2029 तक तैयार होगी 'वन नेशन, वन इलेक्शन' की रूपरेखा, पैनल चीफ ने बताया

'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर काम कर रही संसद की संयुक्त समिति ने संकेत दिए हैं कि 2029 के लोकसभा चुनाव तक यह व्यवस्था लागू हो सकती है. समिति का दावा है कि ज्यादातर हितधारकों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है.

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'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर लंबे समय से काम चल रहा है. (Photo: ITG) 'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर लंबे समय से काम चल रहा है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:46 PM IST

देश में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' लागू करने की दिशा में तैयारियां तेज हो गई हैं. इस मामले पर गठित संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा कि समिति ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर काम कर रही है, जिससे 2029 के लोकसभा चुनाव तक एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था लागू की जा सके.

गोवा में समिति की दो दिवसीय बैठक के दौरान पीपी चौधरी ने बताया कि समिति ने मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और उनके मंत्रिमंडल के साथ चर्चा की. बैठक में इस बात पर विचार किया गया कि पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने में क्या चुनौतियां आ सकती हैं और उनका समाधान कैसे निकाला जा सकता है.

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पीपी चौधरी ने बताया कि समिति अब तक गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और गोवा समेत कई राज्यों का दौरा कर चुकी है. इस दौरान संवैधानिक विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों और अन्य हितधारकों से राय ली गई.

'वन नेशन, वन इलेक्शन' के समर्थन में कितने लोग?

पीपी चौधरी ने दावा किया कि करीब 99 फीसदी नागरिक संगठनों और अन्य हितधारकों ने 'वन नेशन, वन इलेक्शन' के प्रस्ताव का समर्थन किया है. समिति अब ऐसा मॉडल तैयार करने में जुटी है, जिस पर सभी राजनीतिक दलों की सहमति बन सके.

जेपीसी अध्यक्ष ने यह भी कहा कि अगर कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री और राजनीतिक दल स्वेच्छा से तैयार हों तो 2029 से पहले भी कुछ राज्यों के चुनावी चक्र को लोकसभा चुनाव के साथ जोड़ा जा सकता है.

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हर साल चुनाव में 7 लाख करोड़ का नुकसान

पीपी चौधरी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति के समक्ष पेश आर्थिक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि बार-बार अलग-अलग चुनाव होने से देश को करीब 7 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होता है. उनका कहना है कि एक साथ चुनाव होने से न केवल यह नुकसान रुकेगा, बल्कि अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा भी होगा.

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चौधरी ने कहा कि लगातार चुनाव होने से प्रशासनिक कामकाज भी प्रभावित होता है. चुनाव ड्यूटी में बड़ी संख्या में सरकारी शिक्षकों की तैनाती होने से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई बाधित होती है, जिसका सबसे ज्यादा असर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों पर पड़ता है.

पीपी चौधरी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना वाला 'वन नेशन, वन इलेक्शन' देश का एक बड़ा चुनावी सुधार है. इससे शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी, चुनावी खर्च कम होगा और भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी.

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