ने आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत 21 अन्य आरोपियों को डिस्चार्ज करते हुए सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया. फैसले के बाद विपक्षी नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा. अखिलेश यादव ने इसे बीजेपी के लिए ‘नैतिक मृत्युदंड’ बताया, जबकि महबूबा मुफ्ती ने कहा कि इससे जांच एजेंसियों की मनमानी उजागर हुई है.

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केजरीवाल पर कोर्ट के फैसले के बाद विपक्ष ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा. (Photo: ITG) केजरीवाल पर कोर्ट के फैसले के बाद विपक्ष ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:48 PM IST

दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को आबकारी नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया. अदालत ने सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया. दोनों नेताओं के अलावा इस मामले में 21 अन्य लोगों को भी डिस्चार्ज किया गया है. विपक्ष के नेताओं ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है.

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'बीजेपी के लिए किसी नैतिक मृत्युदंड से कम नहीं'

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का यह फैसला बीजेपी के लिए किसी 'नैतिक मृत्युदंड' से कम नहीं है. उन्होंने कहा, 'आज दिल्ली के लोकप्रिय पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ सत्य और न्याय दोनों खड़े हैं. आरोप कभी इतना बड़ा नहीं हो सकता कि वो सच को आच्छादित कर ले. आज हर ईमानदार आशा भरी सांस लेगा और बीजेपी के समर्थक शर्म के मारे घोर आत्म-लज्जित हो रहे होंगे. बीजेपी ने दिल्ली के निवासियों से विश्वासघात किया है.'

'जांच एजेंसियों की मनमानी को उजागर हो गई'

पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अदालत का यह फैसला जांच एजेंसियों की 'मनमानी' को उजागर करता है. उन्होंने एक्स पर लिखा, 'आज के फैसले ने केजरीवाल, सिसोदिया और कविता को आबकारी नीति मामले में डिस्चार्ज करते हुए जांच एजेंसियों की दबंगई को सामने ला दिया है.' 

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मुफ्ती ने कहा कि जब एजेंसियों को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता है, तो न्याय सबसे पहले जख्मी होता है और सच्चाई सालों के दर्द और आंसुओं के बाद सामने आती है. उन्होंने कहा, 'न कोई प्रथम दृष्टया मामला. न कोई ठोस सबूत. फिर भी सालों की कैद. सत्ता का दुरुपयोग और संस्थाओं का हथियार की तरह इस्तेमाल सबसे खतरनाक है, लेकिन यह सिलसिला जारी है.'

'न्यायपालिका ने झूठ का जाल काट दिया'

तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता ने भी राहत जताई. उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला 'झूठ का जाल' था और न्यायपालिका ने उसे काट दिया है. कविता, जो बीआरएस अध्यक्ष और तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी हैं, ने कहा कि वह शुरू से कहती रही हैं कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से विपक्षी दलों पर थोपा गया था. उन्होंने कहा, 'सत्यमेव जयते. यह झूठ का जाल था. न्यायपालिका ने इसे पूरी तरह काट दिया.'

'हमें भी न्यायपालिका पर भरोसा है, हमें भी न्याय मिलेगा'

दिल्ली में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि अदालत ने यह भी कहा है कि सीबीआई के जांच अधिकारी (IO) के खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, 'एजेंसियां गलत तरीके से विपक्षी दलों के खिलाफ केस दर्ज करती रहती हैं. बीजेपी इसका इस्तेमाल लोगों को बदनाम करने के लिए करती है. हमें भी न्यायपालिका पर भरोसा है कि आने वाले समय में हमें भी न्याय मिलेगा. हम लड़ाई लड़ रहे हैं.'

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